पराली जलाने की घटनाओं को सख़्ती से रोकने की नीति पर ज़ोर देते हुए डिप्टी कमिश्नर श्री राहुल चाबा ने सभी क्लस्टर अधिकारियों, नोडल अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कारगर ढंग से काम करें, नहीं तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। वे ज़िला प्रशासनिक परिसर के मीटिंग हॉल में अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर श्री अमित बैंबी, सभी एस.पी., एस.डी.एम., डी.एस.पी., क्लस्टर अधिकारी और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे।
उन्होंने क्लस्टर अधिकारियों से कहा कि यदि उनके अधीन नोडल अधिकारी कार्य करने में कोताही बरतते हैं, तो उसकी जानकारी तुरंत उन्हें दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी या अधिकारी काम में लापरवाही करेंगे, उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।
उन्होंने बताया कि इस बार पराली जलाने की घटनाओं पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय और प्रदूषण रोकने के लिए कार्यरत केंद्रीय एजेंसियों की सीधी निगरानी रखी जा रही है। ये सारी गतिविधियां सैटेलाइट के माध्यम से मॉनिटर की जा रही हैं।
उन्होंने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान की पराली जलाने के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए और संवेदनशील स्थानों पर संयुक्त गश्त की जाए। सभी एस.डी.एम., डी.एस.पी. और एस.एच.ओ. अपने दफ्तरों से निकलकर फील्ड में सक्रिय निगरानी रखें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई किसान खेत में पराली को आग लगाता है, तो किसान पर जुर्माना और सज़ा के साथ-साथ संबंधित अधिकारी और एस.एच.ओ. को भी इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। डिप्टी कमिश्नर श्री राहुल चाबा ने कहा कि जिले में आगामी दिनों में पराली जलाने से रोकने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि क्लस्टर अधिकारियों को पुलिस कर्मचारियों की मौजूदगी में ऐसे गांवों का दौरा करना चाहिए और लोगों को पराली न जलाने का संदेश देना चाहिए।उन्होंने कहा कि सिविल और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त गश्त से किसानों को फसलों के अवशेष जलाने से प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि जिला संगरूर के सभी गांवों के सरपंचों, किसान यूनियनों और प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ बैठकें की जाएं। इसके अलावा गुरुद्वारों, मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों से पराली न जलाने संबंधी उद्घोषणाएं भी करवाई जाएं।
यदि कोई व्यक्ति जागरूकता फैलाने में बाधा डालता है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे खेतों में पराली को आग लगाने की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि पराली के उचित प्रबंधन के लिए जिले में मशीनरी की कोई कमी नहीं है और किसानों को इसका अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर उपस्थित एस.एस.पी. सरताज सिंह चाहल ने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को कोई रियायत नहीं दी जाएगी और उनके खिलाफ सख़्त से सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि आने वाले समय में अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति पराली को आग न लगा सके। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार संबंधित एस.एच.ओ. अपने-अपने क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं के लिए जिम्मेदार होंगे और उन्हें ऐसी घटनाओं को रोकने को प्राथमिकता देनी चाहिए।