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पंजाब में समान विकास सुनिश्चित करने के लिए पहली बार जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करवाया जाएगा : भगवंत सिंह मान

सभी समुदायों के जीवन स्तर का मूल्यांकन किया जाएगा; पूरी जानकारी गोपनीय रखने वाला यह सर्वेक्षण पहली अप्रैल से शुरू हो रहा है : भगवंत सिंह मान

Bhagwant Singh Mann, Tarunpreet Singh Sond
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चंडीगढ़ , 01 Apr 2026

Last updated on: Apr 02, 2026, 09:31 IST

पंजाब सरकार की ‘शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल’ श्रृंखला के हिस्से के रूप में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का चार साल का व्यापक रिपोर्ट कार्ड पेश किया, जिसमें यह दिखाया गया कि निरंतर नीतिगत हस्तक्षेप ने गांवों के बुनियादी ढांचे को कैसे बदला है, जमीनी स्तर पर प्रशासन को मजबूत किया है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।

ग्रामीण विकास को समग्र विकास के केंद्रीय स्तंभ के रूप में बताते हुए मुख्यमंत्री ने पंजाब के पहले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की शुरुआत से लेकर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा निर्माण, पारदर्शी भूमि प्रबंधन के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने और युवा-केंद्रित विकास कार्यक्रमों सहित प्रमुख पहलों की रूपरेखा पेश की।

पहली अप्रैल से शुरू होने वाले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को समानता और नीति निर्माण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य कार्रवाई को गोपनीय रखते हुए सभी समुदायों के जीवन स्तर का मूल्यांकन करना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास रिपोर्ट कार्ड एक व्यापक शासन ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत ‘आप’ सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सिंचाई, कृषि और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सेक्टर-वार प्रदर्शन के साथ-साथ जवाबदेही, पारदर्शिता और परिणामों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।

ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले चार वर्षों में गांवों का पूर्ण विकास हुआ है, जिसमें बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य, तालाबों की सफाई शामिल है क्योंकि राज्य ने सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाकर और अन्य तरीकों से पैसा कमाया है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य के सख्त प्रयासों के कारण पंचायत चुनावों में सर्वसम्मति में वृद्धि हुई है।

पंजाब में 13,236 पंचायतों के लिए चुनाव 2024 में हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या में पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं। 2018 में लगभग 1,870 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गई थीं, लेकिन 2024 में 2,970 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं थी।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “1,100 से अधिक पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं, जिससे गांवों में सामुदायिक सौहार्द मजबूत होता है और गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।”

उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने सरपंचों का मानभत्ता 1,200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह कर दिया है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ग्रामीण विकास के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2025-26 में ग्रामीण विकास पर 2,367.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जो 2024-25 के मुकाबले दोगुने थे। वर्ष 2017-22 के दौरान पांच वर्षों में गांवों के विकास पर 1,883 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि राज्य सरकार ने इस नेक कार्य के लिए पिछले चार वर्षों में 3,847 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “पंचायत इमारतों, लाइब्रेरियों, आंगनवाड़ी केंद्रों, खेल मैदानों, गलियों, नालियों और अन्य विकास कार्यों पर 1,030.94 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पीने के पानी, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य जरूरी सेवाओं पर 1,336.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और यह फंड जिला परिषदों, पंचायत समितियों और पंचायतों के माध्यम से जारी किए गए थे।”

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार ने गांवों में शामलात जमीनों को लीज पर देकर आय में वृद्धि की है। पंचायती जमीनों से अवैध कब्जे हटाए गए हैं, जिससे राज्य का राजस्व बढ़ा है। चार वर्षों में राज्य सरकार ने शामलात जमीन को लीज पर देकर 1,842.78 करोड़ रुपये कमाए हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “वर्ष 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले राजस्व 50.75 करोड़ रुपये बढ़ा है।

लगभग 1.35 लाख एकड़ जमीन लीज पर दी गई, जिससे 520.54 करोड़ रुपये का राजस्व आया, जबकि 2024-25 में 469.79 करोड़ रुपये आए थे।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “नौजवानों की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए लगभग 3,000 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं और इस पर 1,166 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

ये मैदान 6,500 एकड़ क्षेत्र में फैले होंगे, जिनके लिए 3,148 स्थानों की पहचान की गई है।” उन्होंने कहा, “2,400 मैदानों पर काम पहले ही शुरू हो चुका है और इनमें से अधिकांश इस वर्ष जून तक पूरे हो जाएंगे, जिनमें वॉलीबॉल कोर्ट, फुटबॉल मैदान, बच्चों के खेलने का सामान और बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं होंगी।” उन्होंने कहा, “राज्य के इतिहास में पहली बार पंचायत घरों का निर्माण किया गया है।

दूसरे चरण में 125 करोड़ रुपये के बजट से 500 आधुनिक पंचायत घर बनाए जा रहे हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रति इमारत 25 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं और पहले चरण में 373 इमारतें पहले ही पूरी हो चुकी हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने गांवों में 251 लाइब्रेरियां बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिनमें से 231 पहले ही पूरी हो चुकी हैं।

इसका उद्देश्य गांवों के लोगों को साहित्य से जोड़ना और नौजवानों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मनरेगा योजना के बारे में बात करते हुए कहा, “2017-2022 तक केवल 4,708 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि 2022 से अब तक 5,146 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 8.96 लाख लोगों को रोजगार मिला है और 2.40 करोड़ दिहाड़ियों का रोजगार सृजित हुआ है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “2025-26 में लगभग 63,357 नए जॉब कार्ड जारी किए गए थे, जिनमें से 2,480 दिव्यांग व्यक्तियों के लिए थे।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब मनरेगा योजना में तर्कहीन संशोधनों का सख्त विरोध करता है। पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए परिवर्तनों का विरोध किया था, जो ग्रामीण रोजगार को कम कर सकते हैं।

ऐसी प्रतिबंध-आधारित संशोधन गैर-वाजिब हैं क्योंकि ये संशोधन ऐसी योजनाओं के मकसद पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने ग्रामीण परिवारों के लिए आवासीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनुकरणीय पहल की हैं। इस वर्ष 76 हजार घरों के लिए मंजूरी दी गई थी, जिनमें 30 हजार बाढ़ प्रभावित परिवार शामिल थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “2016-2022 तक राज्य में केवल 39 हजार घर बनाए गए थे, जबकि इस वर्ष राज्य सरकार ने समाज के गरीब वर्ग के लिए एक लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा है।” उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने 17,080 गांवों के तालाबों की सफाई के लिए बड़ी योजना शुरू की है। 13,414 तालाबों से पानी निकाला गया है और 4,706 तालाबों से गाद निकालने का काम पूरा हो गया है, जिसके लिए 235 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सभी जातियों और उप-जातियों के जीवन स्तर का मूल्यांकन करना है ताकि उनकी भलाई के लिए नीतियां बनाई जा सकें। इस उद्देश्य के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें 28,000 गणनाकार तैनात किए जाएंगे और प्रत्येक को 62,500 रुपये मानभत्ता मिलेगा।”

उन्होंने कहा, “नशों के विरुद्ध जंग में राज्य के सभी गांवों ने अपना समर्थन दिया है। मैं पंचायतों और वॉलंटियरों का नशा विरोधी प्रयासों में सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं क्योंकि पहले ही 1.25 लाख सदस्य इस मुहिम में शामिल हो चुके हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “12 हजार विलेज डिफेंस कमेटियां बनाई गई हैं और वॉलंटियर ‘गांव के सरपरस्त’ के रूप में काम कर रहे हैं।

कई नशा तस्करों को इन कमेटियों की रिपोर्टों के आधार पर गिरफ्तार किया जाता है।” मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 23 जिलों की 100 अग्रणी महिला उद्यमियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्हों से सम्मानित किया गया। उन्हें 25,000 रुपये प्रति व्यक्ति भी दिए गए।” उन्होंने कहा, “117 विधानसभा क्षेत्रों में 11,700 महिलाओं को सम्मानित किया गया है और 2,300 महिलाओं को जिला स्तर के कार्यक्रमों में सम्मानित किया गया है।

मिशन के तहत 58,303 स्व-सहायता समूह बनाए गए हैं और 5.89 लाख परिवारों को जोड़ा गया है, जिन्हें 147 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “महिला सशक्तिकरण पहल के हिस्से के रूप में महिलाओं को डेयरी फार्मिंग से जोड़ने के लिए नई योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 1,100 दूध सहकारी समितियां रजिस्टर्ड की गई हैं और महिलाओं को 18 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण दिए गए हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये समितियां मिल्कफेड को रोजाना एक लाख लीटर दूध सप्लाई कर रही हैं। पूरे पंजाब में सखी शक्ति मेले लगाए गए थे, जिनमें 1,500 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया और उनके द्वारा तैयार किए गए नौ करोड़ रुपये के उत्पाद बेचे गए।” उन्होंने कहा, “समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहली बार विधानसभा क्षेत्रों के अनुसार ब्लॉकों का पुनर्गठन किया गया है।

ग्रामीण विकास अधिकारियों और पंचायत सचिवों को राज्य कैडर में शामिल कर दिया गया है। कार्य कुशलता में सुधार लाने के लिए राज्य में 3,327 पंचायत विकास सचिवों के लिए प्रांतीय कैडर बनाया गया है।” एक प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केंद्र सरकार पंजाब के साथ सौतेली मां वाला सलूक कर रही है।

आरडीएफ, जीएसटी, एनएचएम और अन्य ग्रांट्स को केंद्र ने रोक रखा है। इसका एकमात्र कारण यह है कि पंजाब में भाजपा को वोट नहीं मिलते, जिस कारण केंद्र सरकार पंजाब के साथ अन्याय कर रही है।”मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्र द्वारा आवंटित आपदा प्रबंधन फंड बहुत कम है और जनता के बड़े हित में इसमें संशोधन की आवश्यकता है।

राज्य इस भेदभाव का सख्त विरोध करेगा और राज्य का जायज हिस्सा प्राप्त करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। इस मुद्दे को कानूनी और प्रशासनिक रूप से हर प्लेटफॉर्म पर उठाया जाएगा।” एक और सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह हैरान करने वाली बात है कि पंजाब कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी की अगुवाई वाली हिमाचल सरकार द्वारा एंट्री टैक्स लगाए जाने पर चुप्पी साधे बैठे हैं, जबकि यह मुद्दा पंजाबियों के एक बड़े हिस्से से संबंधित है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “एक तरफ राज्य सरकार टोल टैक्स खत्म कर रही है और आम आदमी को राहत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य लोगों पर बिना जरूरी टैक्स लगा रहे हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार गेहूं की फसल की सुचारू और परेशानी मुक्त खरीद तथा लिफ्टिंग के लिए वचनबद्ध है और इसके लिए व्यापक प्रबंध पहले ही कर लिए गए हैं।

सुचारू खरीद को खतरे में डालने के लिए अपनाई जा रही ब्लैकमेलिंग की रणनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी ताकतों के विरुद्ध अनुकरणीय कार्रवाई की जाएगी।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार एक अच्छी सरकार काम कर रही है, जबकि पहले वाली सरकारें लोगों को लूटने तक सीमित थीं।”

उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार किसानों की जमीन से गुजरने वाली हाई टेंशन तारों को जमीनदोज करने की संभावना की पड़ताल कर रही है और रणनीति बनाई जा रही है। यह किसानों के लिए राहत होगी क्योंकि ये तारें फसलों के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा करती हैं।” इस मौके पर ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद तथा अन्य भी मौजूद थे।

 

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