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डॉ. जितेन्द्र सिंह ने राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए विज्ञान मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की

भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों पर एकीकृत संचार रणनीति के माध्यम से विज्ञान मंत्रालय जनसंपर्क का विस्तार करेंगे

Dr Jitendra Singh, Bharatiya Janata Party, BJP, New Delhi
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नई दिल्ली , 12 Jul 2026

Last updated on: Jul 13, 2026, 13:47 IST

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग में राज्यमंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत सरकार के विज्ञान मंत्रालय और विभिन्न विभागों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

उन्होंने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को तेजी से पूरा करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहज समन्वय का आह्वान किया। 10 से 19 सितंबर 2026 तक होने वाले 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' राष्ट्रव्यापी तटीय स्वच्छता अभियान की तैयारियों के बीच, माननीय मंत्री श्री सिंह ने जोर दिया कि वैज्ञानिक संस्थानों को अधिकतम राष्ट्रीय प्रभाव के लिए तकनीकी नवाचार, जन-भागीदारी और अंतर-विभागीय सहयोग को जोड़ने हेतु घनिष्ठ साझेदारी के साथ काम करना चाहिए।

नई दिल्ली के सीएसआईआर-विज्ञान केन्द्र में आयोजित इस बैठक में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद; विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग(डीएसटी) के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे; जैव प्रौद्योगिकी विभाग(डीबीटी) के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले; वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग(डीएसआईआर) तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय(एमओईएस) की सचिव डॉ. एन. कलाईसेल्वी के साथ-साथ संबंधित वैज्ञानिक विभागों और संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पिछले समन्वय बैठक के दौरान लिए गए निर्णयों पर 'कार्रवाई रिपोर्ट' की समीक्षा करते हुए, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने जोर दिया कि वैज्ञानिक विभागों को अलग-थलग संस्थानों के बजाय एक एकीकृत इकोसिस्टम के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालयों के बीच नियमित बातचीत, जानकारी साझा करने, संयुक्त पहलों और समन्वित कार्यान्वयन से नवाचार में तेजी आएगी, शासन में सुधार होगा और यह सुनिश्चित होगा कि वैज्ञानिक उपलब्धियों का सीधा लाभ आम-नागरिकों को मिले।

बैठक का एक प्रमुख विषय 10 से 19 सितंबर 2026 तक देश के समुद्री तटों पर आयोजित होने वाले 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' अभियान की तैयारियां थी। मंत्री श्री सिंह ने इस राष्ट्रव्यापी पहल की जन-जागरूकता रणनीति तथा तैयारियों पर चर्चा की। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़ना है।

इस अभियान के माध्यम से वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, स्वयंसेवकों, शैक्षणिक संस्थानों तथा स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाकर देश के सबसे बड़े तटीय स्वच्छता अभियानों में से एक का सफल आयोजन करना है। बैठक में विभिन्न विज्ञान मंत्रालयों की संचार रणनीति की भी समीक्षा की गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पिछले बारह वर्षों, विशेषकर वर्तमान सरकार के पिछले दो वर्षों की उपलब्धियां व्यापक तौर पर सभी तक पहुंचे।

विभागों ने वीडियो, वृत्तचित्रों, विषयगत अभियानों, इन्फोग्राफिक्स, सफलता की कहानियों और भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमताओं को प्रदर्शित करने वाली जन भागीदारी पहलों के माध्यम से डिजिटल जनजागरूकता को मजबूत करने की योजनाएं साझा की गई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग(डीएसटी) ने अपनी जनसंपर्क योजना प्रस्तुत की, जिसमें अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन(एएनआरएफ), राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, अंतरविषयी साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन, अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना(आरडीआई योजना) तथा अन्य प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसी प्रमुख पहलों को शामिल किया गया है।

भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता बढ़ाने तथा जनसहभागिता को निरंतर बनाए रखने के उद्देश्य से एक चरणबद्ध प्रसार रणनीति तैयार की गई है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग(डीएसआईआर) ने जानकारी दी कि सीएसआईआर पिछले बारह वर्षों की अपनी प्रमुख उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण करने वाला एक व्यापक प्रकाशन तैयार कर रहा है, जिसे इस वर्ष के अंत में सीएसआईआर स्थापना दिवस के अवसर पर जारी किया जाएगा।

डिजिटल मंचों के माध्यम से सफलता की कहानियों का नियमित प्रसार तथा जारी "इनोवेशन इन एक्शन" व्याख्यान श्रृंखला से वैज्ञानिक संस्थानों के बीच आपसी सहयोग और संवाद को और सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ भारत के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को व्यापक स्तर पर लोगों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में सहायता मिलने की अपेक्षा है।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने साझा किया कि उसने सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव-अर्थव्यवस्था, जीनोमिक्स, कृषि जैव प्रौद्योगिकी, अनुसंधान अवसंरचना, जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप और सतत विकास में अपने योगदान को प्रदर्शित करने वाली विषयगत प्रकाशनों की एक श्रृंखला शुरू की है। विभाग इंटरैक्टिव जानकारी-आधारित गतिविधियों के माध्यम से वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रव्यापी #DBTQuest जन भागीदारी अभियान भी चला रहा है, साथ ही समन्वित सोशल मीडिया पहलों के माध्यम से अपनी पहुंच का विस्तार कर रहा है।

बैठक में विज्ञान विभागों के बीच अंतर-मंत्रालयी सहयोग को और अधिक बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। इस दौरान सीएसआईआर, इसरो, डीएसटी, डीबीटी, बार्क तथा अन्य वैज्ञानिक संगठनों से जुड़े सहयोगात्मक कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा हुई। इनमें प्रौद्योगिकी विकास साझेदारियां, जैव-चिकित्सा अनुसंधान पहल, नवाचार मंच तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए समन्वित कार्यक्रम शामिल थे।

विभिन्न विभागों ने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के बीच नियमित संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अपनाए गए तंत्रों की जानकारी भी साझा की, ताकि विभिन्न क्षेत्रों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। बैठक में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन(एएनआरएफ) के अंतर्गत हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई।

चर्चा के दौरान SARAL_AI प्लेटफ़ॉर्म के व्यापक उपयोग, विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ताओं की बढ़ती भागीदारी तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए अनुसंधान परियोजनाओं से संबंधित जानकारी को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। विज्ञान विभागों ने एएनआरएफ द्वारा समर्थित पहलों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा उनमें अधिक-से-अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की भी जानकारी साझा की गई।

ईएसटीआईसी-2026, इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल(आईआईएसएफ) 2026, राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 तथा अन्य प्रमुख राष्ट्रीय वैज्ञानिक कार्यक्रमों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। विभिन्न विभागों ने मंत्री को इन आयोजनों के लिए संस्थागत तैयारियों, जनसंपर्क योजनाओं तथा शोधकर्ताओं, उद्योगों, स्टार्ट-अप, विद्यार्थियों और आम-जनता की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे सहयोगात्मक प्रयासों की जानकारी दी।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत का वैज्ञानिक इकोसिस्टम एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जिसमें अनुसंधान उत्कृष्टता, तकनीकी नवाचार, संस्थागत समन्वय और जन-भागीदारी को साथ-साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विभागों के बीच बढ़ता सहयोग इस बात का प्रमाण है कि सरकार विज्ञान को अधिक सुलभ, अधिक प्रभावशाली तथा देश की विकास संबंधी प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

माननीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने प्रशासनिक कार्य-निष्पादन, संस्थागत समन्वय तथा विज्ञान प्रशासकों की क्षमता-विकास से संबंधित उपायों की भी समीक्षा की। इसके साथ ही, उन्होंने विभिन्न विभागों को अपनी श्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों को साझा करने तथा पूरे वैज्ञानिक प्रतिष्ठान में सहयोगात्मक शासन को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया।

 

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