आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रधान और संसद मैंबर भगवंत मान ने केंद्र सरकार की ओर से पेश बजट को सिरे से रद्द करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने इस बार फिर न केवल पंजाब और दिल्ली के साथ सौतेला व्यवहार किया है, बल्कि देश के हर वर्ग को निराश किया है। दिल्ली विधान सभा चुनाव के दौरान मटियाला हलके से पार्टी उम्मीदवार गुलाब सिंह, हरी नगर से राजकुमारी ढिल्लों, तिलक नगर से जरनैल सिंह, राजौरी गार्डन से धनवंती चन्देला, विकासपुरी से महिंद्र यादव और जनकपुरी से उम्मीदवार राजेश ऋषि के हक में धुंआंधार प्रचार करते हुए भगवंत मान ने व्यंग्यमय अंदाज में मोदी सरकार पर निशाना साधते कहा, ‘‘आज केंद्रीय वित्त मंत्री से पहाड़ जितना बजट भाषण पढ़वाया गया, परंतु साल 2020 के लिए कुछ नहीं निकला। कहते हैं 2022 में किसानों की आमदन दोगुनी कर देंगे। 2024 में सभी जिलों में एक-एक जन औषधि केंद्र खोल देंगे। 2024 तक 100 एयरपोर्ट बना देंगे। 2021 तक 100 नए डिप्लोमा संस्थान खोल देंगे। 2025 तक यह कर देंगे। 2026 तक वह कर देंगे। ओर तो ओर 2050 तक पशूओं की सभी बीमारियां खत्म कर देंगे। मैं मोदी साहिब को पूछना चाहता हुं कि बजट साल 2020 -21 के लिए एक साल का पेश किया है या 2050 तक 30 सालों के लिए पेश किया है।भगवंत मान ने कहा कि जुमलेबाज बजट ने दिल्ली और पंजाब समेत पूरे देश को निराश किया है। साथ ही मोदी सरकार का देश और लोक विरोधी चेहरा भी नंगा किया है।
मान मुताबिक यह बजट अम्बानी-अंडानी जैसे चंद कॉर्पोरेट घराणों के हितों को ध्यान में रख कर तैयार किय गया है। देश और देश के लोग पूरी तरह हाशीए पर फैंक दिए गए हैं।भगवंत मान ने कहा कि सरकारी और जनतक सैक्टर के अदारों और क्षेत्रों को कौडिय़ों के दाम प्राईवेट हाथों में बेचा जा रहा है। 150 प्राईवेट रेलें और एयरपोर्ट इसी कड़ी का हिस्सा हैं।भगवंत मान ने कहा कि बजट में किसान, नौजवान, देहाती गरीब और दलितों समेत नौकरी पेशा और व्यापारियों-कारोबारियों को बुरी तरह नजर अन्दाज किया गया है।किसानों के लिए स्वामीनाथन सिफारिशें, नौजवानों के लिए हर साल 2 करोड़ नौकरियां और काले धन पर आधारित पुरानी जुमलेबाजी को मोदी सरकार इस बजट में दुहराने की हिम्मत भी नहीं कर सकी। रिकार्ड 7.36 प्रतिशत पर पहुंची महंगाई को नकेल डालने के लिए कुछ नहीं किया गया।भगवंत मान ने कहा कि देश की आर्थिकता बुरी तरह से निचले स्तर पर जा रही है, 10 प्रतिशत जीडीपी के दावे करने वाली मोदी सरकार की इसके अपने आर्थिक सर्वेक्षण ने हवा निकाल दिया, जो 45 प्रतिशत तक लुढक़ गई। सरकार की वित्तीय नीतियों के साथ साथ बैंकों से लोगों के उठे हुए विश्वास को इस बजट में यह कह कर ओर ज़्यादा उठा दिया है कि यदि कोई बैंक डूबता है तो सरकार केवल 5 लाख रुपए की गारंटी लेगी।