केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को यहां आपदा जोखिम न्यूनीकरण (एनपीडीआरआर) पर राष्ट्रीय मंच की दो दिवसीय दूसरी बैठक का उद्घाटन किया। एनपीडीआरआर की दूसरी बैठक का थीम है 'सतत विकास के लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण' 2030 तक भारत को सु²ढ़ बनाना। एनपीडीआरआर केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता वाला एक बहु-हितधारक राष्ट्रीय मंच है और यह आपदा प्रबंधन में भागीदारी वाले निर्णय को बढ़ावा देता है और हमारे देश की संघीय नीति को मजबूती प्रदान करता है।यहां जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि एनपीडीआरआर आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुभवों को साझा करने और आपदा जोखिम में कमी लाने के लिए सामूहिक प्रयास करने वाला राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है। उन्होंने आपदा जोखिम से जुड़े नुकसान को कम करने में रोकथाम और न्यूनीकरण की भूमिका पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आपदा से निपटने की तैयारी और न्यूनीकरण पर एक अतिरिक्त रुपया खर्च करने से आपदा हानि में 10 रुपये की बचत की जा सकती है।
उन्होंने आपदा जोखिम में कमी के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क सतत विकास लक्ष्य और जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते (सीओपी21) जैसे वैश्विक समझौतों को स्मरण किया। राजनाथ ने आपदा जोखिम में कमी के लिए सरकारों द्वारा किए जा रहे विभिन्न प्रयासों जैसे कि आपदा प्रबंधन योजना और नीति तैयार करने, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों का विकास करने, चक्रवात से बचाव के लिए आश्रयों एवं उपयुक्त तटबंधों का निर्माण किए जाने, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरों पर आपदा राहत बलों का गठन करने और सतत प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम के जरिए समुदायों का क्षमता निर्माण करने पर प्रकाश डाला।केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि भारत आपदा के खतरे की संभावनाओं वाला देश है। उन्होंने आपदा से निपटने की तैयारियों को निरंतर बेहतर करने और जोखिम कम करने के उपायों को सु²ढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। रिजिजू ने एएमसीडीआरआर 2016 के दौरान देश के प्रधानमंत्री द्वारा आपदा जोखिम में कमी के लिए उल्लेख किए गए 10 सूत्री एजेंडे का जिक्र किया और इस बैठक में उपस्थित प्रतिभागियों से इस एजेंडे को वास्तविकता में तब्दील करने के लिए ठोस योजनाएं बनाने को कहा।