हरियाणा सयुंक्त विद्यालय संघ के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मान ने कहा कि वे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हरियाणा के निजी स्कूलों को 134-ए के तहत दी गई राहत का स्वागत करते हैं। जिसमें कोर्ट ने यह नियम सख्ती से लागू न करने को प्रदेश सरकार को कहा गया है। मान आज जीटी रोड स्थित स्काईलार्क में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। श्री मान ने कहा कि प्रदेश का कोई भी प्राइवेट स्कूल गरीब बच्चों के पढ़ाने के खिलाफ नहीं है। लेकिन वे गरीब बच्चों की पढ़ाई का बोझ दूसरे बच्चों पर नहीं डाल सकते। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को शिक्षा का अधिकार 1 अप्रैल 2010 को लागू किया। जिसमें 25 प्रतिशत गरीब बच्चों की पढ़ाई, वर्दी, किताबे आदि का खर्च केंद्र सरकार ने देना था। यह आरटीआई का कानून राजस्थान दिल्ली, चंडीगढ़ सहित दूसरे प्रदेशों में लागू है। लेकिन हरियाणा सरकार ने इसके विपरीत 134-ए को लागू कर दिया। जिसमें पहले 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को फ्री पढ़ाना था और निजी स्कूलों के विरोध के बाद सरकार ने इसे 10 प्रतिशत कर दिया। श्री मान ने कहा कि आइटीई से बच्चों को भारी फायदा था। लेकिन सरकार ने 134-ए लागू करके गरीब बच्चों के लाभ को सीमित कर दिया। उन्होंने कहा कि जब दूसरे प्रदेशों में आइटीई के तहत 25 प्रतिशत बच्चों को फ्री पढ़ाने का कानून लागू है। तो यहां पर प्रदेश सरकार उसे क्यों लागू नहीं कर रही है। प्रदेश के सभी स्कूल संचालक इस कानून के तहत गरीब बच्चों को पढ़ाने को तैयार हैं। लेकिन सरकार ने आइटीई के स्थान पर अपने फायदे के लिए 134-ए लागू कर दिया। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने भी आरटीई कानून सभी प्रदेशों में लागू करने को कहा हुआ है। लेकिन प्रदेश सराकर 134-ए लागू करके निजी स्कूलों के सामने समस्या पैदा कर दी। क्योंकि यह कानून किसी भी लिहाज से न तो बच्चों के हित में है और न ही निजी स्कूल संचालकों के हित में है। उन्होंने कहा कि बिना परोपर वर्क के सरकार ने यह पालिसी बना दी। जिससे गरीब बच्चों को फायदे के स्थान पर नुकसान हो रहा है। इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. धर्मदेव विद्यार्थी, जिला प्रधान जयपाल सैनी, महासचिव राजेंद्र प्रसाद सैनी, उपाध्यक्ष अशोक मलिक आदि भी मौजूद रहे।