Thursday, 23 July 2026

 

 

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रणनीतिक स्वायत्तता और भविष्य के लिए तैयार सैन्य बल के निर्माण हेतु आत्मनिर्भरता एवं संयुक्तता अनिवार्य : राजनाथ सिंह

ऑपरेशन सिंदूर नए भारत की क्षमताओं का एक निर्णायक उदाहरण है; उभरते खतरों से निपटने के लिए दूरदर्शी तैयारी आवश्यक है : संजय सेठ

Rajnath Singh, Union Defence Minister, Defence Minister of India, BJP, Bharatiya Janata Party, Sanjay Seth, New Delhi
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नई दिल्ली , 14 May 2026

Last updated on: May 14, 2026, 18:26 IST

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने रणनीतिक स्वायत्तता प्राप्त करने और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर भविष्य के लिए तैयार रहने हेतु आत्मनिर्भरता एवं संयुक्तता को अनिवार्य बताया है। उन्होंने कहा, “किसी राष्ट्र की शक्ति तेजी से इस बात पर निर्भर करेगी कि उसकी सेनाएं, प्रयोगशालाएं और रक्षा उद्योग कितनी तत्परता से एकजुट होकर सोचते व कार्य करते हैं।”

श्री राजनाथ सिंह 14 मई, 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित कलम एंड कवच 3.0 रक्षा रणनीतिक संवाद के दौरान नीति-निर्माताओं, सैन्य नेतृत्व, रक्षा उद्योग के हितधारकों, राजनयिकों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और रणनीतिक विशेषज्ञों को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में सफलता उन्हीं के हाथ लगेगी, जो किसी विचार, प्रोटोटाइप और उसके क्रियान्वयन के बीच के समयांतराल को न्यूनतम कर सकेंगे। श्री सिंह ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव, जारी संघर्षों, साइबर खतरों, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों और हाइब्रिड युद्ध के उभरते स्वरूपों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा अब पुराने अनुमानों पर आधारित नहीं रह सकती है।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमारी तैयारी, लचीलापन, नवाचार और रणनीतिक आत्मविश्वास अत्यंत आवश्यक हैं।” श्री राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भरता को केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता बताया है। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं के लिए अत्यधिक रूप से दूसरों पर निर्भर रहता है, वह संकट के समय असुरक्षित हो जाता है।

रक्षा मंत्री ने कहा, “हमें अपने राष्ट्रीय तंत्र के भीतर ही प्रमुख रक्षा प्रणालियों का डिजाइन, विकास, उत्पादन, रखरखाव और उन्नयन करना होगा। इसी के माध्यम से हम अपनी रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित कर सकेंगे।” रक्षा मंत्री ने समन्वय और संयुक्तता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक समय के युद्ध में अलगाव के लिए कोई स्थान नहीं है।

उन्होंने कहा, "सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत अपनी रक्षा सेनाओं को थल, जल, वायु, साइबर और अंतरिक्ष जैसे सभी क्षेत्रों में कितने प्रभावी ढंग से एकीकृत करता है।" श्री सिंह ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा में बढ़त इस बात से तय होगी कि प्रयोगशालाएं, उद्योग, स्टार्टअप्स, नीति-निर्माता और सैन्य संस्थान कितनी निकटता व समन्वय के साथ मिलकर कार्य करते हैं।

रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने अपने उद्घाटन संबोधन में ‘कलम एंड कवच’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ विचारों के संगम का मंच बताया। उन्होंने कहा कि कलम ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि कवच संरक्षण, लचीलापन और राष्ट्र की सुरक्षा के दायित्व का प्रतीक है।

रक्षा राज्य मंत्री ने युद्ध के तेजी से बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के सुरक्षा खतरे पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ चुके हैं, जिनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए दूरदर्शिता-आधारित तैयारी आवश्यक है। श्री संजय सेठ ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रतिपादित संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार (जेएआई) के महत्व को दोहराते हुए कहा कि ये भारत की भावी सुरक्षा संरचना के केंद्रीय स्तंभ हैं।

उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति संयुक्त सैन्य क्षमता, स्वदेशी विनिर्माण-आधारित नवाचार और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से ही संभव होगी। श्री संजय सेठ ने कहा कि भारत तकनीकी रूप से उन्नत, रणनीतिक रूप से आत्मविश्वासी और रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत है।

इस अवसर पर उपस्थित विदेशी प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि वैश्विक सुरक्षा एवं प्रगति सहयोग, विश्वास तथा साझा नवाचार के माध्यम से और अधिक सशक्त होती है। रक्षा राज्य मंत्री ने हालिया परिचालन उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को नए भारत की क्षमताओं का एक निर्णायक उदाहरण बताया।

उन्होंने स्वदेशी प्रणालियों, त्वरित प्रतिक्रिया, तकनीकी एकीकरण और रक्षा बलों के बीच निर्बाध समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। श्री सेठ ने कहा कि ऐसे अभियान आतंकवाद के प्रति राष्ट्र की शून्य-सहिष्णुता नीति और आतंकवाद का समर्थन करने वालों को जवाबदेह ठहराने के दृढ़ संकल्प को प्रतिबिंबित करते हैं। 

देश के रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से हासिल हुई प्रगति पर अपने विचार रखते हुए श्री संजय सेठ ने कहा कि रक्षा निर्यात, जो एक दशक पहले मात्र 686 करोड़ रुपये था, वह आज बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में वार्षिक रक्षा उत्पादन सर्वकालिक उच्च स्तर 1.54 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

उन्होंने 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात और 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने के सरकार के संकल्प को दोहराया। अपने विशेष संबोधन में चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीआईएससी) के अध्यक्ष के एकीकृत रक्षा कार्मिक प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारत के रणनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने में स्वदेशी नवाचार की अहम भूमिका पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा क्षमता आत्मनिर्भरता तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और निर्माण की क्षमता पर आधारित होनी चाहिए। ‘आई² के साथ जय को आगे ले जाना’ विषय पर आधारित कलम एंड कवच 3.0 सम्मेलन में भारत के विकसित होते रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नवाचार, औद्योगिक साझेदारी, क्षमता विकास और भविष्य के लिए तैयार रक्षा प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना था। रक्षा उद्योग के विभिन्न प्रतिनिधियों ने ऐसी सशक्त स्वदेशी विनिर्माण प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया, जो उत्पादन क्षमता में त्वरित वृद्धि करने, आधुनिक युद्ध संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने और भारतीय उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में सक्षम हो।

उन्होंने लचीली एवं प्रौद्योगिकी-संचालित रक्षा प्रणालियों के विकास के लिए देशों, उद्योगों, नवप्रवर्तकों एवं शिक्षाविदों के बीच सहयोग को अहम बताया तथा एयरोस्पेस और सुरक्षा नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की उभरती क्षमता को भी रेखांकित किया। इस सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय, एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्यों, सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों, रक्षा अटैच्श, वैज्ञानिकों, रक्षा उद्योग जगत के उद्यमियों, स्टार्टअप कंपनियों, शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस कार्यक्रम में कई उच्च स्तरीय सत्र, मुख्य भाषण और पैनल चर्चाएं शामिल थीं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-सक्षम युद्ध, स्वायत्त प्रणालियों, हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकियों, क्वांटम-सक्षम कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर्स, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकोनिसेंस (सी4आईएसआर), रक्षा विनिर्माण विस्तार, एयरोस्पेस प्रगति व रणनीतिक साझेदारी सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित थीं।

सम्मेलन के दौरान रक्षा क्षेत्र में नवाचार और स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय निजी उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा स्टार्टअप्स की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

 

Tags: Rajnath Singh , Union Defence Minister , Defence Minister of India , BJP , Bharatiya Janata Party , Sanjay Seth , New Delhi

 

 

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