महंगी बिजली के विरोध में शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने चण्डीगढ़ में जबरदस्त रोष प्रदर्शन किया। पार्टी प्रधान और संसद मैंबर भगवंत मान के नेतृत्व में जैसे ही ‘आप’ के विधायक, सीनियर नेताओं और हजारों की तादाद में पार्टी वालंटियर मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की सरकारी रिहायश घेरने चले तो भारी संख्या में तैनात पुलिस मुलाजिमों ने एम.एल.ए होस्टल के गेट पर बैरीकाट लगा कर रोक लिया।‘आप’ लीडरशिप और वलंटियरों की ओर से बैरीकाट फांद कर आगे बढऩे की कोशिश के दौरान पुलिस ने जल तोपों के साथ गंदे पानी की ताबड़तोड़ बुछारें शुरू कर दी। करीब एक घंटा चली इन तेज बुछारों के कारण दो दर्जन से अधिक नेता और वालंटियर जख्मी हो गए। जिनमें विधायक अमन अमन अरोड़ा, पार्टी नेता जसवीर सिंह कुदनी, संतोख सिंह सालाना, सतवीर सिंह सीरा बनभौरा प्रमुख हैं। कुदनी और सालाना की स्थिति गंभीर होने के कारण दोनों को पीजीआई दाखिल करवाया गया। बाद में मान और चीमा ने पीजीआई पहुंच कर घायलों का हाल-चाल पूछा।इस उपरांत चण्डीगढ़ पुलिस ने ‘आप’ नेताओं और 250 के करीब वलंटियरों को बसों में भर कर सैक्टर 17 और सैक्टर 27 के पुलिस थानों में बंद कर दिया। जिनमें भगवंत मान, प्रो. बलजिन्दर कौर, मनजीत सिंह बिलासपुर, कुलवंत सिंह पंडोरी, मास्टर बलदेव सिंह जैतो, बीबी सरबजीत कौर माणूंके, अमन अरोड़ा, मीत हेयर, कुलतार सिंह संधवां, जै किशन रोड़ी (सभी विधायक), कुलदीप सिंह धालीवाल, गुरदित्त सिंह सेखों, जमील उर रहमान, हरचंद सिंह बरसट, दलबीर सिंह ढिल्लों, नरिन्दर सिंह शेरगिल, नवदीप सिंह संघा, गगनदीप सिंह चड्ढा आदि प्रमुख थे।इस दौरान विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा और विधायक रुपिन्दर कौर रूबी के नेतृत्व में दर्जनों वालंटियर पुलिस को भ्रमा कर मुख्य मंत्री की कोठी के समक्ष ‘आप’ का मैमोरंडम चिपकाने के लिए निकले और चण्डीगढ़ पुलिस को मुख्य मंत्री के घर बाहर बैरीकाट लगा कर उनको हिरासत में ले लिया। ‘आप’ नेता इस बात पर अड़े थे कि या तो उनको मुख्य मंत्री की कोठी तक जाने दिया जाए या फिर मुख्य मंत्री खुद उनके पास से मैमोरंडम लेने पहुंचें। ऐसा न होने की सूरत में ‘आप’ नेताओं ने मुख्य मंत्री की कोठी के गेट पर मांग पत्र चिपकाने की कोशिश की।इस मौके भगवंत मान ने आरोप लगाए कि पंजाब कांग्रेस ने लिखित रूप में वायदा किया था कि पंजाब राज बिजली निगम (पावर काम) की तरफ से निजी बिजली खरीद समझौते (पीपीएज) मूल्यांकित किये जाएंगे जिससे बिजली सस्ती करके खप्तकारों को राहत दी जाए। पावरकाम की कारगुजारी पारदर्शी करके पिछले 5 सालों का आडिट करवाने समेत करवाया जाएगा। कुल मिला कर बिजली क्षेत्र को लेकर 10 वायदे किये गए थे, परंतु सरकार किसी एक भी वायदे पर खरा नहीं उत्तरी। उल्टा अब तक मौजूदा सरकार ने बिजली दरों में दर्जन से अधिक बार वृद्धि कर चुकी है, नतीजण पंजाब में आज सभी मुल्क की अपेक्षा महंगी बिजली है।
मान ने पिछली अकाली-भाजपा सरकार पर हमला बोलते कहा कि आज सुखबीर सिंह बादल से भी पूछना बनता है कि डा. मनमोहन सिंह सरकार के दौरान ही गुजरात सरकार और पंजाब सरकार द्वारा निजी बिजली कंपनियों के साथ समझौते हुए थे, तो दोनों (गुजरात और पंजाब) के समझौतों में इतना फर्क क्यों आ गया? सवाल यह है कि तीन सालों के कार्यकाल दौरान कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार ने इस बात की जांच पड़ताल क्यों नहीं करवाई कि अकाली -भाजपा सरकार ने निजी कंपनियों के साथ समझौते तो 2007-09 दरमियान कर लिए, परंतु बिजली नीति 2010 में बनाई। यहां तक कि गुजरात सरकार की तरफ से 2009 में बनाई बिजली नीति की लोक हितैषी तजवीजों को पूरी तरह नजरअन्दाज करके पंजाब और पंजाब के लोगों की लूट का अगले 25 सालों के लिए आधार कैसे बांध दिया। गुजरात सरकार ने बिजली न खरीदने की सूरत में थर्मल कंपनियों को पैसे न देने का समझौता किया, जबकि पंजाब सरकार ने एक यूनिट न खरीदे जाने की सूरत में कम से कम 2800 करोड़ रुपए इन तीनों निजी थर्मल प्लांटों को देने की बात मान ली। जो 25 सालों में 70 हजार करोड़ रुपए फालतू बोझ बनता है। उन्होंने कहा कि यदि कैप्टन सरकार ने निजी बिजली कंपनियों के साथ समझौते रद्द न किये तो 2022 में ‘आप ’ की सरकार यह समझौते रद्द करेगी और दिल्ली की तरह लोगों को सस्ती बिजली प्रदान करेगी।कोर समिति चेयरमैन प्रिंसीपल बुद्धराम और कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि मोटी हिस्सा-पत्ती के साथ बादलों ने यह इकरारनामे सस्ती बिजली पैदा करते सरकारी थर्मल प्लांटों की कुर्बानी दे दी।विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने महंगी बिजली और निजी कंपनियों के साथ इकरारनामे के बारे में पंजाब विधान सभा के 2 दिवसीय विशेष सत्र की मांग की।‘आप’ नेता अमन अरोड़ा और मीत हेयर ने मांग की है कि यह घातक इकरारनामे तुरंत रद्द किये जाएं। बठिंडा के बंद किए थर्मल प्लांट समेत सभी सरकारी थर्मल प्लांट पूरी समर्था के साथ चलाए जाएं। बिजली का बिल 2 महीनों की जगह पर हर महीने यकीनी बनाया जाए। वायदे मुताबिक बिजली पर आडिट करवा कर पिछले 3 सालों में नाजायज वसूले व भारी वृद्धि वापस किए जाएं।विधायक सरबजीत कौर माणूंके, प्रो. बलजिन्दर कौर और रुपिन्दर कौर रूबी ने मुख्य मंत्री के मुखातिब होते कहा कि (पंजाब सरकार) लोक हित सलाह देते हैं कि केजरीवाल सरकार की बिजली नीति से सबक लं, क्योंकि पिछले 5 सालों में वहीं बिजली महंगी होने की बजाए सस्ती हुई है।विधायक जै किशन सिंह रोड़ी ने कहा कि यदि मौजूदा कांग्रेस सरकार ने पिछली बादल सरकार वाली विरोधी नीयत और नीति न त्यागी तो भविष्य में पंजाब में बिजली सस्ती नहीं बल्कि ओर महंगी होती जायेगी।विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर और मास्टर बलदेव सिंह जैतो ने कहा कि एक तरफ खुद भी बिजली पैदा करने वाला पंजाब देश भर में से सब से महंगी बिजली दे रहा है, दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल सारी बिजली बाहरी राज्यों और निजी बिजली कंपनियों से खरीद कर दिल्ली निवासियों को सब से सस्ती बिजली दे रहे हैं, इतना ही नहीं लोग हितैषी बिजली टैरिफ (दरों) कारण दिल्ली के 22 लाख परिवारों को जीरो बिल छेद आ रहा है।