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राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को सिविल-मिलिट्री तालमेल का एक मॉडल बताया

युवा ब्यूरोक्रेट्स से विकसित भारत के लिए गवर्नेंस को मजबूत करने का आग्रह किया

Rajnath Singh, Union Defence Minister, Defence Minister of India, BJP, Bharatiya Janata Party, Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration, LBSNAA
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मसूरी , 29 Nov 2025

Last updated on: Nov 29, 2025, 18:16 IST

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने युवा नागरिक सेवकों से राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को समझने और वीर सैनिकों की तरह ही ऐसी कठिन परिस्थितियों के लिए सदैव तैयार रहने का आह्वान किया। रक्षामंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर नागरिक-सैन्य समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां प्रशासनिक मशीनरी ने सशस्त्र बलों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण सूचनाओं का संचार किया और जनता का विश्वास जीता। 

रक्षा मंत्री ने 29 नवंबर, 2025 को उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, सशस्त्र बलों ने संतुलित और बिना किसी उकसावे के जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान और पीओके में आतंकी शिविरों को नष्ट कर दिया, लेकिन पड़ोसी देश के दुर्व्यवहार के कारण ही सीमा पर स्थिति सामान्य नहीं हो पाई। 

उन्होंने सैनिकों की वीरता की सराहना की और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए गए कार्यों की भी सराहना करते हए कहा कि उन्होंने महत्वपूर्ण सूचनाओं का संचार किया और देश भर में मॉक ड्रिल का सफल संचालन सुनिश्चित किया। रक्षा मंत्री ने वर्ष 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने के लिए शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' और 'सुधार, प्रदर्शन एवं परिवर्तन' के मंत्र का उल्लेख करते हुए, श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने में नागरिक सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2014 में हमारी सरकार बनी थी, तब आर्थिक आकार के मामले में भारत 11वें स्थान पर था। 

पिछले 9-10 वर्षों में, हम चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। यहां तक कि मॉर्गन स्टेनली जैसी अत्यधिक प्रतिष्ठित वित्तीय फर्म भी अब कहती है कि भारत अगले दो-तीन वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। आप केवल आदर्शवादी संरक्षक नहीं, बल्कि लोगों के सेवक हैं। आप केवल प्रदाता ही नहीं, बल्कि सशक्तिकरण के सूत्रधार भी हैं। 

आपका चरित्र भ्रष्ट न हो। आपका आचरण सत्यनिष्ठा से परिपूर्ण होना चाहिए। आपको एक ऐसी संस्कृति बनानी होगी जहां सत्यनिष्ठा न तो कोई गुण हो और न ही अपवाद; बल्कि यह दैनिक जीवन का एक सामान्य हिस्सा हो। उन्होंने अधिकारियों से उत्तरदायी और सार्वजनिक जवाबदेही की भावना के साथ कार्य करने का आग्रह किया।

रक्षा मंत्री ने युवा नागरिक सेवकों से प्रौद्योगिकी-संचालित युग में नवोन्मेषी तरीके से कार्य करने और लोगों की समस्याओं का समाधान खोजने का आह्वान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री जन-धन योजना, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और आयकर विभाग की फेसलेस असेसमेंट योजना की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी आज एक सक्षमकर्ता की भूमिका निभा रही है। 

रक्षा मंत्रालय की सम्पूर्ण पहल का उल्लेख करते हुए, उन्होंने बताया कि यह एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)-संचालित स्वचालन प्रणाली है जो रक्षा खरीद और भुगतान का पारदर्शी तरीके से विश्लेषण करती है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी एक माध्यम होनी चाहिए, साध्य नहीं। रक्षा मंत्री कहा ने अधिकारियों से कहा कि आपको जन-पहुंच और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहिए। 

कल्याण को बढ़ावा देने और समावेशिता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहिए। श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर भी बल दिया कि नागरिक सेवकों के रूप में, प्रशिक्षुओं को प्रत्येक नागरिक के साथ सहानुभूति और समझदारी से पेश आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी समाज के वंचित या कमज़ोर वर्गों के साथ संवाद करते हैं, तो उन्हें यह समझना चाहिए कि लोगों के संघर्ष न केवल उनके प्रयासों से, बल्कि व्यापक सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से भी प्रभावित होते हैं। 

यही बात एक प्रशासक को वास्तव में जन-केंद्रित और करुणामय बनाती है। रक्षा मंत्री ने सिविल सेवाओं में महिलाओं की निरंतर प्रगति को स्वीकार करते हुए कहा कि नवीनतम यूपीएससी परीक्षा में एक महिला ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है और शीर्ष पांच उम्मीदवारों में से तीन महिलाएं थीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक, कई महिलाएं कैबिनेट सचिवों के पदों तक पहुंचेंगी और भारत की विकास यात्रा का नेतृत्व करेंगी।

श्री राजनाथ सिंह ने फाउंडेशन कोर्स को केवल एक प्रशिक्षण मॉड्यूल नहीं, बल्कि एक कुशल, सक्षम और संवेदनशील शासन प्रणाली के निर्माण की प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने एलबीएसएनएए की व्यापक प्रशिक्षण व्यवस्था की सराहना की, जो इसे एक संपूर्ण संस्थान बनाती है और देश की प्रशासनिक क्षमताओं को मज़बूत बनाती है।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की विरासत पर विचार व्यक्त करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि उनके नाम पर स्थापित अकादमी साहस, सरलता और सत्यनिष्ठा की प्रतीक है। उन्होंने 1965 के युद्ध में शास्त्री जी के नेतृत्व, हरित क्रांति में उनकी भूमिका और "जय जवान, जय किसान" के उनके संदेश को याद किया और अधिकारियों से उनके उदाहरण से प्रेरणा लेने का आग्रह किया। 

यूपीएससी के 100वें वर्ष के अवसर पर, उन्होंने कहा कि यूपीएससी और एलबीएसएनएए के बीच साझेदारी ने प्रशासकों की कई पीढ़ियों को आकार दिया है और यह भारत के शासन ढांचे को मज़बूत करती रहेगी। इससे पहले, श्री राजनाथ सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने अकादमी परिसर में एक ओडीओपी मंडप का भी उद्घाटन किया।

 

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