Thursday, 04 June 2026

 

 

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत-डेलावेयर बायो मैन्‍युफैक्‍चरिंग विनिर्माण कार्य समूह का प्रस्ताव रखा

भारत ने डेलावेयर तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने के लिए स्टार्टअप और अनुसंधान एवं विकास संबंधी लिंकेज की पेशकश की

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5 Dariya News

नई दिल्ली , 02 Mar 2026

Last updated on: Mar 03, 2026, 13:27 IST

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज बताया कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका को उन्नत जैव-विनिर्माण में एक संरचित भारत-डेलावेयर साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने अनुसंधान, विनिर्माण और स्टार्टअप इकोसिस्‍टम में ठोस सहयोग को लेकर चर्चाओं को परिणाम में बदलने के लिए एक छोटे कार्य समूह के गठन का प्रस्ताव रखा।

यह प्रस्ताव डेलावेयर के गवर्नर मैट मेयर के नेतृत्व में आए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की बैठक के दौरान सामने आया, जिन्होंने आज यहां सेवा तीर्थ में डॉ. जितेन्‍द्र सिंह से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने फार्मा, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार आधारित औद्योगिक विकास में द्विपक्षीय सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ हैं।

उन्‍होंने कहा कि भारत उन अमेरिकी देशों के साथ "गहरे जुड़ाव की अच्छी संभावना" देखता है जिनके पास मजबूत नवाचार इकोसिस्‍टम है। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी और फार्मास्युटिकल के क्षेत्र में नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत के उभरने पर प्रकाश डाला, जिसकी क्षमता अनुसंधान और विकास से लेकर बड़े पैमाने पर, किफायती विनिर्माण तक फैली हुई है।

सरकार, शिक्षा जगत, उद्योग और स्टार्टअप को जोड़ने वाली भारत की एकीकृत नवाचार संरचना की ओर इशारा करते हुए, डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि 37 प्रयोगशालाओं और 7,500 से अधिक वैज्ञानिकों वाली वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) देश के अधिकांश औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास प्रयासों का आधार है।

उन्होंने हरित हाइड्रोजन और क्वांटम प्रौद्योगिकी से लेकर जीव विज्ञान और जैव औषध विज्ञान तक के राष्ट्रीय मिशनों में सीएसआईआर की भूमिका और प्रमुख दवाओं के लिए प्रक्रिया के विकास में इसके योगदान के बारे में बताया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने डेलावेयर के जैव-विज्ञान इकोसिस्‍टम का जिक्र करते हुए कहा कि उन्नत जैव-विनिर्माण, एआई-सक्षम प्रक्रियाओं, तीव्र पैमाने पर उत्पादन प्रौद्योगिकियों और अगली पीढ़ी के बायोलॉजिक्स और टीकों में सहयोग की प्रबल संभावना है, जिसमें जैव-फार्मास्युटिकल निर्माण में नवाचार के लिए राष्ट्रीय संस्थान (एनआईआईएमबीएल) भी शामिल है।

उन्होंने सुझाव दिया कि किफायती विनिर्माण में भारत की क्षमता, और प्रमुख अमेरिकी दवा कंपनियों से डेलावेयर की निकटता, वैश्विक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए किफायती बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और टीकों के विकास में सहायक हो सकती है। डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने सहयोग के विशिष्ट क्षेत्रों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिनमें संयुक्त उन्नत जैव-विनिर्माण प्लेटफॉर्म, भारतीय संस्थानों और डेलावेयर अनुसंधान केंद्रों को जोड़ने वाले ट्रांसलेशनल रिसर्च ब्रिज, स्टार्टअप और इनक्यूबेशन लिंकेज और जीएमपी विनिर्माण, नियामक विज्ञान और गुणवत्ता प्रणालियों में कार्यबल प्रशिक्षण शामिल हैं।

नियामक विज्ञान, मानकों के तालमेल और महत्वपूर्ण जैव-औषधीय इनपुट के लिए लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सहयोग को एक अन्य प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में पहचाना गया। इस संवाद के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों में लगभग 150 इनक्यूबेटरों को प्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करता है और सरकार ने निजी क्षेत्र और तकनीकी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष स्थापित किया है।

उन्होंने कहा कि इन प्लेटफार्मों का उपयोग डेलावेयर के अनुसंधान, विनिर्माण और स्टार्टअप इकोसिस्‍टम के साथ जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए किया जा सकता है। गवर्नर मेयर ने डेलावेयर को विज्ञान और औद्योगिक क्षेत्र में समृद्ध विरासत वाला राज्य बताया और इसके जैव-औषधीय विनिर्माण आधार, बढ़ते बंदरगाह इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और व्यापार-अनुकूल वातावरण पर प्रकाश डाला।

प्रतिनिधिमंडल में सरकार, विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल थे, जिन्होंने स्वच्छ हाइड्रोजन, कार्यबल विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और कॉर्पोरेट निगमन ढांचे में अवसरों पर चर्चा की। बैठक के समापन पर, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि एक संरचित कार्य समूह प्रणाली संयुक्त अनुसंधान प्रस्तावों, स्टार्टअप आदान-प्रदान और संस्थागत साझेदारियों सहित व्यावहारिक कार्यक्रमों में चर्चाओं को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। 

यह सहयोग भारत-अमेरिका की व्यापक रणनीतिक साझेदारी में राज्य-स्तरीय आयाम जोड़ता है, जिसमें जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण सहयोग के अगले चरण के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं।

 

Tags: Dr Jitendra Singh , Bharatiya Janata Party , BJP , Union Minister of Earth Sciences

 

 

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