ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेताते हुए कहा कि नदी संरक्षण क्षेत्रों की प्रस्तावित अधिसूचना लागू करने योग्य नहीं है। इस संबंध में मोदी को लिखे पत्र में पटनायक ने कहा कि अधिसूचना से ओडिशा के लिए विकास विरोधी गंभीर परिणाम होंगे। पटनायक ने पत्र में कहा, "मैं आपसे निवेदन करता हूं कि प्रस्तावित अधिसूचना को लागू करने में जल्दबाजी नहीं करें।"अधिसूचना के मसौदे में नदी के हिस्सों और बाढ़ मैदानों को नदी संरक्षित क्षेत्र (आरसीजेड) घोषित करने का प्रावधान है। यह इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गतिविधियों को मना/नियंत्रित करता है। यह नदी के किनारे तीन क्षेत्रों को चिन्हित करता है- गतिविधियां निषिद्ध क्षेत्र (आरसीजेड-पीए), गतिविधियांप्रतिबंधित क्षेत्र (आरसीजेड-आरए-1) और गतिविधियां नियमित क्षेत्र (आरसीजेड-आरए-2)।
पटनायक ने कहा कि ओडिशा के 12000 किलोमीटर क्षेत्र में नदियां फैली हुई हैं और नदियों के किनारे दोनों ओर 4.5 से 5 किलोमीटर क्षेत्र और बाढ़ मैदानों को आरसीजेड के तहत रखने का प्रस्ताव किया गया है।मुख्यमंत्री ने कहा, "इसलिए प्रस्तावित अधिसूचना से राज्य के कुल क्षेत्रफल 156000 वर्ग किलोमीटर में 108,000 वर्ग किललोमीटर क्षेत्र प्रभावित होंगे।
इस तरह की अधिसूचना से राज्य की विकासात्मक गतिविधियों की प्रगति रुक जाएगी।"उन्होंने कहा कि संघीय व्यवस्था में केंद्र और राज्यों की शक्तियां और दायित्वों को केंद्रीय और राज्य सूचियों में पारिभाषित किया गया है और जल संसाधन राज्य का विषय है।मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा, "केंद्र सरकार की अधिसूचना से राज्यों की शक्तियां प्रतिबंधित होंगी और भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी, क्योंकि उपरोक्त गतिविधियांराज्यों के अधीन आती हैं।"पटनायक ने कहा कि व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए राज्य सूची में शामिल इन गतिविधियों को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत अधिसूचना में सम्मलित नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि देश में बाढ़ की समस्या के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा दिशा-निर्देश जारी किया जा सकता है जिसे संबंधित राज्य सरकारें अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से लागू करने पर विचार कर सकती हैं।उन्होंने प्रस्तावित अधिसूचना के सभी पहलुओं पर राज्य सरकार के साथ विस्तृत चर्चा करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से भी अनुरोध किया।