अकाली दल बादल के समर्थन वाली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा दशकों पुरानी परंपरा को तोड़कर पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ के लिये नया प्रशासक नियुक्त करने के फैसले का आम आदमी पार्टी (आप) ने सख्त विरोध करते हुये इसे चंडीगढ़ को पूरी तरह पंजाब से छीनने वाला पंजाब विरोधी फैसला करार दिया है।बुधवार को 'आप द्वारा जारी प्रेस बयान में पार्टी की चुनाव प्रचार कमेटी के चेयरमैन और सांसद भगवंत मान ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने चंडीगढ़ पर पंजाब का थोड़ा-बहुत बचा हक भी छीन लिया है। चूंकि शिरोमणि अकाली दल केंद्र की गठबंधन सरकार का अहम हिस्सा है, इस लिये प्रकाश सिंह बादल को अब कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया कि वह पंजाब के मुख्यमंत्री पद पर बने रहे। प्रकाश सिंह बादल को तुरंत इस्तीफा देना चाहिये और भाजपा से गठबंधन तोड़कर अपनी बहू हरसिमरत कौर बादल को वापिस बुलाना चाहिये।
भगवंत मान ने कहा कि बादल परिवार ने सत्ता के लिये नरेंद्र मोदी सरकार के सामने घुटने टेक दिये हैं। मान ने कहा, 'बादलों ने खुद तो मुल्लांपुर में अपना प्राईवेट चंडीगढ़ वसा लिया है। अरबों रुपये की लूट की कमाई को न्यू चंडीगढ़ में नामी-बेनामी संपत्ति में लगा दिया है। सेवन-स्टार होटल बना लिये हैं। लेकिन इसके लिये पंजाब की आन और शान चंडीगढ़ को कुर्बान कर दिया है।भगवंत मान ने बादल से पूछा कि जब नरेंद्र मोदी सरकार पंजाब विरोधी फैसला ले रही थी तब बादल सरकार और उनकी बहु हरसिमरत कौर बादल क्या कर रही थी? भगवंत मान ने कहा कि अकाली दल के समर्थन वाली भाजपा सरकार ने पंजाब विरोधी निर्णय लेने में कांग्रेस को भी मात दे दी है। मान ने कहा आम आदमी पार्टी मोदी सरकार के इस पंजाब विरोधी फैसले का सड़क से सांसद तक विरोध करेगी। भगवंत मान ने कहा कि अकाली दल और कांग्रेस ने राजधानी चंडीगढ़, पंजाब के दरियाई पानी और पंजाबी भाषाई इलाकों जैसे लंबित मुद्दे का स्थाई हल करने की जगह इन पर हमेशा वोट की घटिया राजनीति की है।