आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रधान और संसद मैंबर भगवंत मान ने दिल्ली विधान सभा चुनावों में अकाली दल (बादल) की ओर से यू-टर्न लेते हुए भाजपा को समर्थन करने सम्बन्धित ताजा ऐलान पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि चार दिन पहले विवादित सी.ए.ए के मुद्दे पर दिल्ली में भाजपा के साथ मिल कर चुनाव न लडऩे की बात करने वाले बादलों का इस तरह भाजपा खास कर कर मोदी-अमित शाह के पैरों में गिरना केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल की वजीरी बचाने की आखिरी कोशिश है, परंतु बादल परिवार की इस निजी लालसा ने शिरोमणी अकाली दल को मिट्टी में मिला दिया है।दिल्ली विधान सभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार गरीस सोनी के हक में रोड शो के दौरान भगवंत मान ने सुखबीर सिंह बादल को पूछा कि क्या भाजपा ने सी.ए.ए सम्बन्धित उनकी (अकाली दल) यह मांग स्वीकार कर ली है, जिस कारण अकाली दल ने पिछले हफ्ते दिल्ली विधान सभा चुनाव भाजपा के साथ मिल कर लडऩे से इन्कार कर दिया था?भगवंत मान ने कहा कि हरसिमरत कौर बादल की डगमगा रही कुर्सी को बचाने के लिए बादल परिवार अपनी नैतिकता के साथ-साथ पार्टी के सिद्धांतों को भी छीके टांग रहे हैं। भगवंत मान ने पूछा कि क्या सुखबीर सिंह बादल या प्रकाश सिंह बादल पंजाब और अपनी पार्टी (अकाली दल) के लोगों को बता सकेंगे कि हरसिमरत की वजीरी के लिए ओर कितनी बार स्टैंड बदलेंगे।भगवंत मान ने कहा कि पहला पंजाब के हित गिरवी रख कर बादल परिवार ने अपनी बहु रानी को मंत्री की कुर्सी पर बिठाया, अब जब बादलों के पास से पंजाब की सत्ता ही चली गई तो इस परिवार ने अपनी पार्टी का ही सौदा कर लिया।भगवंत मान ने कहा कि बादल-भाजपा अपवित्र गठजोड वैंटिलेटर पर जा चुका है, बस अब रस्मी ऐलान होना बाकी है, जो दिल्ली चुनाव के बाद हरसिमरत कौर बादल की छुट्टी के साथ हो जाएगा।इस लिए यदि बादल परिवार में जरा सी भी जमीर जीवित बची है तो वह भाजपा की अपेक्षा नाता तोड़ कर दिल्ली चुनाव में नफरत की राजनीति कर रही भाजपा का करारी हार में बिल्कुल भी हिस्सा न दें।