गुरुकुल कुरुक्षेत्र में चल रही दो दिवसीय शून्य बजट प्राकृतिक कृषि कार्यशाला में आए हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा कृषि वैज्ञानिकों ने माना कि सुभाष पालेकर की शून्य बजट प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की जरूरत है। उन्होंने माना कि रासायनिक और जैविक खेती ने किसानों को न केवल बरबाद किया है, बल्कि पर्यावरण को भी बहुत भारी नुकसान पहुंचाया है जिसकी भरपाई सिर्फ शून्य बजट प्राकृतिक कृषि को अपनाकर ही की जा सकती है।इस अवसर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत, पद्मश्री सुभाष पालेकर, पंजाब राज्यपाल के सचिव जे. एम. बालामुरुगन, मध्य प्रदेश की ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के. राव, जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. बीसेन, राजस्थान की कोटा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जी. एल. केशवा, जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. राठौर, एनडीआरआई करनाल से डॉ एस. के. शर्मा, वरिष्ठ बैज्ञानिक डॉ. हरिओम, डॉ. सहारण सहित बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक मौजूद रहे।इससे पूर्व, अतिथियों ने राज्यपाल के साथ गुरुकुल की अत्याधुनिक गौशाला, एनडीए विंग, जीवामृत निर्माण केन्द्र सहित विभन्न प्रकल्पों का अवलोकन किया और बाद में गुरुकुल के शून्य बजट प्राकृतिक कृषि फार्म पर खड़ी धान, गन्ना व सब्जियों की फसलों का मुआयना किया। शून्य बजट प्राकृतिक कृषि फार्म के अवलोकन के उपरान्त सुभाष पालेकर ने सभी कृषि वैज्ञानिकों को सम्बोधित किया। वैज्ञानिकों ने माना कि शून्य बजट प्राकृतिक कृषि आज की आवश्यकता है और सभी कृषि विश्वविद्यालयों को भी इस दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ दिलाने का प्रयास करना चाहिए।