जम्मू और श्रीनगर में अंतर्देशीय रसद केंद्रों की स्थापना के लिए राज्य सरकार के साथ बातचीत करने के लिए दुबई पोर्टस समूह के अध्यक्ष एवं सीईओ सुल्तान अहमद बिन सुलेम की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल आज यहां पहुंचा। सुल्तान अहमद बिन सुलेमान और उनकी टीम ने वित्त मंत्री डा हसीब द्राबू और उद्योग मंत्री चंद्रप्रकाश गंगा के साथ अलग बैठकें कीं और बाद में संबंधित मंत्रियों तथा राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर पर बातचीत की।दुबई पोर्टस समूह के प्रतिनिधिमंडल की यात्रा पिछले महीने राज्य विधानसभा में अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री द्वारा घोषित बंदरगाहों की स्थापना में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार की योजना के बारे में घोषणा के बाद है।दुबई पोर्टस तथा जम्मू व कश्मीर सरकार के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में, जम्मू और श्रीनगर में अंतर्देशीय रसद केन्द्रों की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को सुल्तान अहमद बिन सुलेम के नेतृत्व वाली डीपी टीम तथा डॉ हसीब द्राबू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की टीम के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में अंतिम रूप दिया गया था।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री चंद्र प्रकाष गंगा, प्रमुख सचिव वित्त नवीन कुमार चौधरी, प्रमुख सचिव उद्योग शैलेंद्र कुमार और संबंधित विभागों के अन्य अधिकारियों के अलावा दुबई पोर्टस के वरिष्ठ अधिकारी भी प्रतिनिधिमंडल स्तरीय बैठक में उपस्थित थे। बाद में जम्मू-कश्मीर में अंतर्देशीय रसद केंद्र स्थापित करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात सरकार के साथ भारत सरकार द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के लिए बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार द्वारा रेलवे स्टेशन सांबा के पास जम्मू क्षेत्र में लॉजिस्टिक हब स्थापित करने के लिए दुबई पोर्ट्स के साथ संयुक्त उद्यम में 100 एकड़ जमीन के साथ इक्विटी के रूप में पेश किया जाएगा और कश्मीर में ओमपोरा बडगाम के पास इसी तरह की सुविधा के लिए लगभग 100 एकड़ जमीन निर्धारित की जाएगी।बैठक में बताया गया था कि जम्मू व कश्मीर में करीब 1500 करोड़ रुपये के निवेश के साथ रसद केंद्रों में दो षुश्क बंदरगाह, गोदामों, कोल्ड स्टोरेज श्रृंखला, नियंत्रित वायुमंडलीय भंडार और आपूर्ति श्रृंखला शामिल होगी जिसमें जम्मू-कश्मीर से बागवानी और कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प और औद्योगिक उत्पाद सीधे दुनिया भर के बाजारों में बेचा जा सकेगा।
डॉ द्राबू ने कहा ‘जम्मू एवं कश्मीर अर्थव्यवस्था की प्रमुख समस्याओं में से एक वस्तुओं और उत्पादों के परिवहन की उच्च लागत है। हमें अपने फल, कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प और औद्योगिक उत्पादों को बाहरी दुनिया में ट्रकों में भेजना पड़ता है। अगर हमें जम्मू-कश्मीर में एक षुरूक बंदरगाह और ठंडी श्रृंखला मिलती है, तो वस्तुओं का परिवहन एक एकीकृत परिवहन श्रृंखला के माध्यम से किया जा सकता हैं। इससे परिवहन की लागत 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक कम हो जाएगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था में प्रमुख बदलाव आएगा।’’उन्होंने कहा कि एक सूखी बंदरगाह, जिसे अंतर्देशीय बंदरगाह या मल्टीमॉडल रसद केंद्र भी कहा जाता है, रेल या सड़क द्वारा एक बंदरगाह से जुड़ा अंतर्देशीय टर्मिनल है। यह निर्यात/ आयात माल के परिवहन में ट्रांस-शिपमेंट प्वाइंट के रूप में कार्य करता है और इसका नाम इसलिए है क्योंकि सिवाय इसके कि यह समुद्र के नजदीक नहीं है, यह सेवाओं में बंदरगाह के समान है।
दुबई पोर्टस छह महाद्वीपों के 40 देशों में 50 से अधिक संबंधित व्यवसायों द्वारा समर्थित 78 समुद्री और अंतर्देशीय टर्मिनलों का संचालन कर रहा है जो उच्च वृद्धि और परिपक्व बाजार दोनों में एक महत्वपूर्ण उपस्थिति के साथ है।कंपनी भारत में 6 समुद्री टर्मिनल और 6 माल ट्रेनों और पाकिस्तान में दो समुद्री टर्मिनलों का मालिक है। इसमें चीन, फिलीपींस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, दक्षिण कोरिया और अमरीका में समुद्री टर्मिनल भी हैं।दुबई पोर्ट्स के अध्यक्ष और उनकी टीम के साथ मंत्री डॉ द्राबू और चंद्र प्रकाष गंगा और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ, बाद में जम्मू में रसद हब स्थापित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा पहचाने गए स्थल का व्यक्तिगत रूप से जायजा लेने के लिए सांबा का दौरा किया।