कुरुक्षेत्र में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर लोक संस्कृति ने पर्यटकों में जोश और ऊर्जा का संचार किया। विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला और संगीत से महोत्सव को और भी खास बना दिया। बीन बांसुरी, कच्ची घोड़ी के नृत्य, नगाड़े और ढोल की थाप पर लोग थिरकते हुए नजर आए।
यह महोत्सव न केवल लोक कला को संजीव रखने का एक बेहतरीन मंच है, बल्कि शिल्पकला और संस्कृति के क्षेत्र में हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रहा है। शिल्पकारों और लोक कलाकारों ने इस आयोजन को देशभर में आयोजित किए जाने की अपील की, ताकि उनकी कला और संस्कृति को और अधिक पहचान मिल सके।