भारत और अमेरिका ने एक नई कूटनीतिक साझेदारी की घोषणा की है, जिसका मकसद रणनीतिक दृष्टि, राजनयिक प्रशिक्षण और वैश्विक भागीदारी में आपसी सामंजस्य पैदा करना है। कूटनीतिक साझेदारी की घोषणा प्रथम भारत-अमेरिका रणनीतिक और वाणिज्यिक वार्ता के समापन पर की गई। वार्ता की सह-अध्यक्षता मंगलवार को भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और अमेरिकी विदेशमंत्री जॉन केरी ने की।दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच हुई इस साझेदारी के तहत रणनीतिक चुनौतियों और अवसरों पर सोच में सामंजस्य के लिए नीति योजना वार्ता भी शामिल है।
इसके तहत दोनों ओर के राजनयिक अधिकारियों की एक-दूसरे से घनिष्ठता बढ़ाई जाएगी और राजनयिक प्रशिक्षण में बेहतर तरीकों का आदान-प्रदान किया जाएगा।वार्ता के बाद जारी एक तथ्यात्मक ब्योरे के मुताबिक, 10 साल पहले दोनों देशों का रक्षा व्यापार नगण्य था।पिछले कुछ वर्षो में दोनों देशों ने 10 अरब डॉलर रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं।इसके अलावा दोनों देशों की कंपनियों ने भी कई समझौते किए हैं।जून 2015 में 10 वर्षीय रक्षा फ्रेमवर्क का नवीनीकरण किया गया।
ब्योरे के मुताबिक, द्विपक्षीय व्यापार 2005 में 36 अरब डॉलर था, जो 2014 में तीन गुना बढ़कर 104 अरब डॉलर हो गया।भारत में अमेरिकी निवेश भी 2004 के 7.7 अरब डॉलर से बढ़कर आज 28 अरब डॉलर हो गया है।पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। अमेरिका में पढ़ने की इच्छा रखने वाले भारतीय विद्यार्थियों के वीजा आवेदन की संख्या में 2015 में 202 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी दौरान भारत में अमेरिकी पर्यटकों की संख्या में भी करीब 100 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है।ब्योरे में कहा गया है कि भारतीय प्रवासियों ने अमेरिकी समाज के प्रत्येक पहलू में महत्वपूर्ण योगदान किया है।