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राजेश खन्ना : अपनी शर्तो पर जिया (29 दिसंबर : जन्मदिन पर विशेष)

राजेश खन्ना
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5 दरिया न्यूज

नई दिल्ली(आईएएनएस) , 29 Dec 2013

Last updated on: Dec 29, 2013, 00:00 IST

बॉलीवुड में सुपरस्टार का दर्जा सबसे पहले पाने वाले राजेश खन्ना का नाम जब भी लिया जाएगा तब एक ऐसे शख्स की छवि उभरेगी, जिसने जिंदगी को अपनी शर्तो पर जिया।कहा जाता है कि देव आनंद के बाद अगर किसी ने फिल्म के सफल होने की 'गारंटी' दी तो वह थे सबके चहेते 'काका' यानी राजेश खन्ना। 29 दिसंबर, 1942 को अमृतसर (पंजाब) में जन्मे जतिन खन्ना बाद में फिल्मी दुनिया में राजेश खन्ना के नाम से मशहूर हुए। उनका अभिनय करियर शुरुआती नाकामियों के बाद इतनी तेजी से परवान चढ़ा कि ऐसी मिसाल विरले ही मिलती है। खन्ना का लालन-पालन चुन्नीलाल और लीलावती ने किया। उनके वास्तविक माता-पिता लाला हीराचंद और चांदरानी खन्ना थे। किशोर राजेश ने धीरे-धीरे रंगमंच में दिलचस्पी लेनी शुरू की और स्कूल में बहुत से नाटकों में भाग लिया। उन्होंने 1962 में 'अंधा युग' नाटक में एक घायल, गूंगे सैनिक की भूमिका निभाई और अपने बेजोड़ अभिनय से मुख्य अतिथि को प्रभावित किया। रूमानी अंदाज और स्वाभाविक अभिनय के धनी राजेश खन्ना ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1966 में फिल्म 'आखिरी खत' से की।

वर्ष 1969 में आई फिल्म 'आराधना' ने उनके करियर को उड़ान दी और देखते ही देखते वह युवा दिलों की धड़कन बन गए। इस फिल्म ने राजेश खन्ना की किस्मत के दरवाजे खोल दिए। इसके बाद उन्होंने अगले चार साल के दौरान लगातार 15 सफल फिल्में देकर समकालीन और अगली पीढ़ी के अभिनेताओं के लिए मील का पत्थर कायम किया। वर्ष 1970 में बनी फिल्म 'सच्चा झूठा' के लिए उन्हें पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। तीन दशकों के अपने लंबे करियर में 'बाबू मोशाय' ने 180 फिल्मों में अभिनय किया। इस दौरान उन्होंने तीन बार 'फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड' जीते और इसके लिए 14 बार नामांकित भी हुए। सबसे अधिक बार 'अवार्डस फॉर बेस्ट एक्टर' (4) पाने का सौभाग्य भी सिर्फ उन्हीं को मिला है। वह इसके लिए 25 दफा नामित भी हुए।

वर्ष 1971 खन्ना के करियर का सबसे यादगार साल रहा। इस वर्ष उन्होंने 'कटी पतंग', 'आनंद', 'आन मिलो सजना', 'महबूब की मेहंदी', 'हाथी मेरे साथी' और 'अंदाज' जैसी अति सफल फिल्में दीं। उन्होंने 'दो रास्ते', 'दुश्मन', 'बावर्ची', 'मेरे जीवन साथी', 'जोरू का गुलाम', 'अनुराग', 'दाग', 'नमक हराम' और 'हमशक्ल' सरीखी हिट फिल्मों के जरिए बॉक्स ऑफिस को कई वर्षो तक गुलजार रखा। भावपूर्ण दृश्यों में उनके सटीक अभिनय को आज भी याद किया जाता है। फिल्म 'आनंद' में उनके सशक्त अभिनय को एक उदाहरण माना जाता है।'काका' को 2005 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। लंबी बीमारी के बाद 18 जुलाई, 2012 को दुनिया को अलविदा कहने वाले इस सितारे को 30 अप्रैल, 2013 को आधिकारिक तौर पर 'द फर्स्ट सुपरस्टार ऑफ इंडियन सिनेमा' की उपाधि प्रदान की गई।

 

Tags: rajesh khanna

 

 

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