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संसदीय समितियां न सिर्फ बजट आवंटन, बल्कि परिणामों का भी करती हैं मूल्यांकन: ओम बिरला

Om Birla, BJP, Bharatiya Janata Party, Lok Sabha Speaker
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5 Dariya News

भुवनेश्वर , 30 Aug 2025

Last updated on: Sep 01, 2025, 13:50 IST

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राज्य एवम् केंद्र शासित प्रदेशों के विधानमंडलों की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समितियों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिरला ने समावेशी विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में संसदीय समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। 

बिरला ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि संसदीय समितियां न केवल बजट आवंटन की निगरानी करती हैं, बल्कि उनके परिणामों का मूल्यांकन भी करती हैं। बैंकिंग और अन्य क्षेत्रों में आरक्षण और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन सहित कई ऐतिहासिक निर्णय इन समितियों की सिफारिशों से सामने आए हैं। हालांकि सरकारें इन सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं, ज्‍यादातर सुझावों को आमतौर पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाता है।

उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभाओं में समितियों को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वे प्रभावी ढंग से काम कर सकें, सर्वोत्तम प्रथाओं को अपना सकें और नई तकनीकों को एकीकृत कर सकें। इसका उद्देश्य दक्षता बढ़ाना और लोगों के लिए अधिकतम कल्याण सुनिश्चित करना है।बिरला ने समितियों की मुख्य जिम्मेदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका प्राथमिक उद्देश्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक और विधायी अधिकारों की रक्षा करना, उनकी चुनौतियों का समाधान करना और उनका कल्याण है। 

इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए एक विजन 2025 रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है।उन्होंने आगे कहा कि समितियां नियमित रूप से हितधारकों के साथ बातचीत करती हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामाजिक कल्याण के लिए आवंटित धन का उचित उपयोग हो, क्षेत्रीय दौरे करती हैं। वे मौजूदा योजनाओं में संशोधन का सुझाव भी देती हैं या नई पहल की सिफारिश करती हैं। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से, सरकारों ने इनमें से अधिकांश सिफारिशों को स्वीकार किया है।

बिरला ने कहा कि सरकार के अलावा, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग जैसी संस्थाएं भी मुद्दों की निगरानी और इन समुदायों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।लोकसभा अध्यक्ष ने विभिन्न संसदीय मुद्दों पर मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि संसदीय समितियों के माध्यम से अच्छे विचारों और प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। समितियों के लिए सभी राजनीतिक दलों से नाम मांगे गए हैं, जिनका गठन जल्द ही किया जाएगा।

बिरला ने संसद और राज्य विधानसभाओं में सार्थक और गरिमापूर्ण चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया ताकि जनहित के मुद्दों पर बहस हो सके और समाज के गरीब और हाशिए पर पड़े वर्गों का कल्याण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि देश की जनता भी यही अपेक्षा रखती है।उन्होंने लोकतंत्र में स्वस्थ बहस और रचनात्मक आलोचना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असहमति लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन इसे हमेशा गरिमापूर्ण तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए, चाहे वह नीतियों की आलोचना हो या सरकारी कामकाज की। 

चर्चाओं और बहसों को और बेहतर बनाने के लिए, 1947 से अब तक की सभी संसदीय बहसों का डिजिटलीकरण और उन्हें मेटाडेटा के साथ 'डिजिटल संसद' प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने सहित कई कदम उठाए गए हैं। सदस्यों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक 'लाइव लाइब्रेरी' भी 24 घंटे उपलब्ध कराई गई है।

 

Tags: Om Birla , BJP , Bharatiya Janata Party , Lok Sabha Speaker

 

 

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