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बिल्ला नंबर 36: अपने तीन बच्चों को आर्मी अफसर बनाने के लिए बन गई कुली

संध्या हर दिन मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करती हैं। उनके ऊपर एक बूढ़ी सास और तीन बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी है

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दिल्ली , 20 Apr 2022

Last updated on: Apr 20, 2022, 00:00 IST

हर मां-बाप अपने बच्चों को दुनिया की सारी खुशियां देना चाहते हैं। फिर चाहे उन्हें इसके लिए किसी भी हद तक क्यों ना जाना पड़ जाए। आज हम आपको एक ऐसी ही मां के कहानी से वाकिफ कराएंगे जो अपने बच्चों को अफसर बनाने के लिए कुली तक बन गई। जी हां वो मां है मध्यप्रदेश की रहने वाली संध्या मारावी। पति की मौत हो चुकी है लेकिन फिर भी हार नहीं मानी, बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दे रही हैं। अब सिर्फ एक ही सपना है, बच्चों को सेना में अफसर बनाना।

संध्या हर दिन मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करती हैं। उनके ऊपर एक बूढ़ी सास और तीन बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी है, इसलिए वह यह जिम्मेदारी उठाने के लिए, यात्रियों का बोझ उठती हैं। उन्होंने अपने नाम का रेल्वे कुली का लाइसेंस भी बनवाया है।  रेल्वे प्लेटफॉर्म जब वो लोगों के बैग उठाकर चल रही होती हैं तो सभी लोग उन्हें हैरानी से देखते हैं। उनकी तरीफ करते हैं, पैसों से मदद भी करना चाहते हैं लेकिन संध्या केवल अपनी मेहनत की कमाई ही लेती हैं।

संध्या का  कहना है- अभी मेरा जमीर जिंदा है, भले ही जिन्दगी ने मुझसे मेरा हमसफर छीन लिया लेकिन अब बच्चों को पढ़ाना मेरी जिम्मेदारी है। मैं उनको आर्मी में अफसर बनाना चाहती हूँ। इसके लिए मैं किसी के आगे हाथ नहीं फैलाऊंगी। कुली नंबर 36 हूं और इज़्ज़त का खाती हूं।

संध्या जनवरी 2017 से कटनी रेवले स्टेशन पर काम कर रही हैं। 30 वर्ष की उम्र में पहले संध्या अन्य महिलाओं की तरह ही घर और बच्चों को संभाला करती थी। इसी बीच उनके पति बीमार हो गए। उनकी बीमारी काफी समय तक चली और फिर 22 अक्टूबर 2016 को उनकी मौत हो गई। पति की मौत के बाद संध्या को अपने परिवार के लिए रोजी-रोटी की चिंता होने लगी इसलिए उन्हें जल्द से जल्द नौकरी करनी पड़ी। नौकरी तो मिली नहीं इसलिए उन्हें कुली ही बनना पड़ा। 

संध्या बताती हैं कि इस रेलवे स्टेशन पर 45 पुरुष कुली हैं और उनके बीच में अकेली संध्या महिला कुली के तौर पर काम करते हैं पिछले वर्ष ही उन्हें बिल्ला नंबर 36 मिला। सन्ध्या जबलपुर में रहती हैं और नौकरी के लिए कुंडम से प्रतिदिन 90 किमी ट्रैवल (45 किमी आना-जाना) करके कटनी रेलवे स्टेशन पहुंचती हैं।

संध्या उन सभी महिलाओं के लिए एक उदाहरण है जो जिंदगी छोटी छोटी समस्याओं के सामने घुटने तक देती हैं। आपका जमीर जिंदा है, मजबूत इरादे हैं तो आपको कभी किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

 

Tags: sandhya , maravi , coolie , madhya pradesh , railway station

 

 

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