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नॉर्वे के महामहिम क्राउन प्रिंस ने ओस्लो में सर्बानंद सोनोवाल के साथ नॉर-शिपिंग में 'भारत मंडप' का उद्घाटन किया

“भारत गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत केंद्र के लिए सांस्कृतिक, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग में नॉर्वे का सहयोग का इच्छुक है”: सर्बानंद सोनोवाल

Sarbananda Sonowal, BJP, Bharatiya Janata Party, Union Minister of Ports Shipping and Waterways, Ministry of Ports Shipping and Waterways
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ओस्लो , 03 Jun 2025

Last updated on: Jun 04, 2025, 13:00 IST

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) श्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज ओस्लो में नॉर्वे के महामहिम क्राउन प्रिंस हाकोन के साथ नॉर-शिपिंग में भारत मंडप का उद्घाटन किया। यह एक प्रमुख वैश्विक समुद्री कार्यक्रम है।  

इस प्रमुख वैश्विक समुद्री कार्यक्रम में भारत की पहली  भागीदारी को चिह्नित करते हुए, मंडप को देश की समुद्री शक्ति को प्रदर्शित करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कंपनियों के साथ गठबंधन और सहयोग को प्रोत्साहन देने के लिए एक मंच के रूप में काम करने के लिए तैयार किया गया है, जिससे इस क्षेत्र में भारत की क्षमताओं में वृद्धि होगी।

भारत मंडप में स्थित स्टॉल का अवलोकन करने के दौरान महामहिम क्राउन प्रिंस के साथ केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल भी उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री श्री सोनोवाल ने क्राउन प्रिंस को भारत मंडप का भ्रमण कराया, उसके बाद उन्हें मंडप में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) का मॉडल दिखाया। 

इसे देखकर नॉर्वे के क्राउन प्रिंस ने बहुत प्रसन्नता व्यक्त की। क्राउन प्रिंस ने भारत की समुद्री विरासत के बारे में जानकारी प्राप्त की और कहा, 'भारत का चार हज़ार वर्ष पुराना समुद्री इतिहास नॉर्वेजियन वाइकिंग समुद्री परंपरा से भी पुराना है।'   

गुजरात के लोथल में विकसित किए जा रहे राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का उद्देश्य सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आज तक की भारत की समुद्री विरासत को संरक्षित करना और प्रदर्शित करना है। राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर भारत की समुद्री विरासत को समर्पित है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री श्री सोनोवाल ने कहा,  “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में, भारत एक महत्वाकांक्षी समुद्री यात्रा पर निकल रहा है - जो एक साथ हमारी विरासत में निहित है और भविष्य के लिए तैयार है। 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का दर्शन  " विकास भी, विरासत भी" - विकास के साथ-साथ विरासत - हमारे सभी प्रयासों का मार्गदर्शन करता है। यह हमें याद दिलाता है कि जैसे हम स्मार्ट बंदरगाहों, आधुनिक जहाजों और डिजिटल बुनियादी ढांचे का निर्माण करते हैं, हमें अपने समुद्रों, अपने जहाज निर्माताओं और अपने नाविकों के प्राचीन ज्ञान को भी संरक्षित करना और उसे मान्यता देनी चाहिए। 

भारत का एक गौरवशाली समुद्री अतीत है जो 5,000 वर्ष से अधिक पुराना है - सिंधु घाटी के गोदी से लेकर दक्षिणी तट के जीवंत मसाला व्यापार तक फैला है। इस दर्शन के अनुरूप, गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर में हम एक विश्व स्तरीय संस्थान विकसित कर रहे हैं।”

भारत मंडप की अपनी यात्रा के दौरान, क्राउन प्रिंस ने भारत के हाल के आर्थिक प्रदर्शन में गहरी दिलचस्पी दिखाई और इस वर्ष देश की 8 प्रतिशत से अधिक की मजबूत वार्षिक वृद्धि के लिए प्रशंसा की। क्राउन प्रिंस ने इस वर्ष के अंत में एक उच्च-स्तरीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत की अपनी आगामी यात्रा की पुष्टि की। 

केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने सद्भावना के संकेत के रूप में, क्राउन प्रिंस को हड़प्पा सभ्यता से प्रेरित एक स्मारक पट्टिका भेंट की। केंद्रीय मंत्री महोदय ने क्राउन प्रिंस को आगामी एनएमएचसी का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया और परियोजना के सफल कार्यान्वयन में नॉर्वे के सहयोग की मांग की।

नॉर-शिपिंग इवेंट में भारत मंडप में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई), गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, मंडोवी ड्राई डॉक्स और एलएंडटी शिपबिल्डिंग जैसी प्रमुख भारतीय समुद्री कंपनियाँ शामिल हैं। 

उनके साथ समुद्री क्षेत्र में प्रमुख एमएसएमई कंपनियां भी हैं, जिनमें चौगुले एंड कंपनी, योमन मरीन सर्विसेज, शॉफ्ट शिपयार्ड, मरीन इलेक्ट्रिकल्स, एसईडीएस, स्वान डिफेंस, ब्यूयेंसी कंसल्टेंट्स आदि शामिल हैं, जो भारत के समुद्री उद्योग की चौड़ाई और गहराई को प्रदर्शित करते हैं।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने आगे कहा,  “हम नॉर्वे को न केवल आधुनिक युग के समुद्री देश के रूप में देखते हैं, बल्कि इस यात्रा में एक स्वाभाविक और भरोसेमंद भागीदार के रूप में भी देखते हैं। आपकी समुद्री विरासत, आपकी अग्रणी भावना - वाइकिंग लॉन्गशिप से लेकर आर्कटिक अभियानों तक - वास्तव में प्रेरणादायक है। 

भारत एनएमएचसी के लिए नॉर्वे के साथ एक व्यापक साझेदारी का प्रस्ताव करता है, जिसमें तीन तरह के - सांस्कृतिक सहयोग, समुद्री कलाकृतियों, अभिलेखीय सामग्री और प्रदर्शनियों के आदान-प्रदान के माध्यम से सहयोग शामिल हैं, जो वैश्विक नौवहन और भारत-नॉर्डिक संपर्क; तकनीकी सहयोग, संग्रहालय डिजाइन, डिजिटल स्टोरीटेलिंग, स्थिरता और विरासत संरक्षण में नॉर्वे की विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए; और समुद्री पुरातत्व, जहाज निर्माण परंपराओं और संरक्षण विज्ञान में अनुसंधान को संयुक्त रूप से बढ़ावा देने के लिए नॉर्वेजियन संग्रहालयों और विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक और संस्थागत सहयोग की कहानी बताते हैं। 

यह केवल एक परियोजना नहीं है - यह हमारी सभ्यताओं, हमारे नवाचारों और भविष्य के लिए हमारे दृष्टिकोण के बीच एक जीवंत सेतु है। मेरा मानना ​​है कि आपकी साझेदारी के साथ, भारत और नॉर्वे एक साथ एक नया समुद्री क्षितिज तैयार कर सकते हैं - जो टिकाऊ, समावेशी और विरासत से प्रेरित हो।”

 क्राउन प्रिंस के भारत मंडप के अवलोकन के दौरान, केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी दोनों देशों के बीच विशेष द्विपक्षीय संबंधों पर प्रकाश डाला। प्रमुख समुद्री राष्ट्रों के रूप में भारत और नॉर्वे एक मजबूत और बढ़ती हुई भागेदारी साझा करते हैं। 

नॉर्वे के जहाज मालिकों के भारत में कार्यालय हैं और उनके जहाज के चालक दल में भारतीय नाविकों की संख्या 10 प्रतिशत है। कोचीन शिपयार्ड जैसे भारतीय शिपयार्ड ने कई बड़े नॉर्वेजियन जहाजों का निर्माण किया है, जो भारत की जहाज निर्माण शक्ति को प्रदर्शित करता है। 

यह सहयोग समुद्री स्थानिक नियोजन, प्रदूषण अनुसंधान, सुनामी पूर्व चेतावनी प्रणाली और गहरे समुद्र में खनन में संयुक्त पहल के साथ समुद्री अर्थव्यवस्था तक फैला हुआ है। वर्ष 2019 में स्थापित समुद्री अर्थव्यवस्था पर संयुक्त कार्य बल समुद्री क्षेत्र में सतत विकास और नवाचार को आगे बढ़ा रहा है।

सर्बानंद सोनोवाल ने  नॉर्वे के स्टावर्न में ' मिन्नेहेलन मेमोरियल '  पर श्रद्धांजलि अर्पित की

केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल स्टावर्न में 'मिन्नेहेलन मेमोरियल' की यात्रा करने वाले पहले भारतीय मंत्री हैं, जहाँ उन्होंने शहीद नाविकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री सोनोवाल ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले 86 भारतीय नाविकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

यात्रा के बाद बोलते हुए, श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा,  " मिन्नेहेलन स्मारक पर जाना और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान साहस और बलिदान के साथ सेवा करने वाले बहादुर 94 भारतीय नाविकों को श्रद्धांजलि देना सम्मान की बात है। समर्पण और प्रतिबद्धता की उनकी विरासत हमें समुद्री संबंधों को मजबूत करने और उनकी सुगमता की भावना को बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है।"

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, भारतीय नाविकों ने नॉर्वेजियन व्यापारी जहाजों पर सेवा करने वाले तीसरे सबसे बड़े विदेशी राष्ट्रीय समूह का गठन किया था। अधिकांश नाविक पंजाब और बंगाल से थे, साथ ही गोवा से उल्लेखनीय संख्या में ईसाई नाविक भी शामिल थे। 

इस दौरान कम से कम 86 भारतीय नाविकों ने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाई। उनके बलिदान के सम्मान में, नॉर्वे सरकार ने उनके नाम तांबे की पट्टियों पर अंकित किए, जिन्हें अब मिनेहेलन स्मारक में स्थापित किया गया है।  

नाविकों का स्मारक हॉल प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मारे गए नाविकों की स्मृति में नॉर्वे का आधिकारिक स्मारक है। स्मारक के तहखाने में, मृतक नाविकों के 8000 नाम तांबे की प्लेटों में अंकित किए गए हैं।

 

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