Tuesday, 21 July 2026

 

 

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अमित शाह ने गुजरात में ‘मंथन’ मीटिंग की अध्यक्षता की

‘सहकार से समृद्धि’ विजन के तहत ₹265 करोड़ की सहकारी परियोजनाओं का अनावरण किया

Amit Shah, Union Home Minister, BJP, Bharatiya Janata Party, Minister of Cooperation, Bhupendra Patel, Bhupendrabhai Rajnikantbhai Patel, Krishan Pal Gurjar, Krishan Pal Gurjar
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गांधीनगर , 17 Feb 2026

Last updated on: Feb 18, 2026, 12:27 IST

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गुजरात की राजधानी गांधीनगर में 'सहकार से समृद्धि' के अंतर्गत सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों के साथ मंथन बैठक की अध्यक्षता की। केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने ‘मंथन बैठक’ में इथेनॉल, एनर्जी, जैविक पोटाश, वेयरहाउस व प्रोटीन पाउडर प्लांट संबंधी ₹265 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।

 साथ ही, उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन और सहकारिता की बेस्ट प्रैक्टिसेज एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष पर रिपोर्ट का विमोचन भी किया। इस अवसर पर केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्णपाल गुर्जर, श्री मुरलीधर मोहोल और सचिव, सहकारिता मंत्रालय सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। 

आने वाले पच्चीस साल तक विश्व की अर्थतंत्र की दिशा निर्धारित करने वाले क्षेत्र में हम आज पायोनियर के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मंथन बैठक का आयोजन इसीलिए हो रहा है कि हम 2047 में भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि एक पूर्ण विकसित भारत का अर्थ है कि 140 करोड़ लोग सम्मान के साथ जी सकें, ऐसी व्यवस्था करना। 

उन्होंने कहा कि भारत के हर परिवार, हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का माध्यम सिर्फ और सिर्फ सहकारिता ही बन सकती है। श्री अमित शाह ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास और पशुपालन क्षेत्रों को जब तक हम मज़बूत नही करते हैं तब तक देश का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम सभी मनोयोग के साथ इस प्रयास को सफल बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि हमने एक वैज्ञानिक तरीके से विगत चार साल से देश के सहकारिता क्षेत्र को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है और उसके परिणाम अब दिखने लगे हैं। केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने सहकारिता की स्वीकृति को बढ़ाने वाली बातों पर बल दिया। इनमें अन्न भंडारण की व्यवस्था पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में लगभग तीन गुना बढ़ाने की ज़रूरत है, जिसमें से 2 गुना सहकारिता क्षेत्र को करनी चाहिए। 

उन्होंने कहा कि ये सभी की जिम्मेवारी है, केवल PACS पर न छोड़ें, तहसील की कोआपरेटिव डेयरियां, स्टेट लेवल के मार्केटिंग फेडरेशन, डिस्टिक कोऑपरेटिव बैंक फाइनेंस कराकर, डिस्ट्रिक के सेल्स-परचेज यूनियन, सबको बड़े-बड़े गोदाम बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका एक और पहलू है कि हमारा 70 प्रतिशत अनाज उत्तर भारत से - पंजाब और हरियाणा में में खरीदा जाता है,  मेरा कहना है कि यहीं से अनाज की खरीदी होगी, यहीं स्टोर होगा और यहीं से वितरित हो जाएगा तो हम ट्रांसपोर्टेशन की लगत कम से कम 30-40 प्रतिशत बचा सकतें हैं , पूरे देश भर में भण्डारण की व्यवस्था संरेखित और सर्वस्पर्शीय भंडारण  होनी चाहिए।

श्री अमित शाह ने कहा कि सभी राज्य बंद पड़ी चीनी मिलों को शुरू करने के लिए प्रयास करें। उन्होंने कहा की अभी हमने राष्ट्रीय स्तर पर एक कोऑपरेटिव बनायी है। जो शुगर मिल की माली हालत ठीक नहीं है, वो अलग से उसमें से खाद बनाना  है, वह प्रक्रिया वो  पूरी करें। उसमें से गैस बनाना है, वह प्रक्रिया वह पूरी करें। तो आने वाले दिनों में शुगर मिल में से अलग-अलग प्रकार के ग्यारह उत्पाद बन सके, इस प्रकार का सफल एक्पेरिमेंट हो चुका है।

उन्होंने कहा कि मैं मार्च के पहले हफ्ते में इस कार्यरचना को अंतिम रूप देने वाला हूँ और जो शुगर मिल सिर्फ शुगर बना रही है वहाँ पर हमारी राष्ट्रीय स्तर की कोऑपरेटिव बाकी का सारा अटैचमेंट कर देगी।  इसके लिए भी राज्यों ने अपने यहाँ लचीली पॉलिसी बनानी पड़ेगी। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि हर राज्य अपने डेयरी विभाग और सहकारिता विभाग की टीमों को बनासकांठा डेयरी को देखने के लिए भेजें। 

उन्होंने कहा कि बनासकांठा डेयरी ने कई प्रकार के काम किए हैं जिससे सभी राज्यों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। ‘सहकारिता में सहकार’ (Cooperation Amongst Cooperatives) पर बल देते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सभी सहकारी संस्थाओं के बैंक खाते ज़िला सहकारी बैंकों में होने चाहिए। 

उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने निर्णय किया है कि भारत सरकार की सभी योजनाओं में कोऑपरेटिव बैंक को नोडल एजेंसी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को प्रयास करना चाहिए कि सारे प्रधानमंत्री किसान कल्याण योजना का पैसा उसी में चला जाए, वृद्ध पेंशन का पैसा उसी में चला जाए, सारी योजनाओं को हम इसके अंदर अब डाल सकते हैं।

श्री अमित शाह ने आने वाले दिनों में जो खुदरा मजदूरी करने वाले लोग हैं, कारपेंटर्स हैं, प्लंबर है, इलेक्ट्रीशियन हैं, जिनका शोषण होता है, इनकी भी कोऑपरेटिव बनाकर, उनको सम्मानजनक राशि मिले, इसके लिए भी कोऑपरेटिव बनाएंगे, ढ़ेर सारे सेक्टरों में हम आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस देश की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी सहकारिता के साथ जुड़ जाएगी।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा भारत टैक्सी आने वाले कुछ वर्षों में हर एक म्यनिशिपल कॉरपोरेशन तक पहुंच जाएगी। 3 लाख से अधिक चालक इससे जुड़े चुके हैं। इससे चालकों और यात्रियों दोनों को लाभ मिलने वाला है। इससे  पूर्व 'मंथन बैठक' में विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से सहकारिता से जुड़े हुए विभिन्न विषयों पर की गयी पहलों की प्रगति, उपलब्धियों तथा भविष्य की कार्ययोजना का अवलोकन एवं मूल्यांकन किया गया। 

इन प्रस्तुतियों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए 2 लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS), डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति पर चर्चा हुयी। इसके साथ-साथ 'मंथन बैठक' में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत देशभर में आधुनिक गोदामों के नेटवर्क के विस्तार पर बल दिया गया, जिससे किसानों को बेहतर भंडारण, मूल्य स्थिरता और बाज़ार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित हो सके।

मंथन बैठक में राष्ट्रीय स्तर की नई सहकारी संस्थाओं, नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL) तथा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) — में राज्यों की सक्रिय भागीदारी और  निर्यात, जैविक खेती और गुणवत्तापूर्ण बीज आपूर्ति के क्षेत्र में सहकारिता को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया गया। 

इसके साथ ही, राज्यों के सहकारिता कानूनों में समयानुकूल सुधार, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप मॉडल अधिनियम को अपनाने, सहकारी गन्ना मिलों की आर्थिक व्यवहार्यता तथा लाभ बढ़ाने, डेयरी क्षेत्र में सर्कुलरिटी एवं सस्टेनेबिलिटी को प्रोत्साहन देने, तथा अमूल और एनडीडीबी के सहयोग से नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन जैसे विषयों पर भी चर्चा की गयी।

बैठक में दलहन एवं मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने, सहकारी बैंकों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान, साझा सेवा इकाई (SSE) एवं अंब्रेला संरचना को सुदृढ़ करने, सदस्यता विस्तार एवं जागरूकता अभियान को मजबूत बनाने, और प्रभावी मीडिया-संचार रणनीति विकसित करने जैसे जैसे विषयों पर भी विस्तार से प्रस्तुति एवं चर्चा की गयी। 

इसके अतिरिक्त, PACS एवं RCS कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के उपयोग, मानव संसाधन विकास, प्रशिक्षण और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर भी राज्यों से अपेक्षाओं को साझा किया गया।

 

Tags: Amit Shah , Union Home Minister , BJP , Bharatiya Janata Party , Minister of Cooperation , Bhupendra Patel , Bhupendrabhai Rajnikantbhai Patel , Krishan Pal Gurjar , Krishan Pal Gurjar

 

 

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