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गांव, जहां सम्मानीय है रावण

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5 Dariya News

बिसरख , 22 Oct 2015

Last updated on: Oct 22, 2015, 00:00 IST

रावण के पुतले को भले ही भारत भर में जलाया जाता हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के इस गांव में रावण को बेहद सम्मानीय माना जाता है। गांव के निवासियों का मानना है कि यहीं रावण का जन्म हुआ था। ऐसा नहीं है कि बिसरख के स्त्री-पुरुष राम की पूजा नहीं करते, लेकिन वे रावण के पुतले को जलाने के खिलाफ हैं। एक स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता दुष्यंत नागर ने इसका कारण बताया। नागर ने आईएएनएस को बताया, "हमारी नजरों में रावण किसी महिला का अपहर्ता नहीं है। हमारे लिए रावण भगवान शिव का परम भक्त था और इसलिए हम कभी भी उसका पुतला नहीं जलाएंगे।"नागर ने कहा, "बिसरख में राम भी पूजे जाते हैं, लेकिन क्योंकि रावण का जन्म इस गांव में और केकसी और उस समय के महान संत विशर्व की संतान के रूप में हुआ था इसलिए बिसरख छोड़ने से पहले से ही रावण को एक संत माना जाता रहा है।"माना जाता है कि रावण ने भगवान शिव की तपस्या के लिए हिमालय जाने के लिए बिसरख छोड़ दिया था। नागर ने कहा, "बिसरख में रावण का अतीत बेहद गौरवशाली रहा है। वह अपने जन्म के समय से ही एक बड़ा शिवभक्त था और शिव की आशीष से ही उसने लंका पर विजय पाई। इसलिए बिसरख के निवासी उसे एक बड़ा संत मानते हैं।"

 

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