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आईसीजी ने चेन्नई तट पर “नैटपोलरेक्स” अभ्यास के 10वें संस्करण और “एनओएसडीसीपी” की 27वीं बैठक का आयोजन किया

100 से अधिक राष्ट्रीय प्रतिनिधि और 32 देशों से आए 40 से अधिक विदेशी पर्यवेक्षक भी कार्यक्रम में शामिल हुए

Military, Indian Coast Guard, ICG, National Level Pollution Response Exercise, NATPOLREXX, National Oil Spill Disaster Contingency Plan, NOSDCP
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तमिलनाडु (चेन्नई) , 06 Oct 2025

Last updated on: Oct 07, 2025, 12:52 IST

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने 05-06 अक्टूबर, 2025 को तमिलनाडु के चेन्नई तट पर 27वीं राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिक योजना (एनओएसडीसीपी) और तैयारी बैठक के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के प्रदूषण प्रतिक्रिया अभ्यास (नैटपोलरेक्स-अभ्यास) के 10वें संस्करण का सफलतापूर्वक आयोजन किया। 

इस कार्यक्रम में 32 देशों के 40 विदेशी पर्यवेक्षक और 105 से अधिक राष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने न केवल अभ्यास में सक्रिय भागीदारी की बल्कि 27वीं एनओएसडीसीपी बैठक के दौरान हुई चर्चाओं में भी सार्थक योगदान दिया। भारत के समुद्री पर्यावरण संरक्षण ढांचे के स्तंभ माने जाने वाले इस द्विवार्षिक प्रमुख अभ्यास का उद्देश्य राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिक योजना (एनओएसडीसीपी) के अनुरूप समुद्री तेल रिसाव से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राष्ट्रीय तैयारियों और अंतर-एजेंसी समन्वय को सुदृढ़ करना है।

नैटपोलरेक्स-अभ्यास का एक प्रमुख आकर्षण मरीना बीच पर आयोजित पहला तटीय सफाई अभ्यास था, जिसे एक कृत्रिम प्रदूषण नियंत्रण कार्रवाई के हिस्से के रूप में ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पुलिस और तमिलनाडु प्रशासन की अन्य एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से संपन्न किया गया। 

इस अभ्यास के दौरान भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने प्रदूषण नियंत्रण पोत (पीसीवी), अपतटीय गश्ती जहाज (ओपीवी), तीव्र गश्ती नौका (एफपीवी) जैसी विविध समुद्री परिसंपत्तियों के साथ-साथ हवाई निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण कार्रवाई अभियानों के लिए चेतक हेलीकॉप्टर तथा डोर्नियर विमान भी तैनात किए। 

यह समन्वित प्रयास न केवल बहु-एजेंसी सहयोग की उत्कृष्ट मिसाल प्रस्तुत करता है, बल्कि तटीय पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति सभी हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त करता है। नैटपोलरेक्स-अभ्यास के तकनीकी सत्रों में कई समसामयिक एवं प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चाएं हुईं और प्रस्तुतियां दी गईं। 

इनमें नर्डल स्पिल्स और उनके पर्यावरणीय प्रभाव, खतरनाक और हानिकारक पदार्थों (एचएनएस) पर केस स्टडी, स्पिल के बाद निगरानी एवं पर्यावरणीय प्रभाव आकलन तथा एमवी एमएससी ईएलएसए-3 घटना के बाद तटरेखा सफाई पर व्यावहारिक अनुभव जैसे विषय प्रमुख रहे। 

इन सत्रों ने पर्यावरण वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और परिचालन विशेषज्ञों के लिए एक प्रभावी ज्ञान-साझाकरण मंच प्रदान किया, जहां पर उन्होंने तेल रिसाव की कुशल प्रतिक्रिया तथा कार्रवाई के बाद पुनर्प्राप्ति रणनीतियों पर अपने अनुभवों एवं दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान किया।

इस वृहद् स्तर के अभ्यास की देखरेख भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के महानिदेशक और एनओएसडीसीपी के अध्यक्ष डीजी परमेश शिवमणि ने की। उन्होंने भाग लेने वाले सभी हितधारकों के बीच परिचालन तत्परता, प्रतिक्रिया समन्वय और अंतर-एजेंसी सहयोग की विस्तृत समीक्षा की। 

इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रालयों, तटीय राज्य सरकारों, प्रमुख बंदरगाहों, तेल प्रबंधन एजेंसियों और विभिन्न समुद्री संगठनों की सक्रिय एवं समन्वित भागीदारी रही, जिसने भारत की समुद्री आपदा प्रबंधन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को उजागर किया।

इस अवसर पर भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के बहु-स्तरीय प्रदूषण प्रतिक्रिया तंत्र की उत्कृष्ट दक्षता व तत्परता को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया गया और साथ ही बंदरगाहों, तटीय प्राधिकरणों तथा राज्य एजेंसियों के साथ संयुक्त संचालन एवं समन्वय के महत्व को भी रेखांकित किया गया। 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” के दृष्टिकोण के अनुरूप, इस अभ्यास ने मेक इन इंडिया पहल के तहत समुद्री प्रौद्योगिकी और स्वदेशी विनिर्माण में भारत की तेजी से बढ़ती आत्मनिर्भरता को उजागर किया। प्रमुख बंदरगाहों और अन्य हितधारकों द्वारा घरेलू रूप से विकसित परिसंपत्तियों का उपयोग, भारत के समुद्री पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक एकीकृत तथा आत्मनिर्भर राष्ट्रीय दृष्टिकोण का प्रतीक है।

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) को मार्च 1986 से भारत के समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है और तब से यह तेल रिसाव से निपटने के लिए केंद्रीय समन्वय प्राधिकरण के रूप में प्रभावी भूमिका निभा रही है। आईसीजी द्वारा तैयार की गई और 1993 में अनुमोदित राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिक योजना (एनओएसडीसीपी) देश में तेल रिसाव से निपटने की तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र के लिए आधारभूत ढांचा बनी हुई है। 

इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और समन्वय के लिए आईसीजी ने मुंबई, चेन्नई, पोर्ट ब्लेयर और वाडिनार में चार प्रदूषण प्रतिक्रिया केंद्र स्थापित किए हैं। भारत की 75% से अधिक ऊर्जा आवश्यकताएं समुद्री मार्ग से आयातित तेल पर निर्भर हैं, इसलिए एक सशक्त, समन्वित और त्वरित तेल रिसाव प्रतिक्रिया प्रणाली बनाए रखना राष्ट्रीय रणनीतिक महत्व रखता है। 

नैटपोलरेक्स-अभ्यास ने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के प्रति भारत की अटूट वचनबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया है। इसने प्रदूषण नियंत्रण कार्रवाई की तैयारियों के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को नई गति प्रदान की है, जिससे भारत की समुद्री पर्यावरण सुरक्षा क्षमता और भी सशक्त हुई है।

 

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