इनेलो की ओर से एसवाईएल नहर का अधूरा निर्माण पूरा करवाने की मांग को लेकर उपमंडल स्तर पर मंगलवार को इनेलो जिलाध्यक्ष राजेंद्र लितानी की अध्यक्षता में आदमपुर हलके की ओर से उपायुक्त कार्यालय पर धरना देते हुए विरोध जताया गया। धरने के उपरांत उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसके साथ ही बिजली-पानी संकट के समाधान और आगजनी से फसलों को हुए नुकसान की अदायगी की मांग को भी प्रमुखता के साथ उठाया गया। ज्ञापन में इनेलो नेताओं ने कहा कि हरियाणा अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के बाद केंद्र सरकार ने पानी के बंटवारे को लेकर एक कमेटी बनाई थी जिसके अनुसार हरियाणा को 3.78 एमएएफ पानी देने की सिफारिश की थी लेकिन केंद्र सरकार ने 24 मार्च 1976 को हरियाणा को केवल 3.5 एमएएफ पानी का हिस्सा दिया।
इनेलो नेता ने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल जी ने 31 मार्च 1979 को पंजाब सरकार को नहर निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपए की राशि की अदायगी की ताकि एसवाईएल के जरिए प्रदेष के हिस्से का पानी हरियाणा में लाया जा सके। 1981 में माननीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौजूदगी में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में समझौते के अनुसार नहर का निर्माण कार्य 31 दिसम्बर 1981 तक पूरा किया जाना था। जननायक चौधरी देवीलाल जी के मुख्यमंत्रित्व काल में 1987 से 1990 तक नहर का 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हुआ। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 15 जनवरी 2002 को दिए गए निर्देश के अनुसार पंजाब सरकार द्वारा एक वर्ष में एसवाईएल नहर का निर्माण कार्य पूरा करने का समय दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि वह अपने संवैधानिक दायित्व को निभाने के लिए यह सुनिश्चित करे कि यदि पंजाब सरकार उक्त नहर को एक वर्ष के भीतर पूरा नहीं करती तो केन्द्र सरकार अपने स्तर पर अपनी एजेंसियों द्वारा उस कार्य को पूरा करवाए और हरियाणा को उसके हिस्से का पूरा पानी दिलवाये।
उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने एक के बाद एक अनेक तकनीकी आपत्तियां उठाई परंतु उन सभी को खारिज करते हुए 4 जून 2004 को सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार को हिदायतें दी जिसके अनुसार केंद्र सरकार किसी भी एजेंसी को एक महीने के भीतर नहर निर्माण का कार्य सौंपेगी। किन्तु सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की अवहेलना करते हुए पंजाब विधानसभा ने अतीत के सभी अन्तर्राज्यीय जल समझौतों को रद्द करने का एक विधेयक वर्ष 2004 में पारित करके देश के संघीय ढांचे, न्याय और आपसी भाईचारे पर प्रहार किया। जब यह विधेयक माननीय राष्ट्रपति के पास गया तो उन्होंने इसे सर्वोच्च न्यायालय के पास उसकी वैधानिकता की जांच करने के लिए भेजा। सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी राय 10 नवम्बर 2016 को देते हुए पंजाब विधानसभा के उक्त विधेयक को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया। 28 नवम्बर 2016 को हरियाणा का एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल महामहिम राष्ट्रपति जी को मिला था और उनसे एसवाईएल के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द करवाने का अनुरोध किया गया था। लेकिन खेद की बात है कि पंजाब द्वारा अपने खिलाफ फैसला आ जाने के भय से 2016 में पंजाब सरकार ने विधानसभा बजट सत्र में एक कानून पारित किया कि राज्य में एसवाईएल नहर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन को किसानों को वापिस कर दी जाए और ऐसा कदम पंजाब की सरकार द्वारा संघीय ढांचे पर फिर से एक प्रहार है और उच्चतम न्यायालय के आदेशों की सरासर अवहेलना है।
उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री महोदय सर्वोच्च न्यायालय के 15 जनवरी 2002 को दिए गए फैसले को तुरंत लागू करवाने का कष्ट करें और पंजाब में एसवाईएल के अधूरे निर्माण कार्य को किसी केंद्रीय एजेंसी की देखरेख में जल्द से जल्द पूरा करवाऐं।इसके साथ ही उपायुक्त को हरियाणा में बिजली-पानी संकट के समाधान और आगजनी से फसलों को हुए नुकसान की अदायगी को लेकर भी ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें कहा गया कि प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों व बिजली की सप्लाई में निरंतर कटौती के कारण बिजली व पानी की कमी की वजह से प्रदेश की जनता गंभीर संकट से जूझ रही है। हरियाणा सरकार व बिजली विभाग द्वारा बार-बार यह दावे किए जा रहे हैं कि हरियाणा के पास बिजली सरप्लस में उपलब्ध है और उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन हकीकत में बिजली निगम ने 12 घंटे बिजली आपूर्ति का शेडयूल्ड बनाया हुआ है परंतु उसमें बार-बार अघोषित कट लगने के कारण मुश्किल से 2-4 घंटे ही बिजली मिल पाती है। वहीं वर्तमान में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं से लगभग 7 से 8 रूपये प्रति यूनिट बिल वसूल किए जा रहे हैं।
उपभोक्ताओं से फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट के नाम से जो राशि वसूल की जा रही है, उसका कोई औचित्य नहीं है। भाजपा सरकार की किसानों के प्रति बेरुखी व उदासीनता के कारण गेंहू की फसल के जलने से हुई हानि की भरपाई अभी तक नहीं की गई है। उन्होंने मांग की कि ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली सप्लाई सुनिश्चित की जाए, पीने के पानी के संकट से जूझ रहे लोगों व पशुधन के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और आगजनी से हुए फसलों के नुक्सान की भरपाई के लिए कम से कम 25 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए और फायर ब्रिगेड की गाडियों के बिलों की अदायगी भी सरकार द्वारा स्वंय की जाए। इस मौके पर विधायक रणबीर सिंह गंगवा, वेद नारंग, अनूप धानक, पूर्व मंत्री सुभाष गोयल, पूर्व विधायक पूर्ण सिंह डाबड़ा, शीला भ्याण, चतर सिंह, पूर्व चेयरमैन सतबीर वर्मा, पूर्व चेयरमैन हरिसिंह जाजूदा, राजेश गोदारा, रमेश गोदारा, भागीरथ नंबरदार, राजकुमार जांगड़ा, कृष्णा भाटी सहित बहुत से कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद थे।