मुख्य सचिव, अटल डुल्लू ने आगामी कार्यान्वयन योजना और आगामी वर्ष के लिए तैयार की गई प्रगति की समीक्षा हेतु ग्रामीण विकास विभाग की एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में जल शक्ति विभाग के एसीएस के अलावा आयुक्त सचिव सूचना एवं जीएडी, सचिव आरडीडी, महानिदेशक ग्रामीण स्वच्छता, महानिदेशक संहिता एवं अन्य संबंधित अधिकारी भी षामिल हुए।
अटल डुल्लू ने इस अवसर पर विभाग पर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत प्रत्येक पंचायत में किए गए कार्यों का संपूर्ण विश्लेषण करने के लिए दबाव डाला ताकि इस मिशन के तहत निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार कमियों का पता लगाया जा सके।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कमियां पाए जाने पर इस मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इन्हें जल्द से जल्द दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मूल रूप से गांवों को साफ और स्वच्छ दिखना चाहिए क्योंकि मिशन जमीन पर वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए हर कचरे का प्रबंधन करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करता है।
उन्होंने एसबीएम (जी) के तहत निर्मित परिसंपत्तियों की नियमित निगरानी के लिए पोर्टल को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन सभी संपत्तियों की परिकल्पना हमारे गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए की गई थी और इनमें से प्रत्येक सामुदायिक संपत्ति का उन निर्धारित उद्देश्यों के लिए अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए जिनके लिए इन्हें बनाया गया था।
मुख्य सचिव ने विभाग को इन परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव के लिए एक उचित तंत्र तैयार करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने इन गांवों और पंचायतों में स्वतंत्र निकायों के माध्यम से इन संपत्तियों के वास्तविक उपयोग को उचित रूप से प्रमाणित करने के लिए कहा।
जल शक्ति विभाग के एसीएस शालीन काबरा ने भी यहां इस मिशन के सुचारू कार्यान्वयन के लिए आरडीडी को अपने सुझावों से अवगत कराया। उन्होंने विभाग को पूरे देश में इस मिशन को वित्त पोषित करने वाले केंद्र सरकार के विभाग द्वारा की गई टिप्पणियों का विश्लेषण करने की सलाह दी।
काबरा ने अन्य विभागों विशेषकर जल जीवन मिशन द्वारा अपनाए गए कुछ समानांतर मॉडलों का अध्ययन करने की आवश्यकता को रेखांकित किया क्योंकि इसके तहत बड़ी संख्या में सार्वजनिक संपत्तियां बनाई गई थीं। उन्होंने यहां इन स्वच्छता संपत्तियों के ओएंडएम के लिए विभाग द्वारा वसूले गए और बाद में खर्च किए गए शुल्क का उचित हिसाब रखने का भी सुझाव दिया।
सचिव, आरडीडी, ऐजाज़ असद ने बैठक को एसबीएम (जी) के तहत विभाग द्वारा अब तक दर्ज की गई संचयी उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने वार्षिक कार्यान्वयन योजना (एआईपी) 2025-26 के तहत प्रत्याशित परिणाम भी प्रस्तुत किए, जिसके लिए केंद्र सरकार के समक्ष 364.50 करोड़ रुपये (10 प्रतिषत यूटी शेयर को छोड़कर) की परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
उन्होंने बताया कि विभाग सभी ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस, तरल और प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए संपत्ति बनाकर स्वच्छता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि हमारे गांवों में उपलब्ध इस कचरे से स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए यूटी भर में 16 गोबरदन इकाइयां कार्यरत हैं।
इस बीच, ग्रामीण स्वच्छता विभाग की महानिदेशक अनु मल्होत्रा ने बैठक में बताया कि विभाग की एआईपी 2025-26 के तहत लगभग 1243 गांवों को ओडीएफ (प्लस) मॉडल श्रेणी घोषित करने की योजना है। उन्होंने विस्तार से बताया कि विभाग ने जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों में 30,000 से अधिक व्यक्तिगत घरेलू षौचालय, लगभग 1,10,000 पुरानी इकाइयों की रेट्रोफिटिंग, 2744 नए सामुदायिक स्वच्छता परिसर, 23 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयां, 60 मल कीचड़ उपचार इकाइयां और 16 नए गोबरदन संयंत्र बनाने की परिकल्पना की है।
जहां तक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का सवाल है, यह बताया गया कि 44,730 व्यक्तिगत खाद गड्ढे, 2662 सामुदायिक खाद गड्ढे और 1002 कचरा संग्रहण इकाइयाँ बनाई जाएंगी। तरल अपशिष्ट प्रबंधन के संबंध में, बैठक में बताया गया कि यूटी के लिए भारत सरकार द्वारा अनुमोदित होने के बाद एआईपी 2025-26 के हिस्से के रूप में किचन गार्डन और अन्य इकाइयों के साथ 3770 सामुदायिक सोख गड्ढे और 1,66,000 व्यक्तिगत सोख गड्ढे स्थापित किए जाएंगे।