स्वास्थ्य विभाग में अनुपस्थिति की जांच के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, बाली भगत ने आज सांबा जिले में दुर्घटना अस्पताल (एएच), विजयपुर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), बड़ी ब्राह्मणा में तीन डॉक्टरों और दो पैरा मेडिक्स्क्स को निलंबित करने का आदेश दिया।विजयपुर के औचक दौरे के दौरान मंत्री ने दो डॉक्टरों डॉ पवन अरोड़ा, सलाहकार सर्जन और डॉ हरविंदर सिंह, दंत सहायक और पीएचसी, बड़ी बा्रह्मणा मंे डॉ अंजुम चौधरी, मेडिकल ऑफिसर, अजित कुमार फार्मासिस्ट और मनोज कुमार बीएचडब्ल्यू को अनधिकृत रूप से अनुपस्थित पाया और उनके लंबित जांच तक तत्काल निलंबन के लिए आदेश जारी किए। निलंबन की अवधि के दौरान, वे मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सांबा के कार्यालय में संलग्न रहेंगें।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए मंत्री ने कहा कि किसी भी मामले में डाक्टरों की ढीलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी को अपने कर्तव्यों के प्रति जवाबदेह बनाया जाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और मरीजों को सर्वोत्तम सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए निदेषक स्वास्थ्य सेवा और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से परिधीय संस्थाओं के लगातार औचक दौरे करने को कहा।
विजयपुर एएच के विभिन्न वार्डों और इकाइयों के निरीक्षण के बाद, मंत्री ने संबंधितों को अस्पताल और इसके आसपास उचित स्वच्छता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।मरीजों के भारी प्रवाह को ध्यान में रखते हुए, एएच, विजयपुर में विशेष रूप से आकस्मिक मामले मंे, मंत्री ने कहा कि सरकार इसके विस्तार और उन्नयन के लिए संभावनाओं का पता लगाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस महत्वपूर्ण संस्था के कामकाज में दक्षता विकसित करने के लिए बचे हुए बुनियादी ढांचे, उपकरणों को पुनर्निर्मित/ प्रतिस्थापित किया जाएगा।मंत्री ने कहा कि लखनपुर से जम्मू तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर आकस्मिक मामलों के तत्काल बचाव के लिए सरकार ने पहले ही एक क्रिटिकल केयर एम्बुलेंस प्रदान किया है।इस अवसर पर मंत्री ने डॉक्टरों, पैरा-मेडिक्स, मरीजों और उनके परिचारकों के साथ बातचीत की और कठिनाइयों व उपलब्ध सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने मरीजों के साथ मैत्रीपूर्ण और मिशनरी भावना के साथ उनकी सेवा के लिए डॉक्टरों और पैरा-मेडिक्स को अतिरिक्त उत्साह और समर्पण के साथ काम करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यकताओं के अनुसार कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में कार्य वातावरण को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है।