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भारत समुद्री सप्ताह 2025 में हरित विकास, पत्तन आधुनिकीकरण और रक्षा पोत निर्माण साझीदारियों का प्रदर्शन

‘‘शुद्ध शून्य लक्ष्य के अंतर्गत भारत का 2047 तक प्रति टन माल कार्बन उत्सर्जन 70 प्रतिशत घटाने का लक्ष्य’’ : सर्बानंद सोनोवाल

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5 Dariya News

मुंबई , 28 Oct 2025

Last updated on: Oct 29, 2025, 14:57 IST

भारत समुद्री सप्ताह (आईएमडब्ल्यू) 2025 अनेक युगांतरकारी घटनाओं का गवाह बना। इसमें भारत सरकार ने संवहनीयता, नवोन्मेष, सुरक्षा और समुद्री कायाकल्प के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। पत्तन अवसंरचना, हरित ऊर्जा और रक्षा पोत निर्माण से संबंधित नीति निर्माताओं, विचारकों और समुद्र विशेषज्ञों ने अपनी चर्चाओं से प्रौद्योगिकी, सहयोग और जलवायु के प्रति जवाबदेही के जरिए वैश्विक समुद्री परिवर्तन का अग्रणी बनने की भारत की महत्वाकांक्षा के लिए माहौल तैयार किया। 

इस दौरान हरित समुद्री परिवहन, अंतर्देशीय जलमार्ग, समुद्री सुरक्षा और संरक्षा, क्रूज और यात्री अर्थव्यवस्था तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित सत्रों का आयोजन किया गया।

हरित समुद्री दिवस: शुद्ध शून्य उत्सर्जन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता

हरित समुद्री दिवस सत्र में, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक स्थायी और मजबूत समुद्री भविष्य के निर्माण पर भारत के दृढ़ संकल्प के बारे में प्रकाश डाला। श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "हरित समुद्री दिवस एक ऐसा दिन है जो वैश्विक पोत परिवहन के लिए एक स्वच्छ और अधिक टिकाऊ भविष्य को आकार देने के हमारे साझा संकल्प का प्रतीक है।"

मंत्री महोदय ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, देश का 95% से ज़्यादा व्यापार समुद्र के ज़रिए होता है। 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन की प्रतिबद्धता के साथ भारत का 2030 तक प्रति टन माल कार्बन उत्सर्जन में 30% और 2047 तक 70% की कमी लाने का लक्ष्य है, जिससे यह क्षेत्र जलवायु सुधार के अभियान का प्रमुख संचालक बन जाएगा।

श्री सोनोवाल ने इस बात पर जोर दिया कि ‘सागरमाला’ कार्यक्रम, ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’, ‘हरित सागर दिशानिर्देश’ और ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ जैसी प्रमुख पहलों में भारत के समुद्री विकास में स्थिरता, नवोन्मेष और जलवायु के प्रति जिम्मेदारी को ध्यान में रखा गया है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से, भारत ने वीओसी, पारादीप और दीनदयाल बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन केंद्र के रूप में निर्दिष्ट किया है, जिससे स्वच्छ ईंधन अर्थव्यवस्था की नींव पड़ी है। देश भर में, 12 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक हरित हाइड्रोजन-आधारित ई-ईंधन क्षमता की घोषणा की गई है और बंदरगाह उत्पादन, बंकरिंग और निर्यात के केंद्र के रूप में उभर रहे हैं, जिससे औद्योगिक विकास और हरित रोज़गार को बढ़ावा मिल रहा है।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "अमृत काल 2047 की ओर देखते हुए, हमारा लक्ष्य न केवल समुद्री क्षमता का विस्तार करना है, बल्कि इसे और अधिक हरित, स्मार्ट और मजबूत बनाना भी है।" उन्होंने आगे कहा, "प्रमुख वैश्विक व्यापार मार्गों के साथ अपनी अनूठी भौगोलिक स्थिति के साथ, भारत हरित पोत परिवहन कॉरिडोर का केंद्र बनने के लिए तैयार है, जो स्वच्छ ऊर्जा व्यापार के माध्यम से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को जोड़ेगा।"

भारत का पहला राष्ट्रीय तटीय-बिजली मानक, जहाजों को गोदी में खड़े रहने के दौरान स्वच्छ बिजली प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा, जिससे बंदरगाहों के किनारे उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (जेएनपीए) जैसे बंदरगाहों पर बैटरी चालित ट्रकों और इलेक्ट्रिक लॉजिस्टिक्स प्रणालियों के इस्तेमाल से शून्य-उत्सर्जन के प्रयास किये जा रहे हैं।

श्री सोनोवाल ने कहा, "समुद्री परिवर्तन अकेले नहीं किया जा सकता। इसके लिए सरकारों, उद्योग, वित्तपोषकों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गजों के बीच साझेदारी ज़रूरी है।" उन्होंने आगे कहा, "हम सब मिलकर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो समुद्र हमें जोड़ते हैं, वे हमें हमारे उद्देश्य में भी एकजुट करें और एक ऐसा भविष्य बनाये जहाँ समुद्री व्यापार समृद्धि और स्थिरता दोनों को बढ़ावा दे।"

सत्र के दौरान पांच प्रमुख रिपोर्टें जारी की गईं, जिनमें हरित हाइड्रोजन, ई-ईंधन, शून्य-उत्सर्जन ट्रकिंग, प्रदूषण नियंत्रण और हरित बंदरगाह प्रदर्शन मानक पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। स्वीडन कंट्री सेशन में एआई-संचालित स्वचालित यंत्र, एलएनजी और हरित ईंधन तथा स्मार्ट बंदरगाह संचालन पर ध्यान केंद्रित किया गया जिससे नवोन्मेष आधारित विकास और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने वाली साझेदारियों पर ज़ोर दिया गया। 

स्वीडन ने इलेक्ट्रिक जहाजों, एआई-आधारित स्वचालन और स्मार्ट बंदरगाह प्रणालियों में सहयोग का प्रदर्शन किया, जो हरित और डिजिटल समुद्री परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। 2025 में शुरू किये गए सिंगापुर और रॉटरडैम के साथ भारत के हरित और डिजिटल पोत परिवहन कॉरिडोर, संवहनीय समुद्री व्यापार के लिए वैश्विक साझेदारी को और मज़बूत करेंगे और हरित बुनियादी ढाँचे में निवेश को गति देंगे। 

नॉर्वे और स्वीडन के कंट्री सेशंस ने जहाज मालिकों, प्रौद्योगिकी फर्मों और नवोन्मेष एजेंसियों की भागीदारी के साथ उत्तरी यूरोप के साथ भारत की बढ़ती समुद्री कूटनीति को प्रदर्शित किया। सत्र के दौरान श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "प्रमुख वैश्विक व्यापार मार्गों के साथ अपनी अनूठी भौगोलिक स्थिति के कारण, भारत स्वच्छ ऊर्जा व्यापार के माध्यम से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को जोड़ने वाले हरित पोत परिवहन कॉरिडोर का केंद्र बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

इस अवसर का लाभ उठाने के लिए, भारत ने सिंगापुर और नीदरलैंड के साथ हरित और डिजिटल पोत परिवहन कॉरिडोर शुरू किए हैं। ये साझेदारियां निवेश बढ़ाने में मदद करेंगी और वैश्विक व्यापार एवं संवहनीय विकास के बीच एक सेतु के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करेंगी।‘’

रक्षा जहाज निर्माण क्षेत्र में, भारतीय नौसेना के लिए लैंडिंग प्लेटफ़ॉर्म डॉक्स (एलपीडी) के निर्माण के उद्देश्य से मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और स्वान डिफेंस एंड हैवी इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह रक्षा जहाज निर्माण में पहला बड़ा सार्वजनिक-निजी (पीपीपी) सहयोग है, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की विरासत को निजी क्षेत्र की क्षमता के साथ जोड़ता है।

जैसे-जैसे भारत समुद्री सप्ताह 2025 आगे बढ़ा, कई साझेदारियों और नीतिगत घोषणाओं के साथ भारत के समुद्री परिवर्तन के लिए एक व्यापक खाका तैयार किया जा रहा है जो टिकाऊ, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी हो। मंत्री महोदय ने कहा, "भारत का समुद्री पुनर्जागरण स्थिरता, नवोन्मेष और सहयोग पर आधारित है।" 

उन्होंने आगे कहा, "आज घोषित पहल यह सुनिश्चित करने की पुष्टि करती है कि भारत का समुद्री विकास, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण, दोनों के लिए लाभकारी हो।" भारत समुद्री सप्ताह 2025 के दूसरे दिन एक स्थायी, तकनीक-संचालित समुद्री अर्थव्यवस्था के निर्माण में भारत के बढ़ते नेतृत्व पर प्रकाश डाला गया।

"बंदरगाह परिवर्तन के साधन" विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र में बंदरगाहों को औद्योगिक विकास, नवोन्मेष और क्षेत्रीय संपर्क के उत्प्रेरक के रूप में रेखांकित किया गया। चर्चाओं में डिजिटल तकनीकों को एकीकृत करने, जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढाँचे के विकास और बंदरगाह-आधारित औद्योगिक गलियारों को बढ़ावा देने के लिए बहु-मॉडल संपर्कों को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

"अंतर्देशीय व्यापार की जड़ों को पुनर्जीवित करना" विषय पर, विशेषज्ञों ने रसद लागत कम करने और हरित परिवहन को बढ़ावा देने में अंतर्देशीय जलमार्गों की भूमिका पर ज़ोर दिया। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने बुनियादी ढाँचे के आधुनिकीकरण और माल के प्रभावी परिवहन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, राष्ट्रीय जलमार्गों पर परिचालन का विस्तार करने की योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।

"समुद्र के संरक्षक" सत्र में समुद्री सुरक्षा और संरक्षा के संवहनीय महासागरीय शासन पर खास ध्यान दिया गया । अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन और राष्ट्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने साइबर खतरों और स्वायत्त पोत विनियमन सहित उभरते जोखिमों पर चर्चा की साथ ही समन्वित सुरक्षा प्रथाओं के लिए एचएसएससी प्रबंधन मानक जारी किये।

"क्रूज़ और यात्री अर्थव्यवस्था" पर आयोजित सत्र में तटीय और नदी क्रूज़ पर्यटन की संभावनाओं पर चर्चा की गई और सुव्यवस्थित नियमों, बेहतर मूलभूत सुविधाएँ वाले बंदरगाह-शहर और तीव्र परियोजना अनुमोदन के लिए एकल-खिड़की प्रणाली की माँग की गई। 

कॉर्डेलिया क्रूज़ ने 2031 तक 10 जहाजों तक विस्तार करने की योजना की घोषणा की जिसमें कोचीन और विशाखापट्टनम को नए घरेलू बंदरगाहों के रूप में शामिल किया जाएगा। इस बीच, "वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना" में बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में डिजिटल एकीकरण पर जोर दिया गया और स्थिरता तथा मजबूती के लिए स्मार्ट और हरित व्यापार गलियारों पर बल दिया गया। 

चर्चाओं के दौरान, डिजिटलीकरण, कार्बन उत्सर्जन, कौशल विकास और नियमों के सरलीकरण जैसे विषय भारत के समुद्री परिवर्तन के लिए प्रमुख रहे। राज्य सत्रों में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने बंदरगाहों, मत्स्य पालन, रसद और जहाज निर्माण में क्षेत्रीय समुद्री अवसरों को प्रदर्शित किया और भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में राज्यों की भूमिका को रेखांकित किया। 

दूसरे दिन सत्र के समापन पर, भारत समुद्री सप्ताह 2025 ने प्रौद्योगिकी, नवोन्मेष और संवहनीयता द्वारा संचालित समुद्री अर्थव्यवस्था के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता की पुष्टि की जिसमें भारत की समुद्री विरासत के साथ विश्व की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को मिलाकर एक स्वच्छ, अधिक मजबूत भविष्य का खाका तैयार किया गया। आईएमडब्ल्यू 2025 के तीसरे दिन प्रधानमंत्री ग्लोबल मैरीटाइम लीडर्स को संबोधित करेंगे।

 

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