मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने गोवा के वारकरी समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के पवित्र तीर्थक्षेत्र पंढरपुर में गोवा के वारकरियों के लिए एक स्वतंत्र ‘गोवा विठ्ठल-रुक्मिणी भवन’ का निर्माण किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस भवन के निर्माण के लिए भूमि निर्धारित कर दी गई है तथा राज्य सरकार का प्रयास है कि आगामी आषाढ़ी एकादशी से पूर्व इसका निर्माण कार्य पूर्ण कर इसे वारकरी समुदाय को समर्पित किया जाए। आषाढ़ी वारी के लिए पंढरपुर रवाना हो रहे गोवा के वारकरियों को शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उनकी आस्था, परंपराओं और धार्मिक भावनाओं का सदैव सम्मान करती रही है तथा भविष्य में भी हरसंभव सहयोग प्रदान करती रहेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. सावंत ने कहा कि गोवा से प्रत्येक वर्ष हजारों श्रद्धालु और वारकरी भगवान विठ्ठल एवं माता रुक्मिणी के दर्शन तथा आषाढ़ी वारी में भाग लेने के लिए पंढरपुर की यात्रा करते हैं। वर्षों से वारकरी समुदाय की यह मांग रही है कि पंढरपुर में उनके लिए स्थायी आवास एवं विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि लंबी यात्रा के दौरान उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पिछले वर्ष ‘गोवा विठ्ठल-रुक्मिणी भवन’ के निर्माण की घोषणा की थी। अब उस घोषणा को मूर्त रूप देते हुए भवन के लिए भूमि निर्धारित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस भवन के निर्माण से गोवा के वारकरियों को सुरक्षित, सुसज्जित, स्वच्छ एवं सम्मानजनक आवास की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे उनकी तीर्थयात्रा अधिक सुविधाजनक और सुखद बनेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार ने गोवा की पंजीकृत वारकरी दिंडियों के लिए यात्रा संबंधी आर्थिक सहायता की व्यवस्था प्रारंभ की है। उन्होंने बताया कि गोवा सरकार के कला एवं संस्कृति निदेशालय के माध्यम से 36 पंजीकृत वारकरी दिंडियों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। दिंडी में सम्मिलित वारकरियों की संख्या के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की सहायता राशि सीधे संबंधित पंजीकृत दिंडियों को वितरित की जाएगी। इस सहायता का उद्देश्य वारकरियों के यात्रा व्यय को कम करना तथा उन्हें अधिक सुविधाजनक एवं सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 40 वारकरियों वाली पंजीकृत दिंडियों को पंढरपुर से गोवा लौटने के लिए बस यात्रा हेतु आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त यात्रा के दौरान अन्य आवश्यक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँगी, ताकि वारकरियों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि वारकरी समुदाय की धार्मिक यात्रा को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना है।
मुख्यमंत्री डॉ. सावंत ने जानकारी दी कि इस पहल के अंतर्गत लगभग 3,500 वारकरियों का पंजीकरण किया गया है। पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक-मुक्त वारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सभी पंजीकृत वारकरियों को कपड़े के थैले उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही पारंपरिक वारकरी वेशभूषा, आवश्यक दवाओं से युक्त मेडिकल किट तथा वारी मार्ग पर निर्धारित स्थानों पर चिकित्सा सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है। इन प्रयासों से वारकरियों की यात्रा अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक, स्वास्थ्य-सुरक्षित तथा पर्यावरण-अनुकूल बनेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘गोवा विठ्ठल-रुक्मिणी भवन’ के निर्माण तथा वारकरी दिंडियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने जैसी पहलें गोवा के वारकरी समुदाय के लिए लंबे समय तक लाभकारी सिद्ध होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सुदृढ़ करने तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं में निरंतर वृद्धि करने के लिए ऐसे जनहितकारी निर्णय लेती रहेगी। मुख्यमंत्री ने सभी वारकरियों को आषाढ़ी वारी की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए उनकी मंगलमय, सुरक्षित एवं सफल यात्रा की कामना की।