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जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों के लिए आर्थिक प्रबंध के अपवाद के साथ सीओपी 25 का परिणाम संतुलित : प्रकाश जावड़ेकर

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नई दिल्ली , 20 Dec 2019

Last updated on: Dec 20, 2019, 00:00 IST

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के सर्वोच्‍च निकाय कान्‍फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी 25) का 25वां सत्र 02 से 15 दिसंबर 2018 तक मैड्रिड, स्पेन में चिली की अध्‍यक्षता में आयोजित किया गया। सम्मेलन के 13 दिसंबर को समाप्त होने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन विशेष रूप से पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 और जलवायु परिवर्तन प्रभावों से जुड़े नुकसान और घाटे तथा जलवायु आर्थिक प्रबंध से जुड़े मुद्दों पर आम सहमति बनाने के लिए इसे  15 दिसंबर 2019 तक बढ़ा दिया गया।नई दिल्ली में आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों के लिए आर्थिक प्रबंध के मुद्दे को छोड़कर, कुल मिलाकर भारत सीओपी25 के परिणाम को संतुलित परिणाम मानता है जो सभी पक्षों, विशेष रूप से विकासशील देशों की चिंताओं को दूर करता है और यूनएनएफसीसीसी  और उसके पेरिस समझौते के सफल कार्यान्वयन के लिए आधारभूत इकाई प्रदान करता है।श्री जावड़ेकर ने कहा, "भारत निष्‍पक्ष और सार्वजनिक लेकिन अलग करने वाली जिम्मेदारियों तथा संबद्ध क्षमताओं (सीबीडीआर-आरसी); यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौते के तहत अपने दायित्वों के अनुसार विकसित देशों से विकासशील देशों को जलवायु आर्थिक प्रबंध, किफायती दरों पर प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण और क्षमता निर्माण सहायता सहित कार्यान्‍वयन के उन्‍नत तरीकों की आवश्‍यकताओं के सिद्धांतों पर विचार करने सहित प्रमुख हितों की रक्षा करते हुए बातचीत में रचनात्मक रूप से संलग्न है।”श्री जावड़ेकर ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में नवीकरण के लिए लक्ष्य बढ़ाकर 175 गीगावाट से 450 गीगावाट कर दिया था। भारत सौर, बायोमास और पवन ऊर्जा पर एक साथ प्रगति कर रहा है।चिली मैड्रिड टाइम फॉर एक्शन शीर्षक से सीओपी 25 का फैसला, निरंतर जारी उन चुनौतियों पर जोर देता है, जिनका सामना विकासशील देशों को वित्तीय, प्रौद्योगिकी और क्षमता-निर्माण सहायता तक पहुंचने में करना पड़ता है और इसने विकासशील देश पार्टियों को सहायता का प्रावधान को बढ़ाने की आवश्यकता को स्‍वीकार किया है ताकि संयोजन और कमी के प्रयासों को मजबूत किया जा सके। निर्णय के दौरान विकासशील देश पार्टियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 2020 तक प्रति वर्ष संयुक्त रूप से 100 बिलियन अमरीकी डालर जुटाने के लक्ष्य के लिए विकसित देश पार्टियों द्वारा की गई प्रतिबद्धता को भी याद करता है। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक महत्वाकांक्षा के मुद्दे पर, अपनाया गया निर्णय महत्वाकांक्षा का संतुलित और एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिसमें न केवल जलवायु परिवर्तन के शमन के प्रयास शामिल हैं, बल्कि विकसित देश पार्टियों से विकासशील देश दलों को अनुकूलन समर्थन के कार्यान्वयन के साधन भी शामिल हैं।

सीओपी25 पर चर्चा किए गए कुछ प्रमुख मुद्दों को नीचे सूचीबद्ध किया गया है: -

2020 से पहले के कार्यान्वयन और महत्वाकांक्षा अंतराल: क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत विकसित देशों की प्रतिबद्धताओं और कार्यों में पूर्व 2020 अंतरालों के मामले पर, भारत, अन्य विकासशील देशों के साथ, इस पर आगे काम सुनिश्चित करने में सफल रहा। सीओपी 25 के निर्णय में पार्टियों से लिखित निवेदन लेकर ग्लासगो में सीओपी 26 राउंड टेबल के माध्यम से 2020 से पहले के अंतराल का आकलन करने की व्‍यवस्‍था है। यूएनएफसीसीसी सचिवालय विकसित देश पार्टियों द्वारा कार्यान्वयन के तरीकों और शमन कार्य में 2020 से पूर्व के अंतराल की एक संक्षिप्‍त रिपोर्ट तैयार करेगा जिनकी क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत प्रतिबद्धता है।इन राउंड टेबल्स का सारांश दीर्घकालिक वैश्विक लक्ष्य की दूसरी आवधिक समीक्षा के लिए सम्‍मेलन के अंतर्गत जानकारी के रूप में काम करेगा, जो 2020 में शुरू होगा और 2022 में समाप्त होगा। आवधिक समीक्षा पर निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि यह पार्टियों द्वारा उठाए गए कदमों के समग्र प्रभाव का आकलन करेगा ताकि सम्‍मेलन के अंतिम उद्देश्यों को ध्‍यान में रखते हुए, सम्‍मेलन के प्रासंगिक सिद्धांतों और प्रावधानों के अनुसार और सर्वोत्तम उपलब्ध जानकारी के आधार पर दीर्घकालिक वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

पेरिस समझौते के अंतर्गत अनुच्छेद 6 : पार्टियों के बीच मतभेद के कारण बाजार और गैर-बाजार तंत्र के लिए अनुच्छेद 6 के दिशा-निर्देशों पर सहमति व्‍यक्‍त नहीं की जा सकी। हालाँकि, भारत जलवायु परिवर्तन अनुकूलन की विकासशील देशों की जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्‍य से अनुकूलन कोष के लिए 2020 के बाद की अवधि से क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत स्वच्छ विकास तंत्र के परिवर्तन और बाजार तंत्र से आमदनी के हिस्से का प्रावधान करने के साथ-साथ सहकारी दृष्टिकोणों के अंतिम मसौदा निर्णय में अपने मूल स्‍थान की रक्षा करने में सफल रहा। भारत ने जोर देकर कहा कि अनुच्छेद 6.2 और अनुच्छेद 6.4 के बीच बाजार की विश्वसनीयता और समानता के मूल सिद्धांतों को संरक्षित किया जाना चाहिए। भारत की चिंताएं मसौदे की विषय वस्‍तु में परिलक्षित होती हैं जिस पर सीओपी की आगे की बैठकों में बातचीत की जाएगी। भारत ने देश में संचालित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों (एनडीसी) को समायोजित किए बिना पर्याप्त रिटर्न के साथ अनुच्छेद 6.4 के माध्यम से निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने का तर्क दिया।

उन्नत पारदर्शिता फ्रेमवर्क (निगरानी, ​​रिपोर्टिंग और सत्यापन): पारदर्शिता के अंतर्गत तकनीकी तत्वों पर चर्चा के दौरान, भारत ने विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को प्रदान किये गये कार्यों और सहायता दोनों के लिए एक मजबूत पारदर्शिता ढांचा तैयार करने का तर्क दिया। इसके अलावा, सामान्‍य प्रारूपों को विकासशील देशों के लिए लचीले तरीके से कार्य करना चाहिए, ताकि विशेषज्ञता प्राप्‍त करने के सिद्धांत को प्रतिबिंबित किया जा सकें। इस मुद्दे पर चर्चा अगले सीओपी26 में जारी रहेगी।

हानि और नुकसान के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय तंत्र (डब्ल्यूआईएम): जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जुड़े नुकसान और क्षति के लिए डब्ल्यूआईएम की समीक्षा के अंतर्गत किया गया निर्णय विकासशील देशों के लिए हरित जलवायु कोष (जीसीएफ) से  वित्त, प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण सहित उचित कार्रवाई और सहायता बढ़ाने की अत्‍यावश्‍यकता की पहचान करता है, ताकि नुकसान और क्षति से बचाया जा सके, उसे कम किया जा सके। इस निर्णय ने विकासशील देशों में प्रासंगिक दृष्टिकोणों के कार्यान्वयन के लिए तकनीकी सहायता बढ़ाने के लिए सैंटियागो नेटवर्क स्‍थापित किया।

अनुकूलन: अनुकूलन संबंधी मामलों में, भारत शमन और अनुकूलन के बीच समानता पर जोर दे रहा है। सीओपी 25 निर्णय इस बात का स्‍मरण कराता है कि वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने के प्रावधान का उद्देश्‍य अनुकूलन और शमन के बीच संतुलन बनाना होना चाहिए। इसके लिए देश के स्‍वामित्‍व वाली रणनीतियों  और विकासशील देशों की प्राथमिकताओं और जरूरतों को ध्यान में रखा जाए।

प्रौद्योगिकी विकास और हस्तांतरण: प्रौद्योगिकी से संबंधित मामलों पर, अपनाया गया निर्णय प्रौद्योगिकी कार्यकारी समिति (टीईसी) और जलवायु प्रौद्योगिकी केंद्र और नेटवर्क (सीटीसीएन) से आग्रह करता है कि वे प्रौद्योगिकी ढांचे के सभी विषयों पर मजबूत प्रयासों के साथ अपने जनादेश को लागू करना जारी रखें। जीसीएफ से यह भी अनुरोध किया गया है कि प्रौद्योगिकी विकास के विभिन्न चरणों में प्रौद्योगिकी विकास और हस्तांतरण पर सहकारी कार्रवाई को मजबूत करने के लिए सीटीसीएन  और टीईसी के साथ सहयोग करें।

भारत ने दिसंबर 2018 में यूएनएफसीसीसी को सौंपी गई अपनी दूसरी द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट (बीयूआर) पर फैसिलिटेटिव शेयरिंग ऑफ व्यूज (एफएसवी) प्रक्रिया के तहत एक प्रस्तुति दी। भारत के दूसरे बीयूआर का मुख्य आकर्षण 2005-2014 की अवधि में अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 21 प्रतिशत की कमी हासिल करना है।

भारत ने सीओपी 25 में एक 'इंडिया पैवेलियन' की मेजबानी की, जो आगंतुकों के बीच प्रमुख आकर्षण था, जिसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों आदि के प्रतिनिधि शामिल हुए। मंडप का विषय 'महात्मा की जयंती के 150 वर्ष' था और इसे महात्मा गांधी के जीवन और स्थायी जीवन के आसपास के संदेशों को चित्रित करने के लिए तैयार किया गया था।

 

Tags: Prakash Javadekar

 

 

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