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मिशन वात्सल्य : बाल कल्याण सेवाओं को मिलेगी और मजबूती

हरियाणा के बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले पात्र बच्चों को मिलेगा आयुष्मान भारत योजना का लाभ

Anurag Rastogi, Chief Secretary Haryana, Haryana, Haryana Administration, Haryana News, Latest Haryana News
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चंडीगढ़ , 22 Jul 2026

Last updated on: Jul 23, 2026, 11:12 IST

हरियाणा सरकार ने मिशन वात्सल्य के तहत बाल संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों को मंजूरी दी है। इसके अलावा, बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले पात्र बच्चों को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने का भी निर्णय लिया है।मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

बैठक में बच्चों के समग्र संरक्षण, देखभाल और पुनर्वास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विशेष स्वास्थ्य सेवाओं, ब्रिज एजुकेशन, कौशल विकास प्रशिक्षण, दत्तक ग्रहण सेवाओं, खेल गतिविधियों, कानूनी सहायता, संस्थागत आधारभूत संरचना तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय से संबंधित विभिन्न उपायों की भी समीक्षा कर उन्हें मंजूरी दी गई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि मिशन वात्सल्य राज्य में ऐसा व्यापक बाल संरक्षण तंत्र विकसित कर रहा है, जो देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा कानून से संघर्षरत बच्चों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, परामर्श, पुनर्वास, कानूनी सहायता और सामाजिक पुनर्स्थापन जैसी सेवाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए बाल कल्याण सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

समिति ने यह भी निर्णय लिया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत सभी बाल देखभाल संस्थानों में हर तिमाही विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें दंत रोग, ईएनटी, त्वचा रोग तथा अन्य विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों सहित सभी बच्चों के दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए मेडिकल एग्जामिनेशन रिपोर्ट (एमईआर) समयबद्ध रूप से तैयार करने के निर्देश दिए गए।

समिति ने दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को गति देने के लिए पुलिस विभाग द्वारा नॉन-क्लेमेंट सर्टिफिकेट (एनसीसी) समय पर जारी करने तथा मिशन वात्सल्य पोर्टल पर बच्चों से संबंधित सूचनाओं को नियमित रूप से अद्यतन करने पर भी बल दिया।समिति ने ऑब्जर्वेशन होम, स्पेशल होम और प्लेस ऑफ सेफ्टी में ब्रिज एजुकेशन को मजबूत करने तथा योग्य शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी समीक्षा की। 

साथ ही बच्चों को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान करने और भविष्य में आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संस्थागत देखभाल में रह रहे बच्चों के लिए सीसीटीवी मरम्मत और सिलाई प्रशिक्षण जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

बैठक में राज्य के सभी बाल देखभाल संस्थानों में मनोवैज्ञानिक सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, हरियाणा के सहयोग से मनोवैज्ञानिकों की तैनाती के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। समिति ने विशेष किशोर पुलिस इकाइयों (एसजेपीयू) के कार्यों की समीक्षा करते हुए प्रशिक्षित बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा अन्य जिलों एवं राज्यों से संबंधित बच्चों के परिवारों का पता लगाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। 

इसके अलावा, गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस तथा अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि बाल संरक्षण संबंधी कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों के पुनर्वास और सकारात्मक विकास को बढ़ावा देने के लिए नियमित एवं संरचित खेल और शारीरिक गतिविधियों के आयोजन पर भी बल दिया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना, शारीरिक फिटनेस, अनुशासन, टीम भावना तथा भावनात्मक संतुलन को प्रोत्साहित करना है।

बैठक में हिसार में विकसित किए जा रहे एकीकृत बाल देखभाल परिसर की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस परिसर में 50-50 बच्चों की क्षमता वाले ऑब्जर्वेशन होम, स्पेशल होम तथा प्लेस ऑफ सेफ्टी स्थापित किए जा रहे हैं। समिति ने नए परिसर और वर्तमान संस्थानों में आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विचार किया, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल मिल सके।

बैठक में कानून से संघर्षरत बच्चों के लिए निःशुल्क कानूनी सहायता को और सुदृढ़ करने तथा पॉक्सो मामलों की प्रभावी निगरानी और समयबद्ध कानूनी सहायता सुनिश्चित करने के लिए अभियोजन विभाग एवं जिला बाल संरक्षण इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री शेखर विद्यार्थी ने बताया कि मिशन वात्सल्य के तहत प्रदेश में मजबूत संस्थागत ढांचा विकसित किया गया है। 

राज्य में वर्तमान में 22 बाल कल्याण समितियां, 22 किशोर न्याय बोर्ड, देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए 56 बाल देखभाल संस्थान तथा कानून से संघर्षरत बच्चों के लिए 7 संस्थान संचालित किए जा रहे हैं। जून 2026 तक मिशन वात्सल्य एवं पॉक्सो अधिनियम के संबंध में 641 जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया, जिनसे 37,136 बच्चों को बाल अधिकारों, कानूनी सुरक्षा, ऑनलाइन सुरक्षा और दुर्व्यवहार की रोकथाम संबंधी जानकारी प्रदान की गई।

महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक डॉ. प्रियंका सोनी ने राज्य सरकार की प्रमुख बाल कल्याण योजनाओं की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि हरिहर नीति के तहत परित्यक्त एवं समर्पित बच्चों को वयस्क होने के बाद रोजगार, शिक्षा एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के माध्यम से कोविड-19 महामारी के दौरान अपने माता-पिता अथवा अभिभावकों को खोने वाले बच्चों को निरंतर सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि हरियाणा सरकार बच्चों के लिए संवेदनशील, समावेशी और उत्तरदायी संरक्षण प्रणाली विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, परामर्श, कानूनी सहायता, कौशल विकास और संस्थागत आधारभूत संरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक अवसर उपलब्ध हो सकें।

 

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