पंजाब सरकार के पशु पालन, डेयरी विकास, मछली पालन और श्रम विभागों के कैबिनेट मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने राज्य में पशु पालन पेशे और अन्य सहायक धंधों को उत्साहित करने के लिए पंजाब सरकार की तरफ से वचनबद्धता अभिव्यक्त की है। वह आज स्थानीय गुरू अंगद देव वैटरनरी एंड एनिमल साईंसेज़ यूनिवर्सिटी में ‘ऐंटीमाईक्रोबायल रजिस्टैंस एंड स्टरैटेजीज़ फॉर इट्स मिटीगेशन’(ऐंटीबायटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक सामथ्र्य के कारण हो रहे नुक्सान को कम करने संबंधी नीतियाँ) विषय पर शुरू हुई 4 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वर्कशाप के उद्घाटनी समारोह को मुख्य मेहमान के तौर पर संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा राज्य में पशु पालन और अन्य सहायक धंधों के साथ किसानों को जोडऩे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिससे वह इन धंधों के साथ जुडक़र अच्छी कमाई करें और फ़सली विभिन्नता के लिए किये जा रहे उपायों में पंजाब सरकार का साथ दें।स. सिद्धू ने कहा कि पशु पालन पेशों ने समाज में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि ऐंटीबायोटिक दवाओं का और ज्यादा प्रयोग या गलत प्रयोग से जहाँ पशुओं पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है वहीं मानवीय सेहत के लिए भी यह नुकसानदायी है। उन्होंने विज्ञानिकों को इस समस्या के हल के लिए अपना अधिक से अधिक योगदान डालने के लिए कहा। इस वर्कशाप में 55 अनुसंधानकत्र्ता हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें से 18 अनुसंधानकत्र्ता 15 अलग -अलग देशों से आए हुए हैं।
डा. अमरजीत सिंह नन्दा, उप -कुलपति ने कहा कि बीमारियां पर काबू न पाए जाने की सूरत में बहुत बड़ा आर्थिक नुक्सान होता है और अंत्र -देसी इलाज ढांचा भी बुरी तरह प्रभावित होता है। उन्होंने जानकारी दी कि यह किसी अकेले देश का मसला नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए चुनौती है।डा. अरुण कुलश्रेष्ठ, महानिर्देशक विज्ञान और टैकोनॉलोजी सैंटर, नई दिल्ली ने जानकारी दी कि ऐंटीबायोटिक प्रतिरोधक समस्या बहुत ख़तरनाक ढंग के साथ बढ़ रही है और विकासशील देशों पर इसका ज़्यादा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह वर्कशाप अच्छे और कारगर उपाय ढूँढने की तरफ़ एक कदम ओैर बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंधी उनका संस्थान अनुसंधान के लिए विभिन्न देशों के अनुसंधानकत्र्ताओं को वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है।वर्कशाप के प्रशासनिक सचिव, डा. तेजिन्दर सिंह राय ने जानकारी दी कि नामवर संस्थाओं जैसे पीजीआई चंडीगढ़, दयानन्द मैडीकल कालेज लुधियाना, बिहार वेटनरी यूनिवर्सिटी और वेटनरी यूनिवर्सिटी लुधियाना के वैज्ञानिक इस वर्कशाप के दौरान ऐंटीबायोटिक प्रतिरोधक समस्याओं संबंधी लैक्चर देंगे और इसके नुक्सान को घटाने संबंधी विचार रखेंगे।यूनिवर्सिटी के निर्देशक अनुसंधान, डा. जतिन्दर पाल सिंह गिल ने भी इस मुद्दे के वर्तमान पहलूओं संबंधी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से बात की। वर्कशाप के संयोजक, डा. एके अरोड़ा ने कहा कि वैटरनरी यूनिवर्सिटी लुधियाना इस क्षेत्र में अच्छा ठोस अनुसंधान कार्य कर रही है जिसके बड़े हाँ -समर्थकी नतीजे मिल रहे हैं। इस मौके पर स. सिद्धू के निजी सचिव श्री हरकेश चंद शर्मा और अन्य भी उपस्थित थे।