पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिये हैं जोकि रूपनगर, पठानकोट और होश्यिारपुर जिलों के कंडी क्षेत्रों में से पंजाब लैंड पैरीफेरी एक्ट (पी एल पी ए ) से बाहर के क्षेत्रों में से बज़री की खुदाई की संभावना तलाशेगी। उनके द्वारा यह कदम राज्य के लोगों को रेत एवं बज़री वाजिब कीमतों पर उपलब्ध करवाने हेतू उठाया गया है।
राज्य में रेत एवं बज़री की सप्लाई को लाइन पर लाने संबंधी एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुये उपमुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को सब-डिवीज़नल मैजिस्ट्रेटों अधीन संबंधित जिलों में अधिकारियों की कमेटियां कायम करने के निर्देश दिये जोकि उन्हें नये संभावी क्षेत्रों की तलाश करेंगी जहां रेत एवं बज़री उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि इन कमेटियों को पी एल पी ए से बाहर के कंडी क्षेत्रों की तरफ ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि इन खनिज पदार्थो की उपलब्धता यकीनी बनाई जा सके।
बादल ने सिंचाई और उद्योग विभाग को डरैजरों की मदद से सतलुज और व्यास नदियों के किनारों से रेत की खुदाई की संभावना की तलाश करने के लिए भी कहा ताकि रेत की भारी मांग को पूरा किया जा सके। उन्होंने माइनिंग विभाग को सिंचाई विभाग को नदियों और नहरों की डरैजिंग के दौरान नये डिस्पोज़ल परमिट जारी करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्धेश्य आम लोगों की सुविधा के लिए रेत की कीमत को 600-650 प्रति सैंकड़ा क्यूबिक फुट के दरमियान रखना है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में की रोज़ाना मांग लगभग 58000 टन है।पंजाब से पड़ौसी राज्यों में रेत एवं बज़री ले जाये जाने का कठोर नोटिस लेते हुये स. बादल ने अधिकारियों को पंजाब से अन्य राज्यों में रेत एवं बज़री लेजाने वाले वाहनों पर भारी कर लगाने के लिए कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि रेत एवं बज़री के खनन में तेजी लाई जाये ताकि बाज़ार में इन वस्तुओं की सप्लाई यकीनी बनाई जा सके जोकि कीमत घटाने के पक्ष से एक अह्म भूमिका निभायेगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वह लोगों को माइनिंग का समान उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया पर निजी तौर पर नज़र रखेंगे और कुछ सप्ताह बाद स्थिति की समीक्षा करेंगे। उन्होंने उद्योग एवं माइनिंग विभाग के अधिकारियों को 20 सितंबर तक 80 खानों की पुन: बोली करवाने के लिए और वाजि़ब दरों पर रेत एवं बज़री लोगों को मुहैया करवाने के लिए कम कीमतें तय करने के निर्देश भी दिये। बैठक के दौरान यह भी ध्यान में लाया गया कि यह खानें प्रत्येक वर्ष 90 लाख टन रेत मुहैया करवायेंगी और इस प्रकार राज्य में मांग एवं आपूर्ति का सिलसिला संतुलित रूप में चलता रहेगा।माइनिंग विभाग के अधिकारियों ने इस अवसर पर बताया कि राज्य में पहले ही 70 खानें चालू हैं और 150 से अधिक खानों की वातावरण संबंधी मंजूरी के केस केंद्र सरकार को भेज दिये गये हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वातावरण मंत्रालय के पास मंजूरी मिलने के बाद इन खानों की नीलामी की प्रक्रिया भी शीघ्र ही अमल में लाई जायेगी। बैठक में अन्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सरवेश कौशल, प्रधान सचिव उद्योग श्री अनिरूद्ध तिवाड़ी, उपमुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री पी एस औजला, उपमुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री जंगवीर सिंह, सचिव सिंचाई श्री काहन सिंह पन्नू, पी एस आई सी के एम डी अमित ढाका भी उपस्थित थे।