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राजनाथ सिंह ने म्यूनिख समिट में भारत-जर्मनी डिफेंस को-डेवलपमेंट पर ज़ोर दिया

“भारत की आत्मनिर्भरता की खोज अंतर्मुखी नहीं है, हम इसे विश्वसनीय साझेदारों के साथ डिजाइन, विकास और उत्पादन करने की क्षमता के रूप में देखते हैं

Rajnath Singh, BJP, Bharatiya Janata Party, Defence Investor Summit, Munich
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म्यूनिख , 23 Apr 2026

Last updated on: Apr 24, 2026, 09:53 IST

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी के उद्योग जगत को विशेष रूप से विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर विकास और उत्पादन करने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने विश्वसनीयता और साझा हितों पर आधारित साझेदारियों की आवश्यकता पर बल दिया और भू-राजनीतिक समीकरणों में मौजूदा बदलावों, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, तीव्र तकनीकी परिवर्तन और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के मद्देनजर इन्हें अपरिहार्य बताया।

श्री राजनाथ सिंह 23 अप्रैल, 2026 को म्यूनिख में आयोजित रक्षा निवेशक शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय और जर्मन रक्षा उद्योग के दिग्गजों को संबोधित कर रहे थे। यह यूरोपीय राष्ट्र की उनकी पहली यात्रा का अंतिम दिन था। रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्र और उद्योग अपनी निर्भरताओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं, अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता ला रहे हैं और ऐसे विश्वसनीय साझेदारों की तलाश कर रहे हैं जो मजबूती, निरंतरता और आपसी विश्वास सुनिश्चित कर सकें।

उन्होंने कहा कि इस परिदृश्य में भारत एक विस्तारित बाजार, युवा और कुशल कार्यबल और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक इको-सिस्टम के साथ-साथ स्थिरता, पूर्वानुमानशीलता और कानून के शासन के प्रति दृढता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि अनिश्चित दुनिया में दीर्घकालिक निवेश के निर्णयों के लिए ये महत्वपूर्ण कारक हैं।

‘रीआर्म यूरोप और आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के तहत मौजूद अपार संभावनाओं का जिक्र करते हुए, श्री राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारतीय कंपनियां उन्नत रडार और सेंसर प्रौद्योगिकी, मल्टी-सेंसर, एआई-सक्षम मानवरहित हवाई प्रणाली, सोनोबॉय और उच्च शक्ति निम्न आवृत्ति वाले पानी के नीचे के ट्रांसमीटरों सहित क्षेत्रों में सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए जर्मन कंपनियों के साथ जुड़ने के इच्छुक हैं।

रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की परिवर्तनकारी यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य एक स्पष्ट दृष्टिकोण, सशक्त नीतिगत दिशा और 1.4 अरब लोगों की सामूहिक आकांक्षाओं से समर्थित है। उन्होंने कहा, “हम मजबूत व्यापक आर्थिक आधार और स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती और स्थिर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं।”

श्री राजनाथ सिंह ने भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में की जा रही पहल को अंतर्मुखी नहीं, बल्कि साझेदारी के नए रास्ते खोलने वाला बताया। उन्होंने कहा, “हम आत्मनिर्भरता को विश्वसनीय साझेदारों के सहयोग से भारत में ही डिजाइन, विकास और उत्पादन करने की क्षमता के रूप में देखते हैं। हम एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं जहां भारत रक्षा उपकरणों का केवल खरीदार नहीं, बल्कि डिजाइन, विकास और उत्पादन में भागीदार होगा।

यह बदलाव वैश्विक उद्योग के लिए नए अवसर पैदा करता है। आज की परस्पर जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर दुनिया में साझेदारी वैकल्पिक नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता है। जर्मनी के साथ हमारा जुड़ाव आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित है। यह एक ऐसी साझेदारी है जो पारस्परिक लाभ, साझा विकास और दीर्घकालिक मूल्य सृजन प्रदान करती है।”

रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में रक्षा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानता है और इसे अपनी औद्योगिक एवं तकनीकी रणनीति के केंद्र में रखा है। उन्होंने कहा, “रक्षा औद्योगिक इको-सिस्टम उद्योग, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करता है। इससे स्टार्टअप उद्योगों का निर्माण होता है, विशिष्ट तकनीकों का विकास होता है और आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होती हैं।

इस अर्थ में, रक्षा उद्योग का एक मजबूत आधार न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देता है, बल्कि आर्थिक स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी सहायक होता है। हम रक्षा क्षेत्र के उद्योग का एक मजबूत, आधुनिक और आत्मनिर्भर आधार बनाने की आकांक्षा रखते हैं। यह रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक भविष्य के लिए आवश्यक है।”

श्री राजनाथ सिंह ने जर्मन उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार ने पिछले एक दशक में कारोबारी सुगमता लाने और भारत को निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाने के लिए कई संरचनात्मक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा, “हमारी नीतियां पारदर्शी, पूर्वानुमानित और निवेशक-हितैषी हैं। हमने अपने मानदंडों को उदार बनाया है, अपने नियामक ढांचे को मजबूत किया है और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है।”

भारत के रक्षा औद्योगिक क्षेत्र पर रक्षा मंत्री ने कहा: “बाजार के रूप में, भारत की रक्षा संबंधी आवश्यकताएं काफी व्यापक हैं और आने वाले दशकों में इनमें वृद्धि जारी रहेगी। विनिर्माण केंद्र के रूप में, हम लागत प्रभावी उत्पादन, कुशल कार्यबल और आपूर्तिकर्ताओं के एक विशाल नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करते हैं। नवाचार के केंद्र के रूप में, हमारा स्टार्टअप नेटवर्क, इंजीनियरिंग प्रतिभा और डिजिटल क्षमताएं नई प्रौद्योगिकियों के सह-विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं।

हमारा स्टार्टअप नेटवर्क विश्व के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक है, जिसके बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में जीवंत केंद्र हैं। स्टार्ट-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया जैसी पहलों ने नवाचार और उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण बनाया है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भागीदार के रूप में, भारत के साथ सहयोग जोखिमों को कम करने और मजबूती बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

यह कोई अल्पकालिक अवसर नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक प्रस्ताव है।” श्री राजनाथ सिंह ने महत्वपूर्ण औद्योगिक साझेदारियों के माध्यम से भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों को मजबूत करने की सराहना की, जिसमें सह-विकास और सह-उत्पादन पर बढ़ता ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "दोनों देश विशेष रूप से भू-राजनीतिक परिवर्तनों के जवाब में रक्षा उपकरणों के लिए सशक्त आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए अपने उद्योगों के बीच तालमेल स्थापित कर रहे हैं।"

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत जर्मनी के साथ गहन और दीर्घकालिक साझेदारी की आशा करता है। उन्होंने कहा कि यदि भारत-जर्मनी साझेदारी के पहले अध्याय प्रौद्योगिकी, उद्यम और संस्कृति के माध्यम से लिखे गए थे, तो अगला अध्याय नवाचार, क्षमता और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से लिखा जा सकता है।

श्री राजनाथ सिंह ने 22 अप्रैल, 2026 को कील स्थित टीकेएमएस पनडुब्बी निर्माण संयंत्र का दौरा किया, जो भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है। इस दौरे से उन्नत समुद्री क्षमताओं पर विचारों का आदान-प्रदान करने और नौसेना प्रौद्योगिकी में सहयोग के अवसरों का पता लगाने का मौका मिला, जो भारत के रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण से जुड़ी प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

इससे पहले, रक्षा मंत्री ने बर्लिन में अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसका उद्देश्य यूरोपीय राष्ट्र के साथ रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना था। इस बैठक के दौरान रक्षा औद्योगिक सहयोग के रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा प्रशिक्षण में सहयोग के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए गए और उनका आदान-प्रदान किया गया।

 

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