दमदमी टकसाल के प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह ख़ालसा ने प्रधान मंत्री नरिन्दर मोदी को श्री गुरु तेग़ बहादुर जी की अतुल शहादत को अकीदत भेंट करन के लिए शहादत दिहाड़े पर निश्चित तौर पर सरकारी छुट्टी का ऐलान करन, देश भर में विशेष शहादत समागम कराए जाने के इलावा सज़ाएं पुरी कर चूके राजनैतिक सिक्ख कैदियों को रिहा करन और देश के समूचे किसानों का कजऱ् मुआफ करन की माँग की है। इस दौरान दिल्ली के चाँदनी चौक में श्री गुरु तेग़ बहादुर जी की शहादत स्थान गुरुद्वारा शीशगंज साहब में पूरी श्रद्धा के साथ शहादत देहाड़ा मना रही संगतें को दमदमी टकसाल के प्रमुख की तरफ से श्री गुरु तेग़ बहादुर साहब का शहादत प्रसंग श्रवण कराया गया। गुरू साहब की 12 लग कर 24 मिनट पर शहादत होने और शहादत से पहले गुरू साहब की तरफ से श्री जपुजी साहब का पाठ किये जाने को मुख्य रखते शहादत दिहाड़े पर हर साल दोपहर 12 बजे जपजी साहब का पाठ करन की बीते साल से कायम कायम की गई परंपरा अनुसार संगत की तरफ से श्री जपुजी साहब का पाठ किया गया।
संत हरनाम सिंह ख़ालसा ने हुक्मनामो की कथा दौरान कहा कि गुरू तेगबहारद साहब जी की दूसरे धर्म की धार्मिक हकों को ले कर बलि दुनिया में लामिसाल है, जिस बारे सिखों के दसवें गुरू गोबिंद सिंग जी पिता ने भी कहा है कि कलयुग में इतना बड़ा शौर्यगाथा कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि किसी भी पीर, पैग़म्बर, अवतार या रहबर की तरफ से किसी दूसरे धर्म के लिए इतनी बड़ी बलि या शहादत नहीं दी गई। गुरू तेग़ बहादुर साहब ने बादशाह औरंगजेब के हर ज़ुल्म को खिले माथे सहते हिंदु धर्म की रक्षा के लिए महान शहादत दी है, जिस के लिए हर हिंदु को आज के दिन गुरू साहब की याद में पाठ और अरदास करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरू तेग़ बहादुर जी की शहादत प्रसंग को दुनिया भर में पहुँचाया जाना चाहिए।उन्होंने बे को गुरसिक्खी और विरसो के साथ जोड़ी रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने संगत को अमृतधारी होने और गुरसिक्खी में परिपक्व होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ख़ालसे ज़ुल्म के साथ टक्कर रही और रहेगी। उन्होंने गूह: करतारपुर रास्ते प्रति पंजाब के मुख मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के अडि़कापाऊ बयान को मन्दभागा बताया और उन को सिक्ख कौम की भावनायों के साथ जुड़े मामलों पर नाकारात्मक बियानबाज़ी से गुरेज़ करन की सलाह दी।