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राज्यपाल वी. पी. सिंह ने महात्मा गांधी की 150 वीं जन्म जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उदघाटन किया

अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की मौलिक विशेषता - राज्यपाल वी. पी. सिंह

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5 Dariya News

चंडीगढ़ , 17 Aug 2019

Last updated on: Aug 17, 2019, 00:00 IST

पंजाब के राज्यपाल महामहिम वी. पी. सिंह ने चंडीगढ़ मे अहिंसा विश्व भारती संस्था द्वारा महात्मा गांधी की 150 वीं जन्म जयंती वर्ष के उपलक्ष्य मे आचार्य डॉ. लोकेशजी के सानिध्य में आयोजित  ‘भारतीय संस्कृति-अनेकता में एकता’ राष्ट्रीय संगोष्ठी का उदघाटन किया।पंजाब के राज्यपाल श्री वी. पी. सिंह ने कहा कि यह बेहद हर्ष का विषय है कि अहिंसा विश्व भारती संस्था देश के विभिन्न प्रान्तों में 24 सम्मेलनों का आयोजन कर रही है। इन सम्मेलनों के माध्यम से महात्मा गांधी की  शिक्षाएं जन जन तक प्रसारित होंगी। यह न केवल एक ऐतिहासिक कदम है बल्कि राष्ट्र निर्माण मे अहम भूमिका निभाएगा। इस श्रंखला में, पंजाब के ऐतिहासिक शहर चंडीगढ़ स्थित पंजाब राजभवन मे संगोष्ठी आयोजित करने के लिए अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डॉ. लोकेशजी एवं सभी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई।राज्यपाल श्री वी. पी. सिंह ने कहा कि हमारे देश में अनेक महापुरुषों भगवान महावीर, महात्मा गाँधी आदि ने अहिंसा पर बहुत बल दिया। इन युग पुरुषों ने अहिंसा के महत्व को समझा, इसकी राह पर चले और अनुभवों के आधार पर दूसरों को भी इस राह पर चलने को कहा। भगवान महावीर के इन्ही सिद्धांतों को महात्मा गांधी ने आगे बढ़ाया। महात्मा गांधी ने कहा कि सिर्फ कर्म से ही नहीं, मन और वचन से भी हिंसा करने की कोशिश न करें। उन्होने हिंसा को रोकने के लिए अनेक बार सत्याग्रह और अनशन किए। 

अहिंसा के बल पर उन्होने गुलाम भारत को अंग्रेजों से आजाद कराया।इस अवसर पर राज्यपाल श्री वी. पी.  सिंह ने अहिंसा विश्व भारती की पत्रिका ‘आह्वान’ का लोकार्पण किया एवं संस्था के संस्थापक आचार्य लोकेश जी को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया । अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डॉ. लोकेशजी ने राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की मौलिक विशेषता है । सर्वधर्म सद्भाव उसका मूलमंत्र है। उस बहुलतावादी संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी । उन्होने कहा कि मौजूदा समय में हम जिस दौर से गुजर रहे हैं उसमें उसकी सर्वाधिक आवश्यकता है ।  आचार्य लोकेश ने कहा कि महात्मा गांधी जैन धर्म से बहुत प्रभावित थे उन्होने जैन धर्म के अहिंसा के सिधान्त को बहुत आगे बढ़ाया था, उन्होने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण से वैचारिक प्रदूषण अधिक खतरनाक है। हम अपने अस्तित्व और विचारो कि तरह दूसरे का अस्तितव और विचारों का सम्मान करना सीखे। साथ ही उन्होने कहा कि हम अपने धर्म का ईमानदारी से पालन करे किन्तु दूसरे धर्मों का भी आदर करें। यही रास्ता हमें महात्मा गांधी जी ने सिखाया। इस अवसर पर पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजकुमार, गुरुद्वारा बंगला साहिब (दिल्ली) के अध्यक्ष श्री परमजीत सिंह चंढोक, ब्रह्मश्रि योग संस्थान, चंडीगढ़ के  निदेशक व योगगुरु ब्रह्मचारी डॉ. दिनेश ने अपने विचार व्यक्त किए । श्री प्रेम गुप्ता ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया, कार्यक्रम का संचालन सुश्री तारकेशवरी मिश्रा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ व समापन राष्ट्रगान द्वारा हुआ।

 

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