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डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में डॉ. शेन रेती के साथ द्विपक्षीय वार्ता की

एआई समिट की बैठक ने भारत-न्यूजीलैंड अनुसंधान, नवाचार और जलवायु सहयोग को नई गति प्रदान की

Dr Jitendra Singh, Bharatiya Janata Party, BJP, Union Minister of Earth Sciences, Dr Shane Reti
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नई दिल्ली , 18 Feb 2026

Last updated on: Feb 19, 2026, 12:08 IST

विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कर्तव्य भवन-3 नई दिल्ली में न्यूजीलैंड के विज्ञान, नवाचार, प्रौद्योगिकी और शिक्षा मंत्री डॉ. शेन रेती के साथ व्यापक द्विपक्षीय बैठक की। डॉ. शेन एआई समिट में शामिल होने के लिए भारत में हैं और इस बैठक ने बढ़ते तकनीकी विमर्श को गहन द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग के साथ जोड़ने का अवसर प्रदान किया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच सौहार्दपूर्ण और प्रगतिशील संबंधों का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों के राजनीतिक नेतृत्व ने विज्ञान और नवाचार सहयोग को नए स्तर पर ले जाने के लिए अनुकूल वातावरण बनाया है। उन्होंने कहा कि आज विज्ञान कूटनीति द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और साझा आर्थिक और सामाजिक मूल्य में रणनीतिक भूमिका निभाती है।

दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। लेकिन साझेदारी को एक केंद्रित और परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण से लाभ होगा। एक साथ कई क्षेत्रों में प्रयास बिखेरने के बजाय, दोनों पक्षों ने स्पष्ट रूप से परिभाषित लक्ष्यों और मापने योग्य परिणामों के साथ एक या दो प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति व्यक्त की। 

इन्हें बाद में सहयोग के एक दीर्घकालिक, संरचित ढांचे में विस्तारित किया जा सकता है। अब दोनों देशों के अधिकारी तौर-तरीकों पर काम करेंगे और आगे विचार के लिए ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने चर्चा के दौरान जैव प्रौद्योगिकी और जैव अर्थव्यवस्था में भारत की तीव्र प्रगति को रेखांकित किया। इसमें परिवर्तनकारी बायो-ई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) मिशन और लगभग 10,000 स्टार्टअप को समर्थन देने वाले जैव-इनक्यूबेटरों का बढ़ता नेटवर्क शामिल है। 

जैव अर्थव्यवस्था और कृषि-आधारित नवाचार में न्यूजीलैंड की वैश्विक स्थिति को मान्यता देते हुए, दोनों पक्षों ने जलवायु-प्रतिरोधी फसलों, पशुधन और डेयरी जीनोमिक्स, मृदा माइक्रोबायोम अनुसंधान, कार्यात्मक खाद्य पदार्थों, वैकल्पिक प्रोटीन और न्यूट्रास्यूटिकल्स में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया। दोनों मंत्रियों ने कार्बन कैप्चर प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने और कैप्चर किए गए कार्बन के जैविक उपयोग से मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तन पर भी चर्चा की। 

यह सतत विकास और नेट-ज़ीरो लक्ष्यों की ओर साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई और स्वच्छ ऊर्जा चर्चा के प्रमुख स्तंभों के रूप में उभरे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्वच्छ ऊर्जा विविधीकरण और महासागर आधारित ऊर्जा अन्वेषण के माध्यम से नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में भारत के मिशन-संचालित दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की। 

उन्होंने लक्षद्वीप जैसे द्वीपीय क्षेत्रों में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने की पहलों सहित महासागर विज्ञान और विलवणीकरण प्रौद्योगिकियों में भारत की प्रगति को भी साझा किया। न्यूजीलैंड पक्ष ने भूतापीय ऊर्जा और नवीकरणीय प्रणालियों में अपनी विशेषज्ञता साझा की और दोनों मंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि महासागर ऊर्जा, भूतापीय अनुसंधान और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में संयुक्त क्षमताओं से पारस्परिक रूप से लाभकारी परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सेंसिंग, सुरक्षित संचार और क्वांटम फोटोनिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत ने अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित किए हैं। यह डिजिटल और भौतिक प्लेटफार्मों को एकीकृत करते हैं और रोबोटिक्स, ए आई और उन्नत सामग्रियों में प्रगति को गति प्रदान करते हैं। 

दोनों पक्षों ने उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग के महत्व को स्वीकार किया, विशेष रूप से अनुसंधान को व्यापक, सुरक्षित और सामाजिक रूप से लाभकारी अनुप्रयोगों में परिवर्तित करने के लिए। स्वास्थ्य क्षेत्र में, मंत्रियों ने डिजिटल और रोबोटिक चिकित्सा नवाचारों पर विचार-विमर्श किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत द्वारा हाल ही में 12,000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर किए गए टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड के सफल प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए इसे दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने में एक बड़ी उपलब्धि बताया। 

चर्चा में मधुमेह प्रबंधन प्रौद्योगिकियों, जिनमें निरंतर ग्लूकोज निगरानी प्रणाली शामिल हैं, और वजन घटाने वाली नई दवाओं के जिम्मेदार और विनियमित उपयोग के महत्व पर भी बात हुई, जिसमें एकीकृत चिकित्सा निगरानी और जीवनशैली संबंधी हस्तक्षेपों पर जोर दिया गया। अंतरिक्ष विज्ञान और ध्रुवीय अनुसंधान को बेहतर सहयोग के लिए आशाजनक क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया। 

दोनों पक्षों ने अंटार्कटिका अनुसंधान के वैश्विक महत्व और एशिया-प्रशांत क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली जलवायु प्रणालियों पर इसके प्रभावों को स्वीकार किया। उपग्रह अवलोकन, उच्च-ऊंचाई प्रयोगों और हिमनद विज्ञान में अवसरों पर चर्चा की गई, और यह माना गया कि इन क्षेत्रों में वैज्ञानिक सहयोग वैश्विक जलवायु समझ में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

बैठक में दोनों देशों के बीच संरचित वैज्ञानिक संवादों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया गया, विशेष रूप से हाल के वर्षों में उच्च-स्तरीय सहभागिता में आई कमी को देखते हुए। दोनों मंत्रियों ने नियमित संस्थागत अंतःक्रियाओं, संयुक्त अनुसंधान आमंत्रणों और शोधकर्ता गतिशीलता ढाँचों के माध्यम से गति बहाल करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। 

न्यूजीलैंड पक्ष ने प्रमुख वैश्विक अनुसंधान मंचों के साथ जुड़ाव सहित अपने अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान कार्यों से प्राप्त जानकारियों को साझा किया, जिससे सहयोगात्मक मार्गों को मजबूत करने के लिए अनुभवों के आदान-प्रदान की तत्परता का संकेत मिलता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के विज्ञान सुधार और मिशन-आधारित कार्यक्रम सामाजिक चुनौतियों का समाधान करते हुए आर्थिक लाभ उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। 

न्यूजीलैंड जैसे समान विचारधारा वाले देशों के साथ साझेदारी से प्रभाव को और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्पष्ट रूप से परिभाषित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने से ठोस परिणाम प्राप्त होंगे और आने वाले वर्षों में भारत-न्यूजीलैंड विज्ञान और नवाचार साझेदारी और मजबूत होगी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, सीएसआईआर और अन्य एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियो के साथ उच्चायुक्त के नेतृत्व में न्यूजीलैंड प्रतिनिधिमंडल के सदस्य चर्चा के दौरान उपस्थित थे।

 

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