स्थान: विश्व परिवहन अनुसंधान सम्मेलन (WCTR 2026), 6–10 जुलाई 2026, टूलूज़, फ्रांस। आयोजन: वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रांसपोर्ट रिसर्च सोसाइटी (WCTRS) द्वारा टूलूज़ स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (TSE) एवं टूलूज़ कैपिटोल यूनिवर्सिटी, फ्रांस के सहयोग से।
शोध-पत्र: Development of Rural Accessibility Model for Terrain-Sensitive Settlements: A GIS–AHP Framework with Participatory Calibration (पेपर आईडी: A82796AB)
प्रस्तुतकर्ता: डॉ. बी. आदिनारायण, सहायक प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़।
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ ने फ्रांस के टूलूज़ में आयोजित प्रतिष्ठित विश्व परिवहन अनुसंधान सम्मेलन (WCTR 2026) में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। डॉ. बी. आदिनारायण ने पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण बसावटों के लिए विकसित भू-भाग संवेदनशील ग्रामीण पहुंच (Accessibility) मॉडल पर अपना शोध प्रस्तुत किया।
इस तकनीकी सत्र में लगभग 60 अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, परिवहन विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रस्तुति के दौरान शोध पर व्यापक तकनीकी चर्चा हुई तथा विश्व के अग्रणी परिवहन विशेषज्ञों के साथ सार्थक संवाद स्थापित हुआ।
इस सम्मेलन में लगभग 140 देशों के परिवहन शोधकर्ता, नीति-निर्माता, शिक्षाविद, उद्योग विशेषज्ञ एवं व्यावसायिक प्रतिनिधि शामिल हुए। यह सम्मेलन वैश्विक ज्ञान आदान-प्रदान, वैज्ञानिक सहयोग एवं परिवहन अनुसंधान के क्षेत्र में नेटवर्किंग का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
यह सम्मेलन वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रांसपोर्ट रिसर्च सोसाइटी (WCTRS) द्वारा टूलूज़ स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (TSE) तथा टूलूज़ कैपिटोल यूनिवर्सिटी के सहयोग से आयोजित किया गया। इस शोध में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), एनालिटिक हाइरार्की प्रोसेस (AHP), मशीन लर्निंग, रिमोट सेंसिंग तथा हितधारकों की सहभागिता को एकीकृत कर ग्रामीण पहुंच का एक नवीन मॉडल विकसित किया गया, जो न्यायसंगत एवं सतत आधारभूत संरचना नियोजन में सहायक है।
इस मॉडल का उपयोग मेघालय के पश्चिम गारो हिल्स जिले की 1,176 ग्रामीण बस्तियों तथा लगभग 5.01 लाख की आबादी पर किया गया। शोध पद्धति में भू-भाग आधारित यात्रा अवरोध मॉडलिंग, डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM), सड़क नेटवर्क विश्लेषण, कॉस्ट-डिस्टेंस मॉडलिंग, Sentinel-2 उपग्रह चित्र, Random Forest आधारित बस्ती पहचान तथा हितधारकों द्वारा निर्धारित AHP भारांक का उपयोग किया गया।
मुख्य उपलब्धियां
पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नवीन GIS–AHP आधारित पहुंच मूल्यांकन मॉडल विकसित किया।
मशीन लर्निंग एवं रिमोट सेंसिंग के माध्यम से 89.7% सटीकता के साथ बस्तियों का वर्गीकरण किया।
Accessibility Index का मान 0.130 से 0.642 के बीच पाया गया, जिससे लगभग पांच गुना असमानता का पता चला।
57.7% ग्रामीण बस्तियां निम्न या अत्यंत निम्न पहुंच श्रेणी में पाई गईं।
जिले की आधे से अधिक आबादी को आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं तक पर्याप्त पहुंच उपलब्ध नहीं है।
सबसे कम पहुंच वाली 81% बस्तियां 600 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित हैं।
अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि केवल सड़क संपर्क आधारित सूचकांक वास्तविक पहुंच का सही आकलन नहीं करते तथा यात्रा-समय आधारित पहुंच मूल्यांकन अधिक प्रभावी है।
शोध में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर ग्रामीण पहुंच का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया, जिससे पता चला कि पश्चिम गारो हिल्स वैश्विक औसत से नीचे है।
यह शोध संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) विशेष रूप से SDG-9 (उद्योग, नवाचार एवं आधारभूत संरचना) तथा SDG-11 (सतत शहर एवं समुदाय) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह मॉडल नीति-निर्माताओं, परिवहन योजनाकारों, सरकारी एजेंसियों एवं विकास संगठनों को कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में आधारभूत संरचना निवेश की प्राथमिकता तय करने हेतु वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।
भविष्य में इस शोध को वास्तविक समय GPS डेटा, क्राउडसोर्स्ड गतिशीलता डेटा, डिजिटल कनेक्टिविटी संकेतकों तथा मौसमी पहुंच विश्लेषण के साथ और अधिक उन्नत बनाया जाएगा। WCTR 2026 में इस शोध की प्रस्तुति ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श एवं नए वैश्विक शोध सहयोग स्थापित करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया।
यह अध्ययन दर्शाता है कि GIS, मशीन लर्निंग, रिमोट सेंसिंग तथा सहभागी निर्णय प्रक्रिया का समन्वय दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक समावेशी, टिकाऊ एवं लचीली परिवहन अवसंरचना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विश्व के प्रतिष्ठित परिवहन सम्मेलनों में इस शोध की सफल प्रस्तुति पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा तथा वैश्विक परिवहन चुनौतियों के समाधान हेतु उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।