पूर्व शिक्षा मंत्री और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव विधायक परगट सिंह, पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु और पूर्व विधायक कुशलदीप सिंह किक्की ढिल्लों ने नीट-यूजी पेपर लीक की तरह ही पंजाब में 454 फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा में सामने आए कथित नकल घोटाले को लेकर चंडीगढ़ में आज अहम प्रेसवार्ता की। जिसमें उन्होंने पंजाब सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह का इस्तीफा मांगा और इस मामले में उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने हजारों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई जवाबदेही तय नहीं की गई। यहां तक की इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने एक स्टेटमैंट तक नहीं दी। इस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली की टीम तक चुप्पी साधे बैठे हैं। जबकि नीट मामले में दिल्ली में पूरी तरह राजनीति कर रहे हैं।
परगट सिंह ने कहा कि 454 फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा में जिस तरह नकल गिरोह सक्रिय होने, ब्लूटूथ डिवाइस के इस्तेमाल, परीक्षा केंद्रों पर सिग्नल जैमर नहीं लगाए जाने और नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की एफआईआर में भी कई महत्वपूर्ण तथ्य दर्ज हैं, जिससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता और बढ़ जाती है। क्योंकि यह सभी बिना सरकार की शामूलियत के संभव नहीं है। स्पीकर कुलतार सिंह संधवा और उनके मौजूदा विधायक की नाक तले ही यह घोटाला कराया गया है।
पूर्व शिक्षा मंत्री ने फरीदकोट में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में हुए इस नकल घोटाले की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी योजना के साथ घोटाला किया गया है। जिसमें स्पीकर संधवा और मौजूदा विधायक पूरी तरह से शामिल हैं। उन्होंने ही इस नकल घोटाले में प्रिंसीपल दीपक को काम सौंपा। प्रिंसीपल दीपक ने सेंटर में अपने ही सारे रिश्तेदारों बहन, जीजा, भाभी और अन्य की ड्यूटी लगाई। जिसके उनके पास सारे सबूत हैं। इन्होंने किस तरह से परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित किया और अपने कुछ कैंडीडेट्स को पास कराया।
परगट सिंह ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्रों के चयन, ड्यूटी लगाने और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।उन्होंने कहा कि सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि पूरे मामले में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया।
यदि मेडिकल शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया में इतना बड़ा विवाद सामने आया है तो संबंधित मंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी प्रकार शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस भी शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रहे विवादों और शिक्षकों की समस्याओं पर मौन हैं।उन्होंने अमृतसर के खालसा कॉलेज के प्रोफेसर की आत्महत्या से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षकों और शिक्षाविदों में भी असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रोफेसर को प्रताड़ना के कारण इस तरह के कदम उठाने पड़ रहे हैं या सरकार को प्रोफेसर्स की तरफ से पत्र लिखकर मानसिक दबाव की बात करनी पड़ रही है, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इस मामले में भी डॉ. बलबीर सिंह पूरी तरह से चुप हैं और कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। परगट सिंह ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य का प्रश्न मानती है।
उन्होंने कहा कि नीट-यूजी पेपर लीक से देशभर के लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं और पंजाब में 454 फार्मासिस्ट भर्ती घोटाले ने राज्य के हजारों युवाओं का विश्वास भी तोड़ा है। दोषियों को बचाने के बजाय उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए, नकल माफिया और उन्हें संरक्षण देने वाले सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।