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पुनात्सांगचू-I परियोजना का संक्षिप्त विवरण (11 अप्रैल, 2026 की स्थिति में)

भारत द्वारा वित्तपोषित भूटान की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना पर 7 वर्षों के बाद काम फिर से शुरू हुआ

Manohar Lal Khattar, Bhutan
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Gurpreet Singh

Gurpreet Singh

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भूटान , 11 Apr 2026

Last updated on: Apr 11, 2026, 16:08 IST

● पुनात्सांगचू-I जलविद्युत परियोजना (पीएचईपी-I) पश्चिमी भूटान के वांगडुफोड्रंग जोंगखाग में पुनात्सांगचू नदी पर  रन-ऑफ-द-रिवर योजना है। पीएचईपी-I की स्थापित क्षमता 1200 मेगावाट है और यह प्रति वर्ष औसतन 5670 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करेगी।

● पीएचईपी-I भूटान में चल रही सबसे बड़ी परियोजना है। एक बार पूरा हो जाने पर इससे भूटान की जलविद्युत क्षमता में लगभग 30% की वृद्धि होगी और यह लगभग 4700 मेगावाट हो जाएगी और प्रति वर्ष औसतन 5,670 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा।

● भारत सरकार इस परियोजना को वित्तपोषित कर रही है। वित्तपोषित राशि में 40% अनुदान और 60% ऋण शामिल है।

● पीएचईपी-I द्वारा उत्पादित अतिरिक्त बिजली भारत को दोनों देशों द्वारा निर्धारित मूल्य पर बेची जाएगी जिस पर परियोजना आरंभ होने के समय सहमति होगी।

● निर्माण कार्य 11 नवंबर 2008 को शुरू हुआ था और आरंभिक तौर पर परियोजना से उत्पादन आरंभ  होने का समय नवंबर 2015 निर्धारित किया गया था।

● हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान, सतह और भूमिगत कार्यों में महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिसके कारण डिजाइन में कई बदलाव करने पड़े। 2013 से बांध के दाहिने किनारे की ढलान के अस्थिर होने के कारण बांध के निर्माण कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप  बांध के जारी कार्यों को 2019 से निलंबित कर दिया गया।

● दोनों सरकारों और संबंधित एजेंसियों ने कई बैठकों में और अध्ययनों के द्वारा इन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। 31 जुलाई 2025 को दोनों सरकारें बांध निर्माण को फिर से शुरू करने और दाहिने किनारे की ढलान को स्थिर करने पर सहमत हुईं।

● लगभग सात वर्षों के बाद, 10 अप्रैल 2026 को वांगडू फोड्रंग में 1,200 मेगावाट की पुनात्सांगचू-I जलविद्युत परियोजना का काम बांध निर्माण आरंभ होने के साथ फिर शुरू हो गया है। विद्युत, आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल और भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री जेम शेरिंग ने 10 अप्रैल 2026 को शिलान्यास समारोह में भाग लिया - जो इस विशाल परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रमुख भूवैज्ञानिक चुनौतियों के कारण 2019 से बांध निर्माण कार्य रुका हुआ था।

● बांध निर्माण और दाहिने तटबंध ढलान स्थिरीकरण कार्यों के पूरा होने पर अगले पांच वर्षों के भीतर परियोजना से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

● भौतिक और वित्तीय प्रगति (28 फरवरी 2026 तक):

➢ सीसीईए द्वारा अनुमोदित लागत (दिसंबर 2013 पीएल): रु. 9375.57 करोड़

➢ वित्तीय प्रगति: 8785.19 करोड़ रुपये (93.70%), भौतिक प्रगति: 87.75%

संशोधित लागत अनुमान (आरसीई) सीईए और सीडब्ल्यूसी के साथ जांच के अधीन है।

 

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