राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि वेदों ने विश्व बन्धुत्व का संदेश दिया है और भारतीय संस्कृति वेदों से उत्पन्न हुई है। स्वामी विवेकानंद ने उसी विचारधारा व संदेश को भोगवाद में डूबी मानवता को सुख-शांति का रास्ता प्रशस्त करने के लिए दिया।राज्यपाल आज शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में विवेकानन्द केंद्र, कन्याकुमारी की शिमला शाखा द्वारा ‘विश्व बन्धुत्व दिवस’ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।उन्होंने विवेकानन्द केंद्र के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को संस्कारित करने तथा भारतीय परम्परा एवं संस्कृति से अवगत करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के चिन्तन को जीवन में आत्मसात करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रेम, एकता, सद्भावना, सहिष्णुता व बन्धुत्व का जो संदेश स्वामी विवेकानन्द ने विश्व को दिया उसपर अमल करने की आज अधिक आवश्यकता है।आचार्य देवव्रत ने कहा कि भारत कभी भी अक्रांता देश नहीं रहा है। इस देश से विदेशों में धर्म गुरू जरूरी गए, लेकिन उन्होंने केवल विश्व बंधुत्व का ही संदेश दिया। उन्होंने चिंता जताई कि आज विश्व भर में धर्म के नाम पर मतभेद हैं और लड़ाई का प्रमुख कारण भी। उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषियों ने धर्म की परिभाषा दी कि जिसको धारण करने वाला भी सुखी हो और जो उसके सम्पर्क में आए वह भी सुखी हो, जिससे विश्व बन्धुत्व पैदा हो, वही धर्म है।
उन्होंने कहा कि ‘‘जो तुम अपने लिए चाहते हो वह दूसरे के लिए पैदा करो’’, वही धर्म है और स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो में आयोजित सर्वधर्म सम्मेलन के नाम से आयोजित कार्यक्रम में धर्म के इन मूल सिद्धांतों को विश्व को दिया, जिसे कोई नकार नहीं सका।राज्यपाल ने कहा कि आडम्बर में उलझकर हम वास्तविकता को भूल गए हैं, जबकि वैज्ञानिक चिन्तन हमारे सामने आना चाहिए, जो हमारे उच्च परम्पराओं व संस्कृति ने वेदों के माध्यम से दिया है। जो मन में है, वही वाणी में औश्र जो वाणी में है वही कर्म में, यही भारतीय चिन्ता था।राज्यपाल ने विश्व बन्धुत्व दिवस पर आयोजित विभिन्न स्पर्धाओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया।इससे पूर्व, विवेकानन्द केंद्र, कन्याकुमारी के संयुक्त महासचिव श्री किशोर तोकेकर ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाओं पर विस्तृत चर्चा की।निदेशक, भाषा, कला एवं संस्कृति श्री रामकुमार गौतम ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे।स्वामी विवेकानन्द केंद्र की शिमला शाखा के नगर संचालक श्री तेज राम शर्मा ने भी कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए।हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजय करोल, न्यायमूर्ति श्री विवेक सिंह ठाकुर तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।