तमिलनाडु : प्रदर्शन खत्म करने से पहले जल्लीकट्टू की बहाली की मांग
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चेन्नई , 20 Jan 2017
Last updated on: Jan 20, 2017, 00:00 IST
तमिलानाडु की राजधानी स्थित मरीना समुद्र तट और मदुरै में जल्लीकट्टू के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को कहा कि वह पूरे प्रदेश में जल्लीकट्टू के आयोजन की अनुमति मिलने तक अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ.पन्नीरसेल्वम ने आश्वासन दिया था कि जल्लीकट्टू के आयोजन के लिए कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं और कुछ दिनों बाद इसका आयोजन होगा। मुख्यमंत्री के इस आश्वासन के बावजूद युवाओं ने अपना प्रदर्शन जारी रखा है।नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए पन्नीरसेल्वम ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार जल्लीकट्टू के आयोजन के लिए अध्यादेश लाएगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से प्रदर्शन वापस लेने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर संवैधानिक विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा की है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम के कुछ प्रावधानों के लिए एक संशोधन का मसौदा तैयार किया है और इसे शुक्रवार सुबह केंद्र सरकार को भेज दिया गया।उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तथा राज्य के राज्यपाल सी.एच.विद्यासागर राव की सहमति के बाद संशोधन को एक अध्यादेश के रूप में लाया जाएगा।उन्होंने कहा कि एक बार जब राज्यपाल इसे मंजूरी दे देंगे, अध्यादेश लागू हो जाएगा और फिर राज्य में जल्लीकट्टू का आयोजना कराया जा सकेगा।मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों से प्रदर्शन वापस लेने की अपील की।
चेन्नई के मरीना समुद्र तट और मदुरै में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने हालांकि साफ तौर पर कहा कि वे अपना प्रदर्शन इसके आयोजन के बाद ही खत्म करेंगे।एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "तमिलनाडु में जल्लीकट्टू के आयोजन के बाद हम अपना प्रदर्शन वापस लेंगे। मुख्यमंत्री ने जिन उपायों की घोषणा की है, वे कामचलाऊ लगते हैं। इसका स्थायी समाधान यही है कि केंद्र सरकार एक अधिसूचना जारी कर पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम की परफॉर्मिग एनिमल्स की सूची से बैल (बुल) का नाम बाहर निकाले।"
राज्य सरकार की प्रदर्शन खत्म करने की अपील के बावजूद मरीना समुद्र तट पर प्रदर्शनकारियों का रेला लगा हुआ है।
यहां पूरे के पूरे परिवार पहुंच रहे हैं। लोगों ने हाथों में जल्लीकट्टू से संबंधित अपनी मांगों की तख्तियां उठा रखी हैं। संगीत का भी सहारा लिया जा रहा है।गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) पसुमई थायगम के सचिव आर. अरुल ने आईएएनएस से कहा, "छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार के तमिलनाडु से जुड़े कई मुद्दों जैसे कावेरी नदी जल बंटवारा, जल्लीकट्टू पर उठाए गए कदमों के नतीजे के रूप में सामने आया है।"अरुल ने कहा कि ऐसा लगता है कि तमिलनाडु के कई मुद्दों पर केंद्र सरकार के रुख ने ही स्थिति को वहां पहुंचा दिया, जिसमें पूर्व विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने भी जल्लीकट्टू के प्रति अपना समर्थन जताया और यह कहकर कि 'मैं तमिल हूं', अपनी तमिल पहचान का इजहार किया।
अरुल ने कहा, "आमतौर पर आनंद और उनके जैसे अन्य लोग खुद को पहले भारतीय कहलाना पसंद करते हैं।"उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की अगुवाई चाहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) करे या कांग्रेस, इन्हें देश की संस्कृति और सभ्यता की विविधता को स्वीकार करना चाहिए।अरुल ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के तमिल राष्ट्रीय आंदोलन में बदलने की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि इस तरह की बातों के दिन अब गुजर चुके हैं। तमिलनाडु में लोग इस तरह के आंदोलनों का समर्थन नहीं करते।
इस बीच, तमिलनाडु में रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन कर रहे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के कार्यकर्ताओं और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एम.के.स्टालिन को पुलिस ने कुछ वक्त के लिए हिरासत में लिया।कुछ जिलों में जल्लीकट्टू के समर्थन में स्कूल और बाजार बंद रहे।सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2014 में यह कहते हुए जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था कि बैलों का इस्तेमाल खेल के लिए नहीं किया जा सकता, बैलगाड़ी दौड़ के लिए भी नहीं।न्यायालय के इस फैसले के बाद से ही लोग इस खेल के आयोजन को मंजूरी देने के लिए केंद्र से अनुरोध करते रहे हैं।तमिलनाडु में प्रदर्शन मंगलवार सुबह तब शुरू हुआ, जब मदुरै जिले के आलंगानल्लूर कस्बे में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। आलंगानल्लूर जल्लीकट्टू के शानदार आयोजन के लिए जाना जाता है।तमिलनाडु के 300 से ज्यादा सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों ने शुक्रवार को जल्लीकट्टू पर से प्रतिबंध हटाए जाने की मांग को लेकर इन्फोपार्क परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।तमिलनाडु में बड़ी संख्या में फिल्मी सितारे भी आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।