अर्ध सैनिक बल के 200 अवकाशप्राप्त कर्मचारियों ने सोमवार से वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) की मांग के समर्थन में अपना तीन दिवसीय विरोध शुरू किया। उनकी मांग है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के 13 लाख कर्मचारियों को ओआरओपी दी जाए। अर्धसैनिक बलों के ये अवकाश प्राप्त कर्मचारी आल इंडिया सेंट्रल पारामिलिट्री फोर्सेज एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और ओआरओपी के साथ-साथ सीएपीएफ कर्मियों के लिए सेंट्रल सिविल सर्विसेज रूल्स के तहत अन्य अधिकारों की मांग की।
अर्धसैनिक बल के एक अवकाशप्राप्त अफसर ने आईएएनएस से कहा कि सीएपीएफ को भी सशस्त्र बलों जैसा दर्जा मिलना चाहिए।उन्होंने कहा कि सीएपीएफ कर्मचारी 1965, 1971 और 1999 के करगिल युद्ध में शामिल रहे हैं। इन्होंने सेना के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी और 'वे सुरक्षा की पहली पंक्ति' होते हैं।उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अब तक अलग-अलग लड़ाइयों में 22250 सैनिक शहीद हुए जबकि सीएपीएफ के 33678 जवानों ने वीरगति पाई।कई अवकाशप्राप्त अधिकारियों ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि सेना के लिए ओआरओपी का ऐलान सरकार के उनके प्रति भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है।
एसोसिएशन के महासचिव पी.एस.नायर ने कहा, "हम देश में सुरक्षा की पहली कतार में आते हैं। राष्ट्र की सीमा के प्रहरी हैं, माओवाद प्रभावित इलाकों में रहते हैं, जम्मू एवं कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित इलाकों में तैनात होते हैं और पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात रहते हैं।"नायर ने कहा, "हर साल अपना कर्तव्य निभाते हुए हमारे कितने ही जवान मौत को गले लगाते हैं। हमें समझ नहीं आता कि सरकार अन्य सशस्त्र बलों की तरह हमें केंद्रीय सुविधाएं क्यों नहीं देती। सीएपीएफ के सभी कर्मचारियों को लाभ मिलना चाहिए।"