Wednesday, 22 July 2026

 

 

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जगत प्रकाश नड्डा ने आईएलबीएस के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

"स्वस्थ भारत के माध्यम से ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है" : जगत प्रकाश नड्डा

Jagat Prakash Nadda, JP Nadda, BJP, Bharatiya Janata Party, Institute of Liver and Biliary Sciences, ILBS, New Delhi
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Armaan

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नई दिल्ली , 30 Jun 2026

Last updated on: Jun 30, 2026, 17:16 IST

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। श्री जगत प्रकाश नड्डा ने संस्थान से उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों को संबोधित करते हुए दीक्षांत समारोह को उनकी शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

उन्होंने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस) जैसे विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त और प्रतिष्ठित संस्थान से डिग्री प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है जिसे रोगी देखभाल, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता के लिए विशिष्टता हासिल है। श्री नड्डा ने लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्थान के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि आईएलबीएस देश भर के घर-परिवारों में फैटी लिवर रोग के बारे में जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

संस्थान ने अपनी अग्रणी नैदानिक ​​सेवाओं, अनुसंधान और जन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से फैटी लिवर रोग, इसके जोखिम से संबंधित कारकों, रोकथाम और स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभावों की समझ को काफी हद तक बढ़ाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ने चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने के लिए इसके "हार्डवेयर" और "सॉफ्टवेयर" दोनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है।

उन्होंने इस दृष्टिकोण की व्याख्या करते हुए कहा कि "हार्डवेयर" में जहां विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा, चिकित्सा संस्थान और स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं वहीं "सॉफ्टवेयर" में कामकाज के अनुकूल वह विशेष परिवेश, नीतिगत ढांचा और शैक्षणिक वातावरण शामिल है जो छात्रों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों को उत्कृष्टता प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।

उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र की स्वास्थ्य प्रणाली की वास्तविक शक्ति केवल संस्थानों के निर्माण में नहीं बल्कि एक ऐसे अनुकूल परिवेश के निर्माण में निहित है जहां उत्कृष्टता फल-फूल सके। श्री नड्डा ने नीतिगत सुधारों के परिवर्तनकारी प्रभाव पर बल देते हुए कहा कि छात्रों को यह समझना चाहिए कि दूरदर्शी नीति निर्माण और सहायक वातावरण मिलकर किस प्रकार से स्थायी परिवर्तन लाते हैं।

उन्होंने बताया कि बीसवीं शताब्दी के अंत में भारत में केवल एक एम्स था। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में छह और एम्स को स्वीकृति दी गई। तब से अब तक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सोलह नए एम्स चालू हो चुके हैं। इसके साथ ही देश में एम्स की कुल संख्या तेईस हो गई है। मंत्री महोदय ने देश भर में चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे के अभूतपूर्व विस्तार का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 818 हो गई है। इसी प्रकार, चिकित्सा में स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए सीटों की संख्या लगभग 50,000 से बढ़कर 1 लाख 20 हज़ार से अधिक हो गई है। श्री नड्डा ने लाल किले से प्रधानमंत्री की घोषणा का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने आगामी पांच वर्षों में 75,000 अतिरिक्त स्नातक चिकित्सा सीटें सृजित करने का लक्ष्य रखा है और लगभग 25,000 सीटें पहले ही जोड़ी जा चुकी हैं जो इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में निरंतर प्रगति को दर्शाती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों की संख्या लगभग 30,000 से बढ़कर 80,000 से अधिक हो गई है जिससे देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। श्री नड्डा ने कहा कि लगभग 1.5 अरब लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य सेवाएं देने की प्रणाली की नींव को मजबूत करना आवश्यक है।

इस संदर्भ में उन्होंने देशभर में स्थापित 1.85 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का उल्लेख करते हुए उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने के इच्छुक नागरिकों के लिए पहला संपर्क बिंदु बताया। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों ने निवारक, संवर्धक, उपचारात्मक और पुनर्वास देखभाल पर समान बल देकर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के प्रति देश के दृष्टिकोण में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है।

मंत्री महोदय ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल के महत्व पर बल देते हुए गैर-संचारी रोगों की जनसंख्या-आधारित जांच में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 42 करोड़ से अधिक व्यक्तियों में उच्च रक्तचाप की जांच की गई है जिसके परिणामस्वरूप 7.3 करोड़ से अधिक मामलों का निदान हुआ है। इसी प्रकार, 42 करोड़ से अधिक लोगों की मधुमेह की जांच की गई है जिनमें से लगभग 5 करोड़ लोगों में इस बीमारी का पता चला है।

35 करोड़ से अधिक लोगों की मुख कैंसर के संबंध में जांच की गई है जिसके परिणामस्वरूप 2.3 लाख से अधिक मामलों का पता चला है। स्तन कैंसर की जांच में 16 करोड़ से अधिक महिलाओं को शामिल किया गया है जिसके परिणामस्वरूप 86,000 से अधिक मामलों का निदान हुआ है जबकि 9 करोड़ से अधिक महिलाओं की गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच की गई है, जिनमें से लगभग एक लाख मामलों का पता चला है।

श्री नड्डा ने कहा कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि समय पर जांच और शीघ्र निदान किस प्रकार निवारक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत कर रहे हैं और उपचार के बेहतर परिणाम संभव हो पा रहे हैं। मंत्री महोदय ने कहा कि स्वस्थ भारत के बिना विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता । उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आने वाले वर्षों में निवारक स्वास्थ्य देखभाल, प्रारंभिक जांच और समय पर निदान भारत की स्वास्थ्य रणनीति के प्रमुख स्तंभ बने रहेंगे।

श्री नड्डा ने उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि सुपर-स्पेशियलिटी शिक्षा प्राप्त करना विशेषाधिकार और उत्तरदायित्व दोनों है। उन्होंने छात्रों से समर्पित सेवा के माध्यम से समाज में अपना योगदान देने, चिकित्सा संबंधी नैतिकता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने, अपने पेशेवर जीवन में करुणा को कायम रखने और ईमानदारी और उत्कृष्टता के साथ मानवता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया।

उन्होंने छात्रों को अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिबद्धता के माध्यम से स्वस्थ और मजबूत भारत के निर्माण की जिम्मेदारी उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। दीक्षांत समारोह स्नातक छात्रों के लिए ऐतिहासिक पल था क्योंकि इस अवसर पर यकृत संबंधी रोगों, हेपेटोलॉजी, प्रत्यारोपण चिकित्सा और संबंधित क्षेत्रों में विभिन्न सुपर-स्पेशियलिटी और संबद्ध विषयों में छात्रों को डिग्री और अकादमिक विशिष्टताएं प्रदान की गईं।

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के अधीन स्वायत्त सुपर-स्पेशियलिटी संस्थान के रूप में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) ने हेपेटोलॉजी, लिवर प्रत्यारोपण, बिलियरी साइंसेज और संबद्ध विषयों में रोगी देखभाल, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है।

संस्थान ने नैदानिक ​​सेवाओं, अकादमिक उत्कृष्टता और अत्याधुनिक अनुसंधान के प्रति अपने एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से देश में बढ़ते यकृत संबंधी रोगों के बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दीक्षांत समारोह में प्रतिष्ठित संकाय सदस्य, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पेशेवर, शोधकर्ता, छात्र, पूर्व छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

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