मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में कार्यान्वित की जा रही सभी जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण कार्य निर्धारित समयावधि में पूरा किया जाएगा ताकि लागत क्षमता को बढ़ने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति इन परियोजनाओं के कार्यों की प्रगति का निरीक्षण एवं अनुश्रवण करेगी और एकल खिड़की में बिना किसी देरी के विभिन्न स्वीकृतियां प्राप्त करने में सहायता करेगी। वीरभद्र सिंह आज यहां बहुद्देशीय ऊर्जा एवं गैर पारम्परिक ऊर्जा स्रोत विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने सभी पांच प्रमुख नदी तटों पर पुराने 23000 मेगावाट जल विद्युत क्षमता के मुकाबले बढ़ी हुई 27433 मेगावाट की संशोधित अनुमानित क्षमता पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल ही के सर्वेक्षण में सतलुज तट में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज हुई है, जो पिछले 10391 मेगावाट के मुकाबले 13331 मेगावाट है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वित्त वर्ष में 2200 मेगावाट की विभिन्न परियोजनाओं का कार्य पूरा कर उन्हें आरम्भ किया जाएगा, जिनकी क्षमता गत पांच वर्षों में आरम्भ की गई परियोजनाओं से कहीं अधिक होगी। 520 मेगावाट की पार्वती परियोजना का कार्य लगभग पूरा होने वाला है, जबकि 150 मेगावाट की सुरंग परियोजना अगले माह बनकर तैयार हो जाएगी। 24 मेगावाट की कूट परियोजना का कार्य जून, 2013, 800 मेगावाट की कौल बांध परियोजना अक्तूबर, 2013, 412 मेगावाट की रामपुर परियोजना का कार्य सितम्बर, 2013, 65 मेगावाट की कशांग-एक परियोजना अक्तूबर, 2013, 25 मेगावाट की लामादुग मार्च, 2014, 10 मेगावाट की घानवी-11 जून, 2013, 16 मेगावाट की जोगणी, 8 मेगावाट की कुर्मी तथा 9 मेगावाट की राला परियोजना का कार्य अक्तूबर, 2013 में पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि 6 मेगावाट में बनेड़-11, 6 मेगावाट की तांगणू रोमी-11 तथा 24 मेगावाट की बड़ा गांव परियोजना दिसम्बर, 2013 में पूर्ण होगी। इसी प्रकार 9 मेगावाट की फूजल, 9 मेगावाट के ब्रूआ तथा 14 मेगावाट की नांटी परियोजना मार्च, 2014 में बन कर तैयार हो जाएगी। वीरभद्र सिंह ने कहा कि 15 मेगावाट की न्यूगल जल विद्युत परियोजना ने 22 अप्रैल, 2013 को कार्य करना आरम्भ कर दिया है। पांच मेगावाट से कम क्षमता की 13 परियोजनाएं, जिनकी कुल क्षमता 35.90 मेगावाट है, को वर्ष 2013-14 में हिमऊर्जा द्वारा आरम्भ कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से आरम्भ के 12 वर्षों के लिए लगभग 213 करोड़ रुपये (12 प्रतिशत नि:शुल्क बिजली दर से 2.90 रुपये प्रति यूनिट) का वार्षिक राजस्व प्राप्त होगा, जो आगामी वर्षों में बढ़ता जाएगा। इसके अतिरिक्त इस वित्त वर्ष में नि:शुल्क बिजली विक्रय से 89.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 8418 मेगावाट जल विद्युत क्षमता का दोहन किया गया है तथा 4233 मेगावाट को विभिन्न एजेंसियों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। 2982 मेगावाट की परियोजनाओं को स्वीकृति के लिए भेजा गया है, जबकि 5132 मेगावाट की संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है। सरकार की सभी एजेंसियों एवं विभागों से शीघ्र स्वीकृतियां प्राप्त करने तथा एक ही परियोजना के लिए ग्राम सभा से विभिन्न अनापत्ति प्रमाण पत्र को रोकने के दृष्टिगत ऊर्जा निदेशालय द्वारा जल विद्युत नीति-2006 की जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री ने राज्य के लिए सौर नीति को अंतिम रूप देने के कार्य तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी नदी तटों पर बढ़ता हुआ पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययन (सीईआईए) का कार्य प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सतलुज तट का अध्ययन कार्य भी पूरा करने के निर्देश दिए, जो अग्रिम चरण में है। उन्होंने चुनाव तट के कार्य में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ब्यास तट के लिए टमर्ज ऑफ रिफरेंसिज को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को स्वीकृति के लिए भेजा गया है, जबकि रावी एवं यमुना नदी तटों के टमर्ज ऑफ रिफरेंसिज तैयार किए जा रहे हैं। श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि जलविद्युत परियोजनाओं की सुरक्षा एवं गुणवत्ता नियंत्रण प्राधिकरण ऊर्जा निदेशालय में स्थापित किया जाएगा ताकि 40 वर्षों के लिए जब तक परियोजना हिमाचल प्रदेश सरकार को सौंपी नहीं जाती है तक सुरक्षा एवं निर्माण की गुणवत्ता का अनुश्रवण सुनिश्चित बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि ऊर्जा निदेशालय को ‘राज्य नामित एजेंसी’ (एसडीए) के तौर पर पदनामित किया जाएगा तथा राज्य ऊर्जा संवर्द्धन कोष सृजित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को ऊर्जा संवर्द्धन सहित विभिन्न मामलों पर उपभोक्ताओं के जागरूकता स्तर को जांचने के लिए सर्वेक्षण करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ऊर्जा निगम लिमिटेड द्वारा 3026 मेगावाट क्षमता की 20 परियोजनाओं का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इनमें से 856 मेगावाट की पांच परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, 1235 मेगावाट की आठ परियोजनाएं विचाराधीन हैं जबकि 935 मेगावाट की सात परियोजनाओं का कार्य पूर्व व्यवहारिक अध्ययन स्तर पर है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में घरेलु उपभोक्ताओं को उपदान दरों पर बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है जो पड़ोसी राज्यों के मुकाबले सबसे कम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 132 उप-मण्डलों में कंप्यूटरीकृत बिलिंग की जा रही है और सभी लोक मित्र केंद्रों में यह सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों में हर समय क्योस्क के माध्यम से बिलों की अदायगी की सुविधा प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए आनलाईन बिल अदायगी सुविधा आरम्भ की गई है।
प्रधान सचिव ऊर्जा एवं कार्मिक श्री एस.के.बी.एस. नेगी ने कहा कि प्रत्येक परियोजना पर नजर रखने के लिए वेब आधारित अनुश्रवण प्रणाली की जांच की जा रही है, जिसे शीघ्र ही आरम्भ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 935 मेगावाट की कुल नि:शुल्क ऊर्जा के अधिकार में से 109 मेगावाट का उपयोग हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा आपसी सहमति की दरों पर किया जा रहा है। ग्रीष्म एवं मॉनसून माह के दौरान ऊर्जा निदेशालय द्वारा 823 मेगावाट नि:शुल्क ऊर्जा का विक्रय किया जा रहा है, जबकि सर्दियों के दौरान आवश्यकता के अनुसार इतनी ही ऊर्जा राज्य विद्युत बोर्ड को उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012-13 के दौरान बिजली विक्रय से 700 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया गया।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के मुख्य प्रबन्ध निदेशक श्री आर.डी. धीमान ने कहा कि राज्य में 477.45 मेगावाट की स्थापित क्षमता के 21 ऊर्जा उत्पादन केन्द्र हैं। प्रदेश के सभी 77483 गांवों का विद्युतीकरण किया गया है, जिसके 2084152 उपभोक्ता हैं। उन्होंने कहा कि 1765293 घरेलू, 231567 व्यावसायिक तथा 21559 गैर घरेलू एवं गैर व्यावसायिक उपभोक्ता हैं। प्रदेश में केवल 1.7 प्रतिशत औद्योगिक उपभोक्ता हैं, जो 62.13 प्रतिशत ऊर्जा की खपत करते हैं। इनमें 2.83 प्रतिशत लघु एवं मध्यम उद्योग भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू उपभोक्ता कुल उपभोक्ताओं का 85 प्रतिशत हैं, जो 20.3 प्रतिशत ऊर्जा की खपत करते हैं, जबकि 12 प्रतिशत व्यावसायिक उपभोक्ता 6 प्रतिशत ऊर्जा तथा सरकारी सिंचाई एवं जल विद्युत योजनाओं से 6 प्रतिशत ऊर्जा की खपत की जा रही है। मुख्य सचिव श्री एस. रॉय, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री टी.जी.नेगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री वी.सी. फारका, प्रधान सचिव प्रशासनिक सुधार श्री संजय गुप्ता, सचिव वित्त श्री मनीष गर्ग, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक श्री डी.के. शर्मा तथा अन्य अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।