Sunday, 16 June 2024

 

 

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चितकारा यूनिवर्सिटी ने डॉ. अजय चौधरी को मानद डॉक्टोरेट की उपाधि से सम्मानित किया

Chitkara University, Banur, Rajpura, Dr. Ashok K Chitkara,Chitkara Business School, Dr. Madhu Chitkara
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चंडीगढ़ , 03 May 2024

चितकारा यूनिवर्सिटी ने तकनीकी नवाचार, शैक्षणिक संस्थान निर्माण, और परोपकारी कार्यो  में उल्लेखनीय योगदान के लिए  एचसीएल के सह-संस्थापक डॉ. अजय चौधरी को मानद डॉक्टरेट (डी लिट) की उपाधि से सम्मानित किया। दूरदर्शी सोच में अग्रणी डॉ. चौधरी ने नवाचार के लिए अपने निरंतर प्रयासों  और परोपकार के प्रति प्रतिबद्धता के साथ देश भारत के तकनीकी परिदृश्य पर अमिट छाप, छोड़ी है। 

उनके दूरदर्शी नेतृत्व और परिवर्तनकारी पहल ने न केवल एचसीएल को अभूतपूर्व प्रगति तक पहुंचाया है बल्कि भारत में प्रौद्योगिकी और शिक्षा के  व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र पर भी इसका गहरा प्रभाव डाला है। इस मौके पर  चितकारा यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. अशोक के चितकारा ने कहा, "डॉ. अजय चौधरी की उल्लेखनीय यात्रा और उनका योगदान नवाचार और परोपकार को बढ़ावा देने की की उस भावना को प्रतिनिधित्व करते हैं  जिसे हम चितकारा यूनिवर्सिटी  में गहराई से संजोते हैं।  

उनके दूरदर्शी नेतृत्व और परिवर्तनकारी पहलों ने न केवल एचसीएल को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक पहुंचाया है बल्कि इसने भारत में प्रौद्योगिकी और शिक्षा के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र पर भी इसका गहरा प्रभाव डाला है। हमें डॉ. चौधरी को   डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि से  सम्मानित करते हुए बेहद गर्व महसूस हो रहा है। 

इसके जरिए हम उनकी विरासत और भारत के उज्जवल भविष्य को आकार देने की अटूट प्रतिबद्धता को मान्यता देते है।  डॉ. अजय चौधरी की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी चितकारा यूनिवर्सिटी उनकी विरासत और तकनीकी नवाचार और परोपकार में उनके  योगदान का सम्मान करने में गर्व महसूस करती है।

डॉ. अजय चौधरी की यात्रा 1976 में शुरू हुई जब उन्होंने पांच दूरदर्शियों के एक समूह के साथ एचसीएल की सह-स्थापना की । माइक्रोप्रोसेसर की शक्ति का दोहन करने के सपने से प्रेरित की सोच ने  दुनिया में क्रांति ला दी।  उनके नेतृत्व में, एचसीएल ने विश्व स्तर पर अपना विस्तार किया और उसने आसियान, चीन और हांगकांग में  50 बिलियन यूएस डॉलर का सफल व्यवसाय स्थापित किया। 

1995 में, डॉ. चौधरी ने एचसीएल इंफोसिस्टम्स का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और इसे हार्डवेयर उत्पादों, सिस्टम्स इंटीग्रेशन और मोबाइल टेलीफोनी में अग्रणी बना दिया। उनके रणनीतिक नेतृत्व ने एचसीएल इंफोसिस्टम्स को 15 वर्षों में 12,000 करोड़ (यूएस $1.6 बिलियन) का संगठन को बना दिया जिसने प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है। 

कॉरपोरेट दायरे से परे, डॉ. अजय चौधरी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय के लिए गठित  एक टास्क फोर्स की  2009 में अध्यक्षता करने और 1999 से सरकारी समितियों में रहते हुए भारत के  इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग, को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत के नेशनल क्वांटम मिशन के मिशन गवर्निंग बोर्ड के चेयरमैन और नीति आयोग में प्रतिष्ठित फेलो के रूप में साथ ही उनका उनका प्रभाव कई प्रमुख पदों तक फैला हुआ है

उनके योगदान को देखते हुए डॉ. चौधरी को 2011 में  प्रतिष्ठित पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें कई अन्य पुरस्कार प्राप्त हुए हैं  जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल्स काउंसिल ऑफ इंडिया  द्वारा दिया गया लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2024 और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन ऑफ द ईयर 2010 शामिल हैं।

एक संस्थान निर्माता और परोपकारी, डॉ. अजय चौधरी ने आईआईटी हैदराबाद और आईआईआईटी-नया रायपुर को नया आकार दिया है। इसके अलावा उन्होंने  शिक्षा और महिलाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्वयं  चैरिटेबल ट्रस्ट जैसी पहल की है। वह सक्रिय रूप से स्टार्टअप का समर्थन करते हैं और 2021 में उन्होंने ईपीआईसी फाउंडेशन की सह-स्थापना की। इसका लक्ष्य नवाचार को बढ़ावा देना और भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स में उत्पाद राष्ट्र बनाना है।

Chitkara University Honours Dr. Ajai Chowdhry with Honorary Doctorate for Technological Innovation and Philanthropy

Chandigarh

Chitkara University, bestowed the title of Doctor of Literature (Honoris Causa) upon Dr. Ajai Chowdhry in recognition of his outstanding contributions to technological innovation, academic institution building, and philanthropy. Dr. Chowdhry, a visionary pioneer and co-founder of HCL, has left an indelible mark on India's technological landscape, shaping the nation's future through his relentless pursuit of innovation and commitment to philanthropy. 

His visionary leadership and transformative initiatives have not only propelled HCL to unprecedented heights of success but have also had a profound impact on the broader ecosystem of technology and education in India. Speaking on the occasion Dr. Ashok K Chitkara, Chancellor, Chitkara University, said, "Dr. Ajai Chowdhry's remarkable journey and contributions epitomise the spirit of innovation and philanthropy that we deeply cherish at Chitkara University. 

His visionary leadership and transformative initiatives have not only propelled HCL to unprecedented heights of success but have also had a profound impact on the broader ecosystem of technology and education in India. We are immensely proud to honour Dr. Chowdhry with the Honorary Degree of Doctor of Literature (Honoris Causa), recognising his enduring legacy and unwavering commitment to shaping a brighter future for India and beyond."

Dr. Ashok K Chitkara added that Dr. Ajai Chowdhry's remarkable accomplishments continue to inspire generations and Chitkara University takes pride in honouring his legacy and contributions to technological innovation and philanthropy. Dr. Ajai Chowdhry's journey began in 1976 when he co-founded HCL with a group of five visionaries, driven by a dream to harness the power of microprocessors and revolutionise the world. In 1995, Dr. Chowdhry assumed control of HCL Infosystems, transforming it into a leader in hardware products, systems integration, and mobile telephony. 

His strategic leadership propelled HCL Infosystems into a Rs. 12,000 crore (US $1.6 billion) organization over 15 years, solidifying its position in the technology sector. In recognition of his contributions, Dr. Chowdhry was also honoured with the prestigious Padma Bhushan in 2011 and has received numerous other awards, including the Lifetime Achievement Award by the Electronics Sector Skills Council of India (ESSCI) in 2024 and Electronics Man of the Year 2010. 

An institution builder and philanthropist, Dr. Ajai Chowdhry has shaped learning centers like IIT Hyderabad and IIIT-Naya Raipur and established philanthropic initiatives such as the Swayam charitable trust, focusing on education and women's empowerment.

About Chitkara University

Chitkara University, situated near Chandigarh, has emerged as the most vibrant and high-ranking University in North India. It is ranked among the top 5% of higher education institutions in India. The University is awarded NAAC A+ accreditation and ranked by NIRF (National Institute Ranking Framework). 

The University offers courses in Engineering and Technology, Business Management, Planning, Architecture, Art & Design, Mass Communication, Sales and Marketing, Hospitality Management, Pharmacy, Health Sciences, Nursing, Law, Psychology, and Education. Students studying at Chitkara University get the best start-up support, world-class research excellence, and many internationally renowned opportunities.

ਚਿਤਕਾਰਾ ਯੁਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਅਜੈ ਚੌਧਰੀ ਨੂੰ ਆਨਰੇਰੀ ਡਾਕਟਰੇਟ(ਡੀਲਿੱਟ) ਦੀ ਡਿਗਰੀ ਪ੍ਰਦਾਨ

ਤਕਨੀਕੀ ਨਵੀਨਤਾ, ਅਕਾਦਮਿਕ ਸੰਸਥਾਨਾਂ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਅਤੇ ਪਰਉਪਕਾਰੀ ਕਾਰਜਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਏ ਬੇਮਿਸਾਲ ਯੋਗਦਾਨ ਬਦਲੇ ਦਿੱਤੀ ਆਨਰੇਰੀ ਡਿਗਰੀ

ਚੰਡੀਗਡ਼੍ਹ

ਚਿਤਕਾਰਾ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨੇ ਤਕਨੀਕੀ ਨਵੀਨਤਾ, ਅਕਾਦਮਿਕ ਸੰਸਥਾਨ ਦੀ ਉਸਾਰੀ ਅਤੇ ਪਰਉਪਕਾਰੀ ਕਾਰਜਾਂ ਵਿੱਚ ਵਿਸ਼ਾਲ ਯੋਗਦਾਨ ਲਈ ਐਚਸੀਐਲ ਦੇ ਸਹਿ-ਸੰਸਥਾਪਕ ਡਾ ਅਜੈ ਚੌਧਰੀ ਨੂੰ ਆਨਰੇਰੀ ਡਾਕਟਰੇਟ(ਡੀਲਿੱਟ) ਦੀ ਉਪਾਧੀ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਦੂਰਅੰਦੇਸ਼ੀ ਸੋਚ ਦੇ ਮਾਲਕ ਡਾ ਅਜੈ ਚੌਧਰੀ ਨਵਾਚਾਰ ਲਈ ਆਪਣੇ ਨਿਰੰਤਰ ਯਤਨ ਅਤੇ ਪਰਉਪਕਾਰ ਪ੍ਰਤੀ ਵਚਨਬੱਧਤਾ ਨਾਲ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਤਕਨੀਕੀ ਨਵੀਨਤਾ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਅਮਿੱਟ ਛਾਪ ਛੱਡੀ ਹੈ। 

ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਦੂਰਦਰਸ਼ੀ ਅਗਵਾਈ ਅਤੇ ਪਰਿਵਰਤਨਸ਼ੀਲ ਪਹਿਲਕਦਮੀਆਂ ਨੇ ਨਾ ਸਿਰਫ਼ ਐਚਸੀਐਲ ਨੂੰ ਬੇਮਿਸਾਲ ਵੱਲ ਪ੍ਰਗਤੀ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਇਆ ਹੈ, ਸਗੋਂ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਅਤੇ ਸਿੱਖਿਆ ਦੀ ਵਿਆਪਕ ਵਾਤਾਵਰਣ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ’ਤੇ ਵੀ ਡੂੰਘਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਿਆ ਹੈ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਚਿਤਕਾਰਾ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਚਾਂਸਲਰ ਡਾ.ਅਸ਼ੋਕ ਕੇ ਚਿਤਕਾਰਾ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ, ‘‘ਡਾ. ਅਜੈ ਚੌਧਰੀ ਦੀ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਯਾਤਰਾ ਅਤੇ ਯੋਗਦਾਨ ਨਵੀਨਤਾ ਅਤੇ ਪਰਉਪਕਾਰੀ ਨੂੰ ਹੁਲਾਰਾ ਦੇਣ ਦੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਭਾਵਨਾ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦੇ ਹਨ, ਜਿਸ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਚਿਤਕਾਰਾ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਿੱਚ ਦਿਲੋਂ ਪਿਆਰ ਕਰਦੇ ਹਾਂ। 

ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਡਾ ਅਜੈ ਚੌਧਰੀ ਦੀ ਦੂਰਦਰਸ਼ੀ ਅਗਵਾਈ ਅਤੇ ਪਰਿਵਰਤਨਸ਼ੀਲ ਪਹਿਲਕਦਮੀਆਂ ਨੇ ਨਾ ਸਿਰਫ ਐਚਸੀਐਲ ਨੂੰ ਉਚਾਈਆਂ ਤੇ ਪਹੁੰਚਾਇਆ ਹੈ ਸਗੋਂ ਇਸ ਨੇ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਅਤੇ ਸਿੱਖਿਆ ਦੇ ਈਕੋਸਿਸਟਮ ਉੱਤੇ ਵੀ ਵਿਆਪਕ ’ਤੇ ਵੀ ਡੂੰਘਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਾਇਆ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਾਨੂੰ ਡਾ. ਚੌਧਰੀ ਨੂੰ ਸਾਹਿਤ ਦੇ ਡਾਕਟਰ ਦੀ ਆਨਰੇਰੀ ਡਿਗਰੀ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਨ ਉੱਤੇ ਮਾਣ ਮਹਿਸੂਸ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸ ਦੇ ਰਾਹੀਂ ਅਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸਥਾਈ ਵਿਰਾਸਤ ਅਤੇ ਭਾਰਤ ਦੇ ਉੱਜਲ ਭਵਿੱਖ ਨੂੰ ਆਕਾਰ ਦੇਣ ਅਟੁੱਟ ਪ੍ਰਤੀਬੱਧਤਾ ਨੂੰ ਵੀ ਮਾਨਤਾ ਦੇ ਰਹੇ ਹਾਂ। 

ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਡਾ ਅਜੈ ਚੌਧਰੀ ਦੀਆਂ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਪ੍ਰਾਪਤੀਆਂ ਪੀਡ਼੍ਹੀਆਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰਦੀਆਂ ਰਹਿਣਗੀਆਂ। ਚਿਤਕਾਰਾ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਤਕਨੀਕੀ ਨਵੀਨਤਾ ਅਤੇ ਪਰਉਪਕਾਰ ਲਈ ਵਿਰਾਸਤੀ ਯੋਗਦਾਨ ਨੂੰ ਸਨਮਾਨ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਮਾਣ ਮਹਿਸੂਸ ਕਰਦੀ ਹੈ। ਡਾ: ਅਜੈ ਚੌਧਰੀ ਦੀ ਯਾਤਰਾ 1976 ਵਿੱਚ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਈ ਜਦੋਂ ਉਸ ਨੇ ਪੰਜ ਦੂਰਦਰਸ਼ੀ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਦੇ ਇੱਕ ਸਮੂਹ ਦੇ ਨਾਲ ਐਚਸੀਐਲ ਦੀ ਸਹਿ-ਸਥਾਪਨਾ ਕੀਤੀ। 

ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਾਈਕ੍ਰੋਪ੍ਰੋਸੈਸਰਾਂ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਨੂੰ ਵਰਤਣ ਦੇ ਸੁਪਨੇ ਦੁਆਰਾ ਸੰਚਾਲਿਤ ਸੋਚ ਨੇ ਦੁਨੀਆਂ ਵਿੱਚ ਇਨਕਲਾਬ ਲਿਆ ਦਿੱਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਹੇਠ ਐਚਸੀਐਲ ਨੇ ਵਿਸ਼ਵ ਪੱਧਰ ਤੇ ਆਪਣਾ ਵਿਸਤਾਰ ਕੀਤਾ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਅਸਿਆਨ, ਚੀਨ ਅਤੇ ਹਾਂਗਕਾਂਗ ਵਿੱਚ 50 ਬਿਲੀਅਨ ਯੂਐੱਸ ਡਾਲਰ ਦਾ ਸਫਲ ਕਾਰੋਬਾਰ ਕੀਤਾ। 1995 ਵਿੱਚ, ਡਾ. ਚੌਧਰੀ ਨੇ ਐਚਸੀਐਲ ਇਨਫੋਸਿਸਟਮ ਦਾ ਕੰਟਰੋਲ ਆਪਣੇ ਹੱਥ ਵਿੱਚ ਲੈ ਲਿਆ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਹਾਰਡਵੇਅਰ ਉਤਪਾਦਾਂ, ਸਿਸਟਮ ਏਕੀਕਰਣ, ਅਤੇ ਮੋਬਾਈਲ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਲੀਡਰ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਦਿੱਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਰਣਨੀਤਕ ਅਗਵਾਈ ਨੇ ਐਚਸੀਐਲ ਇਨਫੋਸਿਸਟਮਜ਼ ਨੂੰ ਪੰਦਰਾਂ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ  12,000 ਕਰੋਡ਼ ਦਾ ਸੰਗਠਨ ਬਣਾ ਦਿੱਤਾ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਥਿਤੀ ਮਜ਼ਬੂਤ ਬਣ ਗਈ।

ਕਾਰਪੋਰੇਟ ਖੇਤਰ ਤੋਂ ਦੂਰ ਡਾ ਅਜੈ ਚੌਧਰੀ ਨੇ ਇਲੈਕਟਰਾਨਿਕ ਅਤੇ ਇਨਫਾਰਮੇਸ਼ਨ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਵਿਭਾਗ ਲਈ ਗਠਿਤ ਇੱਕ ਟਾਸਕ ਫੋਰਸ ਦੀ 2009 ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਧਾਨਗੀ ਕਰਨ ਅਤੇ 1999 ਤੋਂ ਸਰਕਾਰੀ ਕਮੇਟੀਆਂ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦੇ ਹੋਏ ਭਾਰਤ ਦੇ ਇਲੈਕਟਰਾਨਿਕ ਉਦਯੋਗ ਨੂੰ ਉਚਾਈਆਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਣ ਲਈ ਮਹੱਤਵਪੂਰਣ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਇਆ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਯੋਗਦਾਨ ਨੂੰ ਵੇਖਦੇ ਹੋਏ 2011 ਵਿੱਚ ਡਾ. ਅਜੈ ਚੌਧਰੀ ਨੂੰ ਵੱਕਾਰੀ ਪਦਮ ਭੂਸ਼ਣ ਪੁਰਸਕਾਰ ਨਾਲ ਸਨਮਾਨਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਿਨ੍ਹਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕਈ ਹੋਰ ਪੁਰਸਕਾਰ ਵੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਏ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਇਲੈਕਟਰੋਨਿਕਸ ਸੈਕਟਰ ਸਕਿੱਲ ਕੌਂਸਲ ਦੁਆਰਾ ਲਾਈਫਟਾਈਮ ਅਚੀਵਮੈਂਟ ਅਵਾਰਡ 2024 ਅਤੇ ਇਲੈਕਟਰੋਨਿਕਸ ਮੈਨ ਆਫ਼ ਦਿ ਈਅਰ 2010 ਸ਼ਾਮਿਲ ਹਨ।

ਇੱਕ ਸੰਸਥਾਨ ਨਿਰਮਾਤਾ ਅਤੇ ਪਰਉਪਕਾਰੀ, ਡਾ: ਅਜੈ ਚੌਧਰੀ ਨੇ ਆਈ.ਆਈ.ਟੀ. ਹੈਦਰਾਬਾਦ ਅਤੇ ਆਈਆਈਟੀ ਨਯਾ ਰਾਏਪੁਰ ਨੂੰ ਨਵਾਂ ਆਕਾਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਿਨ੍ਹਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਿੱਖਿਆ ਅਤੇ ਔਰਤਾਂ ਦੇ ਸਸ਼ਕਤੀਕਰਨ ’ਤੇ ਧਿਆਨ ਕੇਂਦਰਤ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਚੈਰੀਟੇਬਲ ਟਰੱਸਟ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਵੀ ਪਹਿਲ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਉਹ ਸਟਾਰਟਅੱਪ ਦਾ ਪੂਰਨ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਸਮਰਥਨ ਕਰਦੇ ਹਨ 2021 ਵਿੱਚ ਉਨ੍ਹਾਂ ਈਪੀਆਈਸੀ ਫ਼ਾਊਂਡੇਸ਼ਨ ਦੀ ਸਹਿ-ਸਥਾਪਨਾ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਨਵਾਚਾਰ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣਾ ਅਤੇ ਇਲੈਕਟਰਾਨਿਕਸ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਉਤਪਾਦ ਰਾਸ਼ਟਰ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ।

 

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