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दुर्गम क्षेत्रों में कार्य कर रहे अध्यापकों को सम्मानित करने की ज़रूरतः वीरभद्र सिंह

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5 Dariya News

शिमला , 05 Sep 2016

Last updated on: Sep 05, 2016, 00:00 IST

शिक्षक दिवस के अवसर पर अध्यापकों को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कारों के लिए चयन की प्रक्रिया का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि जो अध्यापक स्वेच्छा से राज्य के अति दुर्गम एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें ऐसे मौकों पर सम्मानित किए जाने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि प्रायः देखा गया है कि ऐसे कठिन एवं जनजातीय क्षेत्रों में गत अनेक वर्षों से समर्पण भाव से विद्यार्थियों को पढ़ा रहे अध्यापकों का नाम पुरस्कार प्राप्त करने वालों की सूची में नहीं होता।मुख्यमंत्री आज यहां राजभवन में राज्य स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह के अवसर पर बोल रहे थे।श्री वीरभद्र सिंह ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिये कि शहरी क्षेत्रों में समायोजन के लिए समय व्यर्थ करने वाले अध्यापकों के बजाए दुर्गम क्षेत्रों में कार्य कर रहे शिक्षकों, जो वास्तव में अपने व्यवसाय के प्रति समर्पित है, की सेवाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने दुर्गम एवं जनजातीय क्षेत्रों के नामों का ज़िक्र भी किया, जहां से कोई भी अध्यापक पुरस्कार प्राप्त करने वालों की सूची में शामिल नहीं है। उन्होंने भविष्य में पुरस्कारों के लिए शिक्षकों का नामांकन करते समय ऐसे अध्यापकों की सेवाओं की संस्तुति करने के निर्देश दिये। हालांकि, जिन अध्यापकों को आज सम्मानित किया जा रहा है, यह उनके कठिन परिश्रम एवं समर्पण के कारण है और वे प्रशंसा के पात्र हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश आज केरल के बाद सर्वाधिक साक्षर राज्य है, जहां 88 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल कर ली गई है तथा यह अध्यापकों के अपने व्यवसाय के प्रति कड़े परिश्रम एवं समर्पण के कारण संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि अध्यापक बच्चों को जीने की कला सिखाते हैं तथा सुगमतापूर्वक पहुंच के साथ सर्वाधिक बुद्धिमान परामर्शक हैं।वीरभद्र सिंह ने इस दिवस के अवसर पर अध्यापकों की भूमिका तथा शिक्षण के प्रति उनके योगदान के विश्लेषण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज मूल्य आधारित शिक्षा की नितांत आवश्यकता है, जो विद्यार्थियों को भविष्य के प्रयासों में सक्षम बना सके तथा अध्यापकों को उनके विद्यार्थियों की उपलब्धियों से संतोष प्राप्त हो, न कि धनोपार्जन से। उन्होंने सूचना-प्रौद्योगिकी के वर्तमान दौर में नई तकनीकों को अपनाने पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें सदियों पुरानी ‘गुरु-शिष्य परम्परा’ से प्रेरणा लेनी चाहिए, जहां गुरुजनों के सम्मान का स्तर तथा गुरु की अपने विद्यार्थियों के प्रति वचनबद्धता की बहुत बात होती थी, और इसके उदाहरण आज भी दिये जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत सदैव ही अध्ययन का केन्द्र रहा है और अनेक संत, विद्वान व प्रचारक, जिन्होंने ‘ग्रंथों व वेदों को लिखने का महान कार्य किया है, वे भारत वर्ष में रहते थे। उन्होंने कहा कि उस समय शिक्षकों एवं शिक्षणार्थियों के बीच रिश्तों के अनुसरण तथा इन्हें पुनःजीवित करने की आवश्यकता है।श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि अध्यापकों का मकसद अपनी छवि के अनुरूप विद्यार्थी का सृजन करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को इस प्रकार से विकसित करना है, जो अपनी छवि का स्वयं निर्माण कर सके। उन्होंने कहा कि मेरे विचार में विश्व में समाज के लिए कोई अन्य व्यवसाय इतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना शिक्षक का है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा एवं समर्पित अध्यापक स्वस्थ समाज के निर्माण, युवा दिमाग की सोच को प्रकाशमयी बनाने तथा बच्चों में अध्ययन के प्रति प्रेम की भावना उत्पन्न करने के लिए जिम्मेवार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षित समाज विकसित करने तथा बच्चों को उनके घरद्वार के समीप गुणात्मक शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिये कृतसंकल्प है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के 44 महीनों के कार्यकाल के दौरान 1010 पाठशालाएं खोली अथवा स्त्तरोन्नत की गई तथा राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में 41 नये कालेज खोले गए हैं जिससे विशेषकर लड़कियां लाभान्वित हुई हैं। उन्होंने कहा कि प्रायः यह देखा गया है कि राज्य की कठिन भौगिलिक परिस्थितियों के चलते लड़कियां अपने घरों से दूर उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाती। इसी उद्देश्य से सरकार ने प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों में पाठशालाएं व महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया ताकि लड़कियों को उनके घर-द्वार के समीप उच्च शिक्षा सुविधा उपलब्ध करवाई जा सके। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में शिक्षण संस्थानों के खुलने से आश्चर्यजनक परिणाम सामने आए हैं और इन संस्थानों में आज लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या अधिक है।

उन्होंने कहा कि लोगों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने इस वित्त वर्ष के दौरान शिक्षा के लिये 6013 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी डिजिटल योजना के अंतर्गत 10वीं तथा जमा दो के मेधावी छात्र-छात्राओं को 22500 से अधिक लैपटॉप/नोटबुक वितरित की गई हैं तथा इस वित्त वर्ष के दौरान 10000 लैपटॉप वितरण की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि विभिन्न छात्रवृति योजनाओं के अंतर्गत 98541 से अधिक विद्यार्थियों को 77.72 करोड़ रुपये की छात्रवृतियां प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय प्रबन्धन संस्थान (आईआईएम) तथा एम्ज में प्रवेश पाने वाले राज्य के प्रत्येक विद्यार्थी को 75000 रुपये की राशि प्रदान की जा रही है।उन्होंने इस अवसर पर सम्मानित किए गए अध्यापकों को बधाई भी दी।

 

Tags: Acharya Devvrat , Virbhadra singh

 

 

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