राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कृषि, बागवानी व पशुपालन और अन्य संबद्ध विभागों के अधिकारियों विशेषकर क्षेत्रीय कर्मियों से शून्य लागत प्राकृतिक कृषि को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है। राज्यपाल आज शिमला के निकट मशोबरा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन, विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान में कृषि विभाग द्वारा आयोजित ‘‘प्राकृतिक कृषि खुशाल किसान योजना’’ के अन्तर्गत शून्य लागत प्राकृतिक कृषि पर आयोजित प्रशिक्षण शिविर को संबांधित कर रहे थे। यह शिविर कृषि, बागवानी एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों के लिए आयोजित किया गया था।उन्होंने कहा कि प्रदेश में शून्य लागत प्राकृतिक कृषि पर आधारित तीन प्रशिक्षण शिविरों में लोगों के उत्साह को देखकर उन्हें पूर्ण विश्वास है कि इस कृषि पद्धति को अपनाने के लिए किसान वर्ग तैयार है। अब यह दायित्व किसानों से जुड़े संबद्ध विभागों का है कि वे इसके कार्यान्वयन में तेजी लाएं और ईमानदारी व पूर्ण समर्पण से इस दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी बिना दबाव के इच्छाशक्ति से इस कार्य को करें और समझें। उन्होंने कहा कि यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि जिस व्यवसाय को हमने चुना है और जिस विभाग में कार्यरत हैं, वहां रहते हुए अपने कार्यकाल में ईमानदारी से कार्य नहीं किया तो न केवल अपने साथ धोखा किया है बल्कि विभाग के साथ भी धोखा कर रहे हैं।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि रसायनिक खादों के अत्याधिक उपयोग के बावजूद भी आज उत्पादन घट रहा है और जिन फलदार पौधों पर रसायनिक स्प्रे की जाती है वह अधिक समय तक टिक नहीं पाता है। इससे स्पष्ट है कि जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रही है और पौधों की प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सिंचाई के लिए पानी की कमी हो रही है वह भी चिंता का विषय है। तैयार उत्पाद भी स्वास्थ्य के लिए कितने लाभप्रद हैं, यह विश्वास भी कम हो गया है। इसलिए, यह जरूरी है कि हम कृषि पद्धति में गुणात्मक सुधार लाएं जिसके लिए प्राकृतिक कृषि के विकल्प को गंभीरता से लागू करने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने कृषि से संबद्ध विभागों को शून्य लागत प्राकृतिक कृषि की ओर मूढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पशुपालन के बिना प्राकृतिक कृषि अधूरी है, जिसके लिए विभाग को देसी नस्ल की गाय जिनमें मुख्यतः साहीवाल, लाल सिंधी, थारपार्कर इत्यादि शामिल हैं, को बढ़ावा देना चाहिए तथा नस्ल सुधार की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने पशुपालन विभाग के फार्मासिस्टों के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने पशुओं को दिए जाने वाले चारे की जांच पर भी बल दिया तथा कहा कि यूरिया युक्त चारे की मिलावट से भी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि खण्ड स्तर पर गऊ शालाओं के विकास पर बल दिया। इस अवसर पर, राज्यपाल ने शून्य लागत प्राकृतिक कृषि को लेकर अपने अनुभव भी सांझा किए। इससे पूर्व, शून्य लागत प्राकृतिक कृषि के परियोजना निदेशक श्री राकेश कंवर ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा कहा कि किसान यदि किसान प्राकृतिक कृषि को अपनाते हैं तो विभाग भी अपनी नीतियों में आवश्यक बदलाव लाएंगे। उन्होंने प्राकृतिक कृषि से संबंधित विस्तृत रूपरेखा की जानकारी दी। कृषि विभाग के निदेशक डॉ. देस राज शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।