पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि आर.टी.आई के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त की जानकारी ने कांग्रेस पार्टी के दावे को साबित कर दिया है कि संगत दर्शन कार्यक्रम सिर्फ एक ड्रामा है और आम लोगों को धोखा देने की कोशिश का हिस्सा है। बाजवा ने कहा है कि इस बारे में जानकर बहुत हैरानी हुई कि मुख्यमंत्री कार्यालय के पास संगत दर्शन कार्यक्रम के बारे मे कोई जानकारी नहीं है। वास्तव में मुख्यमंत्री द्वारा विकास कार्यों के लिए बांटी जाने वाली ग्रांटें असल में केन्द्र सरकार द्वारा दी जाती ग्रांटों व राज्य के योजनाबद्ध खर्चे का हिस्सा हैं। कांग्रेस सरकार के वक्त इन ग्रांटों को बांटने का काम पंचायत सचिव स्तर और अधिक से अधिक ब्लाक विकास अफसरो द्वारा किया जाता था। बादल ने संगत दर्शन के दौरान १९९७ से २००२ के मध्यम ६०० करोड़ रुपए से अधिक के फंड बांटे, जिसको कैग की रिपोर्ट में फंडों की बर्बादी बताकर गंभीर नोटिस लिया गया। बावजूद इसके कोई शिक्षा न लेते हुए बादल ने २००७ में सत्ता हासिल करने के बाद यह कार्यक्रम शुरू कर दिया। यदि संगत दर्शन कार्यक्रम इतने सफल होते, तो फिर क्यों उनकी पार्टी २००२ में विधानसभा चुनाव हारती।
बाजवा ने कहा कि बादल द्वारा किए जाने वाले संगत दर्शन कार्यक्रम पंजाब के लोगों की बेइज्जती है, जिनको अपने अधिकार की बजाय बादल के सामने भीख मांगने को मजबूर होना पड़ता है। उन्होने कहा कि विकास प्रोजेक्टों के लिए बने फंडों को गांवों व शहरो में बांटते फिरते बादल पब्लिक फंडों को बबार्द कर रहे हैँ। यदि किसी गांव को सडक़ों के निर्माण के लिए १० लाख रुपए की जरूरत है, तो बादल उसको सिर्फ २ लाख रुपए का चैक देकर बाकी आते भविष्य में देने का लारा लगा देते हैं। यही कारण है कि पंजाब के गांव विकास के मामले में पिछड़ रहे हैं। क्योंकि जिन उद्देश्यों के लिए फंड दिए जाते हैं, उनके लिए बरते नहीं जाते। प्रदेश कांग्रेस प्रधान ने कहा कि उनके कार्यालय ने तीन आधारों पर आर.टी.आई कानून के तहत जानकारी मांगी थी, जिसमें पहला संगत दर्शन कार्यक्रमों के लिए वित्तीय साधन, दूसरा राज्य सरकार द्वारा ग्रांटों को बांटने का आधार और तीसरा कि कैसे राज्य सरकार संगत दर्शन कार्यक्रम के तहत दिए फंड में सही उपयोग सुनिश्चित कर सकती है, यदि मुख्यमंत्री कार्यालय को फंडों के दुरुपयोग की कोई शिकायत मिलती है। आर.टी.आई को प्रदेश कांग्रेस के आर.टी.आई सैल के चेयरमैन पूर्व आई.ए.एस. अफसर आर.आर. भारद्वाज ने दायर किया था। आर.टी.आई एक्ट के तहत मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया है कि सिर्फ कानून के तहत मात्र वही जानकारी देनी जरूरी है, जो मौजूद है और पब्लिक अथॉरिटी द्वारा की गई है या उसके कंट्रोल में है, आर.टी.आई एक्ट के तहत जानकारी पैदा करना या उसको जुटाना या निवदेनकर्ता द्वारा दर्शाई समस्या का हल करना या गैर जरूरी सवालों का जवाब देना आवश्यक नहीं है।
बाजवा ने कहा कि कैसे मुमकिन है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के पास बादल के फैलोशिप कार्यक्रम, जिस बारे में वह दावा करते हैं, के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है कि वर्तमान सरकारी स्तर पर संगत दर्शन नाम का कोई कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने कहा कि इन ग्रांटों को जिलाधीशों ने बलाक विकास अफसरों के माध्यम से बांटना होता है। बादल न सिर्फ विकास कार्यों का लाभपात्रों तक पहुंचाने के लिए आम वितरण प्रणाली में दखल दे रहे हैँ, बल्कि अपने सियासी फायदे के लिए जिला प्रशासन का समय भी बर्बाद कर रहे हैं। वह यह कहने पर माफी मांगते हैं कि गांवों की पंचायतों को अकली दल के हलका इंचार्जों मर्जी के बिना एक पैसा भी नहीं दिया गया, जो मशहूर जिले के गांवों के सरपंचों व मंत्री के समक्ष दलाल का काम करते हैं। यह एक संगठित नेटवर्क है और ऐसे में संगत दर्शन को संगठित भ्रष्टाचार का नाम देना गलत न होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब बढिय़ा तरीके से विकास करता, यदि बादल सरकार सिविल प्रशासन को विकास कार्यों के लिए योजना बनाने व उस पर अमल करने देती। बीती कांग्रेस सरकारों में जिला अथॉरिटियों व गांवों की पंचायतों को विकास प्रोजेक्ट तैयार करने की आजादी दी गई थी।