देश की सैन्य ताकत, सांस्कृतिक विविधता का शानदार नजारा
5 Dariya News
नई दिल्ली , 26 Jan 2017
Last updated on: Jan 26, 2017, 00:00 IST
देश के 68वें गणतंत्र दिवस के मौके पर विजय चौक से लाक किले तक भारतीस सेना के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विविधता व विभिन्न क्षेत्रों में हमारी उपलब्धियों की शानदार झलक देखने को मिली। समारोह के अतिथि अबु धाबी के राजकुमार मोहम्मद बिन जायद अल नहयान रहे। देश के गणतंत्र दिवस का प्रमुख समारोह यहां गुरुवार को राजपथ पर आयोजित हुआ, जिसमें भारी तादाद में लोगों ने शिरकत की और 90 मिनट का परेड देखा, जो विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की मेक इन इंडिया पहल पर आधारित था।
आतंकवादी हमले की आशंका के बीच, समारोह स्थल के साथ ही पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सुरक्षा चाक-चौबंद की गई। पूरी राजधानी में पुलिस व अर्धसैनिक बलों के लगभग 60,000 जवानों को तैनात किया गया।हल्की बूंदाबांदी के बावजूद समारोह देखने के लिए आठ किलोमीटर लंबे राजपथ के दोनों तरफ भारी संख्या में लोग जमा हुए।
दिन की शुरुआत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा राष्ट्रपति भवन में तिरंगा फहराने तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति पर वीरों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।मोदी ने राष्ट्रपति तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राजकुमार व गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि शेख मोहम्मद का स्वागत किया।राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, सशस्त्र सैन्य बलों के कमांडर-इन-चीफ ने परेड की सलामी ली। परेड की शुरुआत 149 सदस्यीय यूएई सेना की टुकड़ी के मार्च से हुई।
मार्च का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल अबूद मुसाबेह अलगफेली ने किया, जिसमें यूएई प्रेंसिडेंसियल गार्ड, वायु सेना, नौसेना, सेना तथा 35 संगीतकार शामिल थे।इसके बाद सेना व अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों ने मार्च पास्ट किया। इस दौरान, अर्धसैनिक कर्मी तथा दिल्ली पुलिस ने भी कदमताल किया।समारोह के दौरान, स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान तेजस तथा एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निग एंड कंट्रोल सिस्टम (एईडब्ल्यूएंडसी) का पहली बार प्रदर्शन किया गया।
मौसम खराब रहने के बावजूद, तीन लड़ाकू विमानों ने जमीन से 300 मीटर की ऊंचाई पर 780 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी।एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा विकसित तथा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित विमान तेजस चौथी पीढ़ी का विमान है, जो 1,350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है और इसकी तुलना दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमानों फ्रेंच मिराज 2000, अमेरिका के एफ16 तथा स्वीडन के ग्रिपेन से की जाती है।
समारोह में पहली बार आतंकवाद रोधी बल राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) भी नजर आई, जिसके 60 कमांडो की एक टुकड़ी ने लोगों को अपने पराक्रम से परिचित कराया और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को औपचारिक सलामी दी। अन्य कमांडो सात वाहनों में सवार थे।सशस्त्र बलों के बाद एक-एक कर राज्यों की झांकियां निकलनी शुरू हुई, जिसमें देश की विविधता की झलक दिखी।हरियाणा की झांकी 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' पर आधारित थी और सबसे पहले इसने अपना प्रदर्शन किया।
जम्मू एवं कश्मीर की झांकी पूरी तरह सफेद रंगों में रंगी थी, जो राज्य की खूबसूरत जगह गुलमर्ग को दर्शा रही थी। काफी वर्षो बाद राजपथ पर दिल्ली की झांकी भी दिखी।
वायु सेना द्वारा फ्लाई पास्ट के बाद परेड समाप्त हुआ, जिसमें विमानों व हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट से आसमान गूंज उठा। एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर ने तिरंगे के साथ उड़ान भरी और फूलों की पंखुड़ियों की बरसात की।इस दौरान, असम रेजिमेंट के शहीद हवलदार हंगपन दादा को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति से यह सम्मान हंगपन की पत्नी ने स्वीकार किया। यह शांतिकाल में सैनिकों को दिया जाना वाला सर्वोच्च सम्मान है। हंगपन ने जम्मू एवं कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में शहीद होने से पहले अकेले चार आतंकवादियों को ढेर कर दिया था।सैन्य परेड का नेतृत्व दिल्ली इलाके के जनरल ऑफिस कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल मुकुंद नरवाने ने किया।